सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Sur Sagar Saar with Hindi Commentary
महाकवि सूरदास / डॉ. धीरेन्द्र वर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२२० सूरसागर सारः सटीक
पर लेप की। (कृष्ण ने) रीझ कर उसे रूप प्रदान किया तथा अंग सीधा कर दिया
और शुभ वचन कहकर घर भेजा। फिर वहां गये जहां धनुष था। सुभटों ने कहा कि
हे बनविहारी ! (धनुष तोड़ने) का हौंसला मत करो। सूरदास कहते हैं कि छूते ही
धनुष टूटकर पृथ्वी पर जा पड़ा, शोर सुनकर कंस बहुत भ्रमित हुआ ॥२१॥
सुनिहि महावत बात हमारी।
बार-बार संकर्षण भाषत, लेत नाहिं ह्याँ तैं गज टारी।
मेरौ कह्यौ मानि रे मूरख, गज समेत तोहिं डारौं मारी।
द्वारैं खरे रहे हैं कबके, जनि रे गर्व करहि जिय भारी।
न्यारौ करि गयंद तू अजहूँ, जान देहि कै आपु सँभारी।
सूरदास प्रभु दुष्ट निकंदन, धरनी भार उतारनकारी ॥२२॥
अर्थ—महावत हमारी बात सुनो ! बार-बार संकर्षण (बलराम) कहते हैं, यहाँ
से (हाथी को) हटा क्यों नहीं लेता। मूर्ख ! मेरा कहना मानो, नहीं तो हाथी सहित
तुम्हें मार डालूँगा। कब से (कृष्ण) द्वार पर खड़े हैं, (यह) जानकर भी तू मन में
अत्यधिक गर्व करता है। अभी तू हाथी को अलग कर, या तो जाने दे या प्राण देने
के लिए सँभल जा। सूरदास कहते हैं कि (कृष्ण) दुष्टों के नाशक तथा पृथ्वी का भार
उतारने वाले हैं ॥२२॥
तब रिस कियौ महावत भारि।
जौ नहिं आज मारिहौं इनकौं, कंस डारिहै मारि।
आंकुस राखि कुम्भ पर कर्षयौ, हलधर उठे हँकारि।
धायौ पवनहुँ तैं अति आतुर, धरनी दंत खंभारि।
तब हरि पूँछ गह्यौ दच्छिन कर, कँबुक फेरि सिर वारि।
पटक्यौ भूमि, फेरि नहिं मटक्यौ, लीन्हौ दंत उपारि।
दुहुँ कर दुरद दसन इक इकछवि, सो निरखतिं पुरनारि।
सूरदास प्रभु सुर सुखदायक, मारयौ नाग पछारि ॥२३॥
अर्थ—तब महावत ने अत्यधिक क्रोध किया। जो इन्हे आज मार नहीं डालता
,तो कंस (मुझे) मार डालेगा। (उसने) अंकुश दोनो कुंभों पर रखकर खींचा (चुभोया)
(इस पर) बलराम ललकार उठे। (तब) दांतों से पृथ्वी को कंपित करके (वह हाथी)
पवन से भी अधिक तीव्रता से दौड़ा। तब कृष्ण ने दाहिने हाथ से पूंछ पकड़ी। हाथी
को सिर के चारों ओर फिराकर पृथ्वी पर पटक दिया, फिर वह हिला-डुला नहीं
तथा (तब) (कृष्ण ने) उसके दांत उखाड़ लिये। दोनों दांत एक-एक हाथ मे शोभित
हैं जिन्हे नगर की स्त्रियां देख रही है। सूरदास कहते हैं कि प्रभु देवताओ को सुख देने
वाले है। उन्होंने हाथी को पछाड़कर मारा ॥२३॥
एई सुत नंद अहीर के।
मारयौ रजक बसन सब लूटे, संग सखा बल वीर के।