सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
प्रारंभिक पृष्ठ व विषय-सूची
Subhashita Ratna Bhandagara
(A Collection of more than 10000 subhashitas)
Kashinath Sharma
सुभाषितरत्नभाण्डागारस्य
विषयानुक्रमकोशः
१. मङ्गलाचरणप्रकरणम्
| विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोका |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| परब्रह्म | १ | १-१९ | त्रिमूर्तय | १४ | १-४ | ( सीता ) | २१ | ९३ |
| गणेश | २ | १-३५ | विष्णु | १४ | १-४९ | ( हनूमान् ) | २१ | ९४-९५ |
| सरस्वती | ३ | १-१३ | शङ्ख | १६ | ४४-४५ | ( रामकृष्णौ ) | २१ | ९६-९८ |
| शिव | ३ | १-१६७ | चक्रम् | १६ | ४६-४७ | कृष्ण | २२ | ९९-१९४ |
| जटाजूट | ९ | १२०-१२२ | गरुड | १६ | ४८ | ( बलभद्र ) | २६ | १९५-१९७ |
| गङ्गा | ९ | १२३-१३४ | शेष | १६ | ४९ | ( रुक्मिणी ) | २६ | १९८ |
| शशिलेखा | ९ | १३५-१३७ | लक्ष्मी | १६ | १-१५ | ( राधा ) | २६ | १९९-२०० |
| लोचनम् | ९ | १३८-१४२ | समुद्र | १७ | १५ | ( नन्दक ) | २६ | २०१ |
| कण्ठ | १० | १४३-१४६ | ब्रह्मा | १७ | १-४ | ( वेणु ) | २६ | २०२ |
| शिरोमालिका | १० | १४७ | दशावतारा | १७ | १-२१२ | बुद्ध | २६ | २०३-२०९ |
| गणा | १० | १४८ | मत्स्य | १८ | ५-१५ | कल्कि | २७ | २१०-२१२ |
| नन्दी | १० | १४९ | कूर्म | १८ | १६-२२ | सूर्य | २७ | १-२० |
| ताण्डवम् | १० | १५०-१६० | वराह | १८ | २३-४० | ( किरणा ) | २७ | १७-१९ |
| अर्धनारीश्वर | १० | १६१-१६७ | नृसिंह | १९ | ४१-५९ | ( तुरगा ) | २८ | २० |
| पार्वती | ११ | १-५४ | वामन | २० | ६०-६८ | चन्द्र | २८ | १-३ |
| षण्मुखः | १३ | १-३ | परशुराम | २० | ६९-७४ | पृथिवी | २८ | १ |
| हरिहरौ | १३ | १-१० | रामचन्द्र | २० | ७५-९२ |
२. सामान्यप्रकरणम्
| विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोका |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सुभाषितप्रशंसा | २९ | १-२१ | बिल्हण | ३५ | २९ | छान्दसप्रशंसा | ४१ | १ |
| विद्याप्रशंसा | २९ | १-१६ | भट्टारहरिचन्द्र | ३५ | ३० | छान्दसनिन्दा | ४१ | १ |
| काव्यप्रशंसा | ३० | १-५० | भवभूति | ३६ | ३१-३३ | वैयाकरणप्रशंसा | ४१ | १-८ |
| नाट्यप्रशंसा | ३२ | १-२ | भास | ३६ | ३४ | वैयाकरणनिन्दा | ४१ | १-३ |
| कुकाव्यनिन्दा | ३२ | १-५ | मयूर | ३६ | ३५-३६ | नैयायिकप्रशंसा | ४१ | १-५ |
| सामान्यकविप्रशंसा | ३२ | १-६८ | मातङ्गदिवाकर | ३६ | ३७ | नैयायिकनिन्दा | ४३ | १-१० |
| विशिष्टकविप्रशंसा | ३४ | २-७१ | मुरारि | ३६ | ३८-४० | मीमांसकप्रशंसा | ४३ | १-५ |
| अमरसिंहः | ३४ | १ | रत्नखेटदीक्षित | ३६ | ४१ | मीमांसकनिन्दा | ४३ | १-२ |
