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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 355

३३२ सूर्य-सिद्धान्त
दूसरा खण्ड—
जब इष्टकाल ५२ घड़ी १० पल होगा तब पच्छिम नतकाल
= ५२ घड़ी १० पल - १६ घड़ी ४३ पल
अर्थात् मध्याह्न के उपरान्त ३५ घड़ी २७ पल भर सूर्योदय से ५२ घड़ी १०
पल बीता रहेगा । इस समय सूर्य का निरयन भोगांश = ३^रा ५° ५१'
इसलिए कर्क राशि का भोगांश = २४°६'
जब पूरी कर्क राशि १८३३ असुओं में यामोत्तर वृत्त का उल्लंघन करती है
तब इसकी २४°६' कितने असुओं में उल्लंघन करेगी ।
१८०० : १४४६ : : १८३३ : भोगांश का उल्लंघन काल
∴ भोगांश का उल्लंघन काल = १४४६ x १८३३ / १८००
= १४७६ असु
= २४६ पल
= ४ घड़ी ६ पल
अब पच्छिम नतकाल = ३५ घड़ी २७ पल
मध्याह्न के बाद कर्क के उल्लंघन में ४ घड़ी ६ पल लगेगा
अन्तर ३१ घड़ी २१ पल
सिंह का यामोत्तर उल्लंघन ४ घड़ी ४२ पल में होता है
अन्तर २६ घड़ी ३९ पल
कन्या का यामोत्तर उल्लंघन ४ घड़ी ३७ पल में होता है
अन्तर २२ घड़ी २ पल
तुला का यामोत्तर उल्लंघन ४ घड़ी ५३ पल में होता है
अन्तर १७ घड़ी ६ पल
वृश्चिक का यामोत्तर उल्लंघन ५ घड़ी १७ पल में होता है
अन्तर ११ घड़ी ५२ पल
धनु का यामोत्तर उल्लंघन ५ घड़ी २५ पल में होता है
अन्तर ६ घड़ी २७ पल
मकर का यामोत्तर उल्लंघन ५ घड़ी ५।। पल में होता है
अन्तर १ घड़ी २१।। पल
∴ कुम्भ राशि यामोत्तर वृत्त पर लग्न है । क्योंकि अन्तिम अन्तर से कुम्भ
राशि का यामोत्तर उल्लंघन काल नहीं घटता है इसलिए यही अशुद्ध राशि है । अब
यह देखना है कि इसका कौन बिन्दु यामोत्तर वृत्त पर है ।