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सर्वकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

DevanagariHindipublished222 पृष्ठ

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तिल्ली, चूय, बवासीर, संग्रहणी, कोढ़, बद्धकाष्टता, भगंदर, सूक्ष्म, शूल, श्वास, खांसी, आमपात, मन्दाग्नि ये सब रोग दूर हों।

१३ एलादि चूर्ण—छोटी इलायची के दाने, फूलप्रियंगु, नागरमोथा, बेर की गुठली, पीपल, सफेद चन्दन, खील, लोंग, नागकंसर इन नौ दवाइयों का चूर्ण शहद और मिश्री मिला कर चाटने से उल्टी होने को रोकता है।

१४ शतावर चूर्ण—शतावर, गोखरू, कांच के बीज, गंगेदहन, खरेटी, तालमखाना, इनका चूर्ण रात को गाय के दूध के साथ फँकी करने से वीर्य पुष्ट होता है, और काम शक्ति बढ़ती है।

गोलीं

१ संजीवनी वटी—शायबिंडंग, सोठ, पीपल, बड़ी हरड, झाँवला, यहेंडा, वच, गिलौय, भिलावे, मीठापि, सब बराबर लेकर गाय के मूत्र में पीस कर एक-एक रत्ती की गोली बनाये। यह गोली एक अजीर्ण में अदरख के रस में, हँजे में दो गोली और साँप के विष पर तीन तथा सन्निपात में चार गोली खाय।

२ कोशापिवटी—सोठ, मिरच, पीपल, अमलवैत, चक, तालीसपत्र, चिमक, जीरा, इमली की छाल, ये नौ दवाइयों एक-एक तोला। दालचीनी, इलायची, पमज आठ-आठ माशा, पुराना गुड़ बीस तोला मिलाकर गोली बना काम में ले। यह गोली पीनस, जुकाम, खाँसी, सांस, इन रोगों को दूर कर रुचि उत्पन्न करे और आवाज को शुद्ध करे।