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सर्वकोश
सुर्जन चरित महाकाव्यम् (कवि चन्द्रशेखर - बूँदी हाड़ा चौहान राजवंश शौर्य इतिहास सटीक)

सुर्जन चरित महाकाव्यम् (कवि चन्द्रशेखर - बूँदी हाड़ा चौहान राजवंश शौर्य इतिहास सटीक)

Surjana Charita Mahakavya of Chandrashekhara with Commentary

कवि चन्द्रशेखर (सम्पादक: डॉ. चन्द्रधर शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished256 पृष्ठ

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एकादशः सर्गः ११५
आयोधनेष्वेव धनञ्जयाद्या विश्राणनेष्वेव दधीचिमुख्याः ।
धर्मात्मजाद्याः खलु धर्ममात्रे सर्वत्र वीरः स तु भूरिसत्त्वः ॥८॥
अर्जुन आदि केवल युद्धवीर थे। दधीचि आदि केवल दानवीर थे। युधिष्ठिर आदि केवल
धर्मवीर थे। किन्तु महान् पराक्रमी हम्मीरदेव एक साथ युद्धवीर, दानवीर और धर्मवीर थे ॥८॥
चित्रैश्चरित्रैः प्रथितस्य यस्य सम्भावितस्यापि विशालशीलैः ।
गुणोच्चयं वर्णयतां कवीनां वाणी न सत्यव्रतमुज्झति स्म ॥९॥
(प्रायः कवियों के वर्णन में थोड़ी बहुत अत्युक्ति होती ही है, किन्तु) नाना प्रकार के श्लाघ्य
चरित्रों के कारण विख्यात और विशाल शील वाले तथा महापुरुषों द्वारा भी सम्मानित हम्मीरदेव
क गुण-समूह का वर्णन करने वाले कवियों की वाणी सत्यव्रत को जरा भी नहीं छोड़ती ॥९॥
आश्चर्यमस्याऽवनिनायकस्य ज्वलत्प्रतापज्वलनोऽनुवेलम् ।
विपक्षनारीनयनाम्बुपूरैः प्रपूर्यमाणः परिव