सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Sur Sagar Saar with Hindi Commentary
महाकवि सूरदास / डॉ. धीरेन्द्र वर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवृन्दावन लीला ८६
मारि भजत जो जाहि ताहि सो, मारत लेत आपनौ दाउ ।
सूर स्याम के गुन को जानै कहत और कछु और उपाउ ॥२३॥
अर्थ—मित्रों को साथ लेकर कृष्ण खेलते हैं । एक गेंद को मारता है, एक
रोकता है, एक अनेक प्रकार के खेल करके भागता है । आपस मे मार करते हुए वे
सब बहुत सुखी है । खेलते-खेलते ही कृष्ण सबको यमुना तट पर ले गये । मारकर जो
भागता था उसे मारकर (कृष्ण) अपना दांव लेते थे, । सूरदास कहते है कि कृष्ण के
गुणों को कौन जानता है, वे कुछ कहते हैं और कुछ अन्य उपाय करते हैं ॥२३॥
स्याम सखा कौं गेंद चलाई ।
श्रीदामा मुरि अंग बचायौ, गेंद परी कालीदह जाई ।
धाइ गही तब फेंट स्याम की, देहु न मेरी गेंद मँगाई ।
और सखा जनि मोकौ जानौ, मोसौँ तुम जनि करौ ढिठाई ।
जानि-बूझि तुम गेंद गिराई, अब दीन्हैं ही बनै कन्हाई ।
सूर सखा सब हँसत परस्पर, भली करी हरि गेंद गँवाई ॥२४॥
अर्थ—कृष्ण ने मित्र के ऊपर गेंद फेंका (चलाया) । श्रीदामा ने मुड़कर अङ्ग
बचाया जिससे गेंद जाकर कालीदह मे गिर गयी । तब (श्रीदामा) ने दौड़कर कृष्ण
की फेंट पकड़ ली (और कहा) मेरी गेंद (यदि) नहीं मँगा देते हो (तो ठीक न होगा)
मुझे अन्य सखाओं के समान मत समझो । तुम मुझसे ढीठपन मत करो । तुमने जान-
बूझकर गेंद को गिरा दिया अब हे कृष्ण गेंद देने से ही काम बनेगा । सूरदास कहते हैं
कि सब मित्र परस्पर हँसते हैं (और कहते हैं) अच्छा किया कृष्ण ने गेंद को गायब
कर दिया ॥२४॥
फेंट छांड़ि मेरी देहु श्रीदामा ।
काहै कौं तुम रारि बढ़ावत, तनक बात कैँ कामा ।
मेरी गेंद लेहु ता बदलैं, बाँह गहत हौ धाइ ।
छोटौ बड़ी न जानत काहूँ, करत बराबरी आइ ।
हम काहे कौँ तुमहिं बराबर, बड़े नंद के पूत ।
सूर स्याम दीन्है ही बनिहैं, बहुत कहावत धूत ॥२५॥
अर्थ—(कृष्ण कहते हैं) हे श्रीदामा मेरी फेंट छोड़ दो । तुम छोटी-सी बात
के लिए क्यों झगड़ा बढ़ाते हो । अपनी गेंद के बदले मेरी गेंद ले लो । तुम दौड़कर
बांह (क्यो) पकड़ते हो । किसी को छोटा बड़ा नही समझते हो । (बस) आकर
बराबरी करने लगते हो । (श्रीदामा कहते हैं) हम तुम्हारे बराबर कैसे हो सकते हैं
(क्योकि तुम) बड़े नंद के पुत्र हो । हे कृष्ण गेंद देने से ही बनेगा (भले ही) तुम बहुत
धूर्त कहे जाते हो ॥२५॥
रिस करि लीन्ही फेंट छुड़ाइ ।
सखा सबै देखत हैं ठाढ़े, आपुन चढ़े कदम पर धाइ ।