| कालिदासः | ३४ | २-७ | राजशेखर | ३६ | ४२-४३ | वैद्यप्रशंसा | ४३ | १-६ |
| गणेश्वरः | ३५ | ८ | वाल्मीकि | ३६ | ४४-५२ | कुवैद्यनिन्दा | ४४ | १-९ |
| गुणाढ्यः | ३५ | ९-११ | विजया | ३६ | ५३ | गणकप्रशंसा | ४४ | १-६ |
| गोविन्दराजः | ३५ | १२ | विज्जका | ३६ | ५४ | कुगणकनिन्दा | ४४ | १-६ |
| जगन्नाथपण्डितः | ३५ | १३-१६ | व्यास | ३६ | ५५-५८ | पौराणिकनिन्दा | ४४ | १ |
| जयदेवः | ३५ | १७ | शाङ्खामल्ल | ३७ | ५९ | पुरोहितनिन्दा | ४५ | १ |
| ज्योतिरीशः | ३५ | १८ | सातवाहन | ३७ | ६० | कायस्थनिन्दा | ४५ | १-४ |
| दण्डी | ३५ | १९-२० | सुदर्शनः | ३७ | ६१ | सज्जनप्रशंसा | ४५ | १-२७८ |
| द्रोणः | ३५ | २१ | सुबन्धुः | ३७ | ६२ | दुर्जननिन्दा | ५४ | १-२८३ |
| धनदः | ३५ | २२ | कविक्रन्दम् | ३७ | ६३-७१ | लक्ष्मीस्वभाव | ६२ | १-४३ |
| नरहरिः | ३५ | २३ | कुकविनिन्दा | ३७ | १-३० | धनप्रशंसा | ६४ | १-१६ |
| प्रवरसेनः | ३५ | २४ | पण्डितप्रशंसा | ३८ | १-२८ | धननिन्दा | ६४ | १-२० |
| बाणः | ३५ | २५-२८ | कुपण्डितनिन्दा | ३९ | १-७७ | धनिप्रशंसा | ६५ | १-१५ |
२ सुभाषितरत्नभाण्डागारस्य
| विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोका |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दरिद्रनिन्दा ... | ६५ | १-८७ | क्षमाप्रशंसा | ८३ | १-३ | पुत्रप्रशंसा | ८९ | १-१४ |
| दानप्रशंसा | ६८ | १-२८ | विनयप्रशंसा | ८३ | १ | कन्यापितृनिन्दा | ९० | १ |
| लोभनिन्दा | ६९ | १-११ | सत्यप्रशंसा | ८३ | १-३ | सत्पुत्रप्रशंसा | ९० | १-१३ |
| उदारप्रशंसा | ७० | १-४४ | असत्यनिन्दा | ८३ | १-४ | कुपुत्रनिन्दा | ९० | १-१२ |
| कृपणनिन्दा | ७१ | १-६१ | आत्मश्लाघानिन्दा | ८३ | १-५ | दैवाख्यानम् | ९० | १-१३१ |
| याचकनिन्दा | ७३ | १-४८ | स्वभाववर्णनम् | ८३ | १-२३ | जरावर्णनम् | ९५ | १-१८ |
| परोपकारप्रशंसा | ७४ | १-१४ | वाग्वर्णनम् | ८४ | १-१७ | क्षुधावर्णनम् | ९६ | १-२ |
| कृतघ्ननिन्दा | ७५ | १-४ | वाग्मिप्रशंसा | ८५ | १-१५ | भिक्षुक | ९६ | १-५ |
| संतोषप्रशंसा | ७५ | १-१९ | मौनगुणा, | ८६ | १-४ | परगृहवास | ९६ | १-४ |
| तृष्णानिन्दा | ७५ | १-५७ | स्थानमाहात्म्यम् | ८६ | १-१४ | उदरपूरणदूषणम् | ९६ | १-१४ |
| धीरप्रशंसा | ७७ | १-१४ | सत्सङ्गतिप्रशंसा | ८६ | १-३६ | सेवकनिन्दा | ९७ | १-१८ |
| वीरप्रशंसा | ७८ | १-१५ | असत्सङ्गतिनिन्दा | ८७ | १-१३ | जीवितसाफल्यम् | ९७ | १-११ |
| तेजस्विप्रशंसा | ७८ | १-२३ | स्नेहवचनम् | ८८ | १-२ | ऋणम् . | ९८ | १-३ |
| मनस्विप्रशंसा | ८१ | १-४९ | सुमित्रप्रशंसा | ८८ | १-२० | प्रवास .. | ९८ | १-५ |
