सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
DevanagariHindipublished284 पृष्ठ
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॥ श्री परमात्मने नम ॥
अथ श्री स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत
सवैया ग्रंथ
श्री सुंदर विलास
प्रारम्भ
'। अथ गुरुदेव को अग ॥१॥
इन्दव छन्द ।
मौज करी गुरुदेव दया करि,
शब्द सुनाइ कह्यो हरि नेरो ।
ज्याँ रवि के प्रगटे निशि जातसु,
दूरि कियो भ्रम भांन अधेरो ॥
कायिक वाचिक मानस हू करि,
है गुरुदेव हि वदन मेरो ।
सुन्दरदास कहै कर जोरि जु,
दादूदयालु को हू नित चेरो ॥१॥
(१) मौज करी-आनन्द कर दिया । शब्द सुनाइ-
नोपदेश देकर । कह्यो हरि नेरो-हृदय मे ही भगवान के
र्शन करा दिये । भ्रमभान अधेरो-भ्रमज्ञान का अधेरा ।
यिक-शरीर से । वाचिक-वाणी से । मानस-मन से ।
र जोरि-हाथ जोड़कर । चेरो-सेवक ।