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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 139

११६ सूर्य सिद्धान्त
उ
अ इ आ
ऊ
चित्र २४
यदि प = ३ ३/४ अंश = २२५'
तो ज्या प = २२५'
ज्या प
ज्या ७ १/२ अंश = ज्या २ प = ज्या प + ज्या प - ――― = २२५' + २२५' - १'
ज्या प
= ४४६';
ज्या प + ज्या २ प
ज्या ११ १/४ अंश = ज्या ३ प = ज्या २ प + ज्या प - ―――――――
ज्या प
= ४४६' + २२५' - ३ = ६७१' ;
ज्या प + ज्या २ प + ज्या ३ प
ज्या १५° = ज्या ४ प = ज्या ३ प + ज्या प - ―――――――――――
ज्या प
= ६७१' + २२५' - (१ + २ + ३) = ८६०' ;
इसी प्रकार ज्या (स + १) प
ज्या प + ज्या २ प + ... ज्या (स प)
= ज्या ( स प ) + ज्या प - ―――――――――――――――
ज्या प
इसकी उपपत्ति महामहोपाध्याय बापूदेव शास्त्रीजी के अनुसार १ यह है :--
कल्पना करो, ज्या प - ज्या ० = त१,
ज्या २ प - ज्या प = त२,
ज्या ३ प - ज्या २ प = त३,


१. देखो सूर्य सिद्धान्त का बापूदेवजी शास्त्री द्वारा अंग्रेजी अनुवाद