सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें॥ अद्वैत ज्ञान को अग ॥ [२५३]
जैसे एक मैन के सवारे नर हाथी हय,
आदि अन्ति मधि एक मैन ई बखानिये ।
तैसे ही सुन्दर यह जगत सु ब्रह्ममय,
ब्रह्म सु जगत मय निश्चै करि मानिये ॥१७॥
ब्रह्म मैं जगत यह ऐसी विधि देखियत,
जैसी विधि देखियत फूलरो महीर मैं ।
जैसी विधि गिलम दूलीचे मैं अनेक भाति,
जैसी विधि देखियत चूनरी ऊ चोर मैं ॥
जसी विधि कागरे ऊ कोट परि देखियत,
जैसी विधि देखियत वुदबुदा नीर मैं ।
सुन्दर कहत लीक हाथ पर देखियत,
जैसी विधि देखियत शीतलता शरीर मैं ॥१८॥
ब्रह्म अरु माया जैसे शिव अरु शक्ति पुनि,
पुरुष प्रकृति दोऊ कहिकै सुनाये है ।
पति अरु पतनी ईश्वर अरु ईश्वरी ऊ,
नारायन लक्षमी द्वै बचन कहाये हैं ।
जैसे कोऊ अर्धनारी नाटेश्वर रूप धरै,
एक बीज ही तै दोइ दाल नाम पाये हैं ।
तैसे ही सुन्दर बस्तु ज्यो है त्यौ ही एक रस,
उभय प्रकार होई आपु ही दिखाये हैं ॥१६॥
(१७) मैन-मोम । ब्रह्ममय-ब्रह्मस्वरूप ।