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सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)

सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Sur Sagar Saar with Hindi Commentary

महाकवि सूरदास / डॉ. धीरेन्द्र वर्मा द्वारा

DevanagariBrajpublished359 पृष्ठ

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पृष्ठ 125

१२४ सूरसागर सार सटीक
ऐसैं जनि बोलहु नंद-लाला ।
छाँड़ि देहु अँचरा मेरौ नीकैं, जानत और सी वाला ।
बार-बार मै तुमहिं कहत हौं, परिहौ बहुरि जँजाला ।
जोवन, रूप देखि ललचाने, अवहीं तैं ये ख्याला ।
तरुनाई तनु आवन दीजै, कत जिय होत विहाला ।
सूर स्याम उर तैं कर टारहु, टूटै मोतिनि-माला ॥११२॥
अर्थ—(गोपी कहती है) हे नन्दलाल ऐसे मत कहो । मेरे सुन्दर अंचल को
छोड़ दो, मुझे अन्य बालाओं के समान (तो नहीं) समझ रहे हो । मैं वार-वार तुमसे
कहती हूँ कि फिर तुम जंजाल मे पड़ जाओगे । यौवन रूप को देखकर (आप) ललचा
गये और अभी से ये बाते सोचने लगे । शरीर मे जवानी आने दीजिए; मन (अभी से)
आकुल क्यों होता है । सूरदास कहते हैं कि (गोपी कहती है) वक्षस्थल से हाथ हटा
लो (नही तो) मोतियो की माला टूट जायेगी ॥११२॥
तैं कत तोर्यौ हार नौ सरि कौ ।
मोती वगरि रहे सब-वन मैं, गयौ कान कौ तरिकौ ।
ये अवगुन जु करत गोकुल मैं, तिलक दिये केसरि कौ ।
ढीठ गुवाल दही कौ मातौ, ओढ़नहार कमरि कौ ।
जाइ पुकारैं जसुमति आगैं, कहति जु मोचन लरिकौ ।
सूर स्याम जानी चतुराई, जिहिँ अभ्यास महुअरि कौ ॥११३॥
अर्थ—तुमने नव लड़ियो का हार क्यों तोड़ दिया ? (टूटकर) सब मोती वन
में बिखर गये । कान का तरीना भी (चला) गया । केसर का तिलक देकर गोकुल मे
इन अवगुणो को करते हो । (तुम) दही से मस्त, तथा कमरी के ओढ़ने वाले ढीठ
ग्वाल हो । जाकर पुकार कर यशोदा के आगे कहूँगी जो मोहन को बालक कहती हैं ।
सूरदास कहते हैं कि (गोपी कहती है) कृष्ण चतुरता जान गये जिन्हे महुअर (बाजा)
का अभ्यास हो गया है ॥११३॥
आपुन भईं सवै अब भोरी ।
तुम हरि कौ पीताम्बर झटक्यौ, उन तुम्हरी मोतिनि लर तोरी ।
माँगत दान ज्वाव नहिं देतीं, ऐसी तुम जोवन की जोरी ।
डर नहिं मानतिं नंद-नंदन कौ, करतिं आनि झकझोरा झोरी ।
इक तुम नारि गँवारि भली हौ, त्रिभुवन मैं इनकी सरि को री ।
सूर सुनहु लैहैं छँडाइ सब, अवहिँ फिरौगी दौरी दौरी ॥११४॥
अर्थ—अब सभी अपने आप अनजान (भोली) हो गयी, तुमने कृष्ण का पीतांबर
झटका, उन्होने तुम्हारी मोतियो की लड़ी तोड़ी । (उनके) दान मांगने पर (तुम लोग)
जवाब नहीं देती, (तुम) ऐसी यौवन के जोर वाली हो गयी हो । तुम नन्द के
नन्दन (कृष्ण) का डर नही मानती जो इस तरह आकर धक्का-मुक्की करती हो ।