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सर्वकोश
सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड (श्रीरामचरितमानस पंचम सोपान - गीताप्रेस गोरखपुर सविस्तार सटीक)

सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड (श्रीरामचरितमानस पंचम सोपान - गीताप्रेस गोरखपुर सविस्तार सटीक)

Sampoorna Sundarkand of Ramcharitmanas

गोस्वामी तुलसीदास (गीताप्रेस गोरखपुर) द्वारा

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

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भगवान् श्रीजानकीनाथजीकी आरती
ॐ जय जानकिनाथा, हो प्रभु जय श्री रघुनाथा।
दोऊ कर जोड़े विनवौं, प्रभु मेरी सुनो बाता॥ ॐ॥
तुम रघुनाथ हमारे, प्राण पिता माता।
तुम हो सजन सँगाती, भक्ति मुक्ति दाता॥ ॐ॥
चौरासी प्रभु फन्द छुड़ावो, मेटो यम त्रासा।
निश दिन प्रभु मोहि राखो, अपने संग साथा॥ ॐ॥
सीताराम लक्ष्मण भरत शत्रुहन, संग चारों भैया।
जगमग ज्योति विराजत, शोभा अति लहिया॥ ॐ॥
हनुमत नाद बजावत, नेवर ठुमकाता।
कंचन थाल आरती, करत कौशल्या माता॥ ॐ॥
किरिट मुकुट कर धनुष विराजत, शोभा अति भारी।
मनीराम दरशन कर, तुलसिदास दरशन कर, पल-पल बलिहारी॥ ॐ ॥
जय जानकिनाथा, हो प्रभु जय श्री रघुनाथा।
हो प्रभु जय सीता माता, हो प्रभु जय लक्ष्मण भ्राता॥ ॐ॥
हो प्रभु जय चारों भ्राता, हो प्रभु जय हनुमत दासा।
दोऊ कर जोड़े विनवौं, प्रभु मेरी सुनो बाता॥ ॐ॥