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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 354

त्रिप्रश्नाधिकार ३३१
सूर्य का निरयन भोगांश = ३^रा ५° १' ६"
अयनांश = २२° ४१'
∴ सूर्य का सायन भोगांश = ३^रा २७° ४२' = ११७° ४२'
∴ क्रान्तिज्या = ज्या ११७° ४२' × ज्या २३ २७'
= ज्या (१८०° - ११७° ४२') × ज्या २३ २७'
= ज्या ६२° १८' × ज्या २३° २७'
= .८८५४ × .३९७६
= .३५२३
∴ क्रान्ति = २०° ३८' उत्तर
∴ चरज्या = स्परे २०° ३८' × स्परे २५° २५'
= .३७६६ × .४७५२
= .१७६०
∴ चरांश = १०° १८' = ६१८'
∴ चरकाल = ६१८ असु = १०३ पल = १ घड़ी ४३ पल
∴ दिनार्द्धमान = १५ घड़ी + १ घड़ी ४३ पल
= १६ घड़ी ४३ पल
अर्थात् सूर्योदय से १६ घड़ी ४३ पल पर ठीक मध्याह्न होगा ।
परन्तु इष्टकाल १६ घड़ी १५ पल है जिस समय सूर्य का निरयन भोगांश
३^रा ५° १६' ३८" अथवा ३^रा ५° १७' है (देखो ४५-४७ श्लोकों का विज्ञान भाष्य)
इसलिए पूर्व नतकाल = २८ पल = १६८ असु
सूर्य कर्क राशि में है जिसके लंका के उदयासु १८३३ हैं (सारिणी के ६ठें
स्तम्भ के मान को कलाओं में लिखने से असुओं की संख्या आ जाती है) । अब यह
देखना है कि जब १८३३ असुओं में पूरी कर्कराशि अर्थात् १८०० कला यामोत्तर वृत्त
को उल्लंघन करती है तब १६८ असुओं में कर्क राशि का कौन भाग उल्लंघन करेगा ।
१८८३ : १६८ : : १८०० : इष्ट भाग ।
∴ इष्टभाग = (१६८ × १८००) / १८३३
= १६५'
= २° ४५'
यही यामोत्तर वृत्त और सूर्य के बीच का क्रान्तिवृत्त का खंड है । परन्तु
सूर्य ३^रा ५° १७' पर है । इसलिए ३^रा ५° १७' - २° ४५' = ३^रा २° ३२' यामोत्तर
लग्न है ।