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सर्वकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

DevanagariHindipublished222 पृष्ठ

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सुगम चिकित्सा

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३ सरण वटी—सूखा जमीकन्द दो तोला, चीते की छाल सोलह तोला, सोठ चार तोला, काली मिरच दो तोला, लेकर सबको कूट पीसकर चूर्ण करे, चूर्ण के बराबर गुड़ मिलाकर गोली बनावे, यह बवासीर की अच्छी दवा है। सब प्रकार की बवासीर को आराम करती है।

४ चन्द्रप्रभा वटी—कचूर, कच, नागरमोथा, चिरायता, गिलोय, देवदारु, हल्दी, अतीस, दारु हल्दी, पीपरामूल, चीते की छाल, धनिया, हरड, बहेड़ा, आँवला, चन्य, वायविङ्ग, राज पीपल, सोठ, काली मिरच, पीपल, स्वर्ण मालिक भस्म, सज्जी, जवाखार, सेधा नमक, काला नमक, विङ्ग नमक, ये २७ दवाइयाँ चार-चार माशा। निसोत, दन्ती, तमाल पत्र, दालचीनी, इलायची दाना, वंशलोचन, ये छः दवा सोलह-सोलह माशा। लोह भस्म दो तोला, मिश्री चार तोला, शिलाजीत आठ तोला, गुगल आठ तोला, इन सबको एकत्र कूट पीसकर एक जीव करके बेर के समान गोली बनावे। यह सब रोगों पर चलती है। प्रमेह, मूत्र कृच्छ्र, मूत्राघात, पथरी, कण्ड, पेट फूलना, शूल, प्रमेह, अपेडकोप की वृद्धि, पाँडू रोग, कामला, हलीमक, कमर पीड़ा, साँस, खांसी, कोढ़, बवासीर, खाज, तिल्ली, भगंदर, दांत के रोग, नेत्र रोग, खियों के रजोधर्म-सम्बन्धी रोग, पुरुषों के वीर्य विकार, मन्दान्न, अरुचि, आदि आराम होते हैं।

५ योगराज गुगल—सोठ, मिरच, पीपल, चन्य, पीपल मूल, चीते की छाल, भुनी हींग, अजमोद, सरसों, जीरा, काला जीरा,