सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Sur Sagar Saar with Hindi Commentary
महाकवि सूरदास / डॉ. धीरेन्द्र वर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३७० सूरसागर सार सटीक
तब हौं नगर अयोध्या जैहौं।
एक बात सुनि निश्चय मेरी, राज्य विभीषन दैहौं।
कपि-दल जोरि और सब सेना, सागर सेतु बँधैहौं।
काटि दसौ सिर, बीस भुजा तब दसरथ सुत जु कहैहौं।
छिन इक माहिं लंक गढ़ तोरौँ, कंचन-कोट ढहैहौं।
सूरदास प्रभु कहत विभीषन, रिपु हति सीता लैहौं ॥१३॥
अर्थ—(राम कहते हैं) तभी मैं अयोध्या जाऊँगा। मेरे निश्चय (संकल्प) की
एक बात सुनो (कि) (मैं) (लंका का राज्य) विभीषण को दूंगा। कपियो का दल
तथा अन्य सभी (प्रकार की) सेना जोड़कर समुद्र पर पुल बनाऊँगा। (रावण के) दसों
सिरो तथा बीसो भुजाओ को काटकर (ही) दशरथ का पुत्र कहाऊँगा। एक क्षण-मात्र
मे (ही) लंका के किले को तोडकर कंचन के कंगूरों को ढाह (गिरा) दूंगा। सूरदास
के (राम) कहते है (कि) हे विभीषण ! मैं शत्रु को मार कर सीता को ले लूंगा (प्राप्त
करूँगा) ॥१३॥
दूसरैं कर वान न लैहौं।
सुनु सुग्रीव, प्रतिज्ञा मेरी, एकहिं बान असुर सब हैहौं।
सिव-पूजा जिहिँ भाँति करी है, सोइ पद्धति परतच्छ दिखैहौं।
दैत्य प्रहार पाप-फल-प्रेरित, सिर माला सिव सीस चढ़ैहौं।
मनौ तूल-गन परत अगिनि-मुख, जारि जड़न जम-पंथ पठैहौं।
करिहौँ नाहिँ विलंब कछू अब, उठि रावन सम्मुख ह्वै धैहौँ।
इमि दमि दुष्ट देव द्विज मोचन, लंक विभीषन, तुमकौं दैहौँ।
लछिमन, सिया समेत सूर कपि, सब सुख सहित अयोध्या जैहौँ ॥१४॥
अर्थ—हाथ मे दूसरा बाण नही लूंगा। सुग्रीव मेरी प्रतिज्ञा सुनो, एक ही बाण
मे सभी असुरो को मार डालूंगा। जिस तरह रावण ने शिव की पूजा की है उस पद्धति
को प्रत्यक्ष ही दिखा दूंगा। पाप-फल से प्रेरित दैत्यो का विनाश करके (उनके) सिर
की माला शिव के सिर पर चढ़ाऊँगा। जिस प्रकार रूई का समूह आग पर पड़ रहा हो,
(उसी तरह इन) मूर्खो को (राक्षसो को) जलाकर यमराज (मृत्यु) के रास्ते पर भेज
दूंगा। अब कुछ भी देर नही करूँगा, उठकर रावण के सम्मुख दौड़ पडूँगा (टूट
पडूँगा)। इस तरह दुष्टो का दमन करके ब्राह्मण तथा देवताओ को मुक्त करके, हे
विभीषण ! लंका तुम्हे दूंगा। सूरदास (कहते हैं) (राम कहते हैं) (कि) लक्ष्मण, सीता
(तथा) वानरो (आदि) सब के साथ सुख-पूर्वक अयोध्या जाऊँगा ॥१४॥
आजु अति कोपे हैं रन राम।
ब्रह्मादिक आरूढ़ विमाननि, देखत हैं संग्राम।
घन तन दिव्य कवच सजि करि, अरु कर धारयौ सारंग।
सुचि करि सकल बान सूधे करि, कटि-तट कस्यौ निषंग।