| अपौरुषत्वनिन्दा | ८१ | १-२ | कुमित्रनिन्दा | ८८ | १-३ | व्यापारिण | ९८ | १-४ |
| गुणप्रशंसा .. | ८१ | १-४८ | संसार | ८८ | १-६ | कलिमहिमा | ९८ | १-३३ |
| उद्यमप्रशंसा | ८२ | १-२० | गृहस्थाश्रमप्रशंसा | ८९ | १-६ | मद्यपानगर्हणम् | १०० | १-६ |
| संहतिप्रशंसा | ८३ | १-३ | गृहस्थाश्रमदूषणम् . | ८९ | १-४ | तमाखु | १०० | १-७ |
३. राजप्रकरणम्
| विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोका |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| राजसभावर्णनम् | १०१ | १-१ | पारसीकक्षितीश | ११६ | ६५ | विक्रमार्क . | १२२ | १७८-१८१ |
| राजमिलनम् | १०१ | १ | पृथ्वीराज | ११६ | ६६ | विग्रहराजः | १२२ | १८२ |
| सामान्यराजप्रशंसा | १०१ | १-२९५ | बल्लालिदास | ११६ | ६७ | वीरभानु . | १२२ | १८३-१८४ |
| विशिष्टराजप्रशंसा | ११३ | १-१९४ | बल्लाल | ११६ | ६८ | वीरवर | १२३ | १८५-१८६ |
| अकबर | ११३ | १-४ | बङ्गालक्षोणिपाल | ११६ | ६९ | वीरसिंह | १२३ | १८७-१८९ |
| अनङ्गभीम | ११३ | ५ | बीसल | ११६ | ७० | वेङ्कटपति | १२३ | १९० |
| अर्जुननेन्द्र | ११३ | ६ | भावसिंहः | ११६ | ७१ | शाहिजहान | १२३ | १९१ |
| कर्ण | ११३ | ७-१० | भीम | ११६ | ७२ | सिन्धुराधीश्वर | १२३ | १९२ |
| कर्णाटवसुंधराधिप | ११४ | ११ | भैरव .. | ११७ | ७३ | हम्मीरः . | १२३ | १९३-१९६ |
| कलिङ्गेश्वर | ११४ | १२-१३ | भोज | ११७ | ७४-९८ | राजविभूषावर्णनम् . | १२३ | १-८ |
| कल्याणदास | ११४ | १४ | मणिपालः | ११७ | ९९ | गजप्रशंसा | १२३ | १-४ |
| काबिलेन्द्र | ११४ | १५-१६ | मल्लशाह | ११८ | १००-१०२ | तुरगप्रशंसा .. | १२३ | १-११ |
| कार्तवीर्य | ११४ | १७ | माणिक | ११८ | १०३-१०७ | खड्गप्रशंसा | १२४ | १-१८ |
| कुसुमेन्द्रसाहि | ११४ | १८ | माधव . | ११८ | १०८ | राजयात्रावर्णनम् .. | १२५ | १-४३ |
| कृष्ण | ११४ | १९-२२ | मानसिंह | ११८ | १०९ | पताका .. | १२६ | २८ |
| गूर्जराधीश . | ११४ | २३ | मालवाखण्डल | ११८ | ११० | दुन्दुभि | १२६ | २९-३१ |
| चोलेन्द्र | ११४ | २४-२५ | मुकुन्ददेवः | ११८ | १११ | गवाक्षविलोकनम् | १२६ | ३२-४३ |
| जगद्देव | ११४ | २६ | मुञ्ज | ११८ | ११२ | रणसामग्री | १२७ | १-२४ |
| जनकः . | ११४ | २७ | मुद्गफरशाह .. | ११८ | ११३ | रणवर्णनम् . | १२७ | १-१२५ |
| दलपतिराय | ११४ | २८ | राजाबहादुर | ११८ | ११४ | अरिपलायनम् | १३१ | १-४७ |
| दशरथ | ११५ | २९-३० | राजेन्द्रसिंहः | ११८ | ११५ | प्रतापवर्णनम् .. | १३३ | १-३० |
| दिल्लीन्द्रचूडामणि | ११५ | ३१ | रामचन्द्रः .. | ११८ | ११६-१६८ | कीर्तिवर्णनम् | १३४ | १-९१ |
| नाना | ११५ | ३२ | रामजामः . | १२२ | १६९ | कीर्तिप्रतापौ | १३८ | १-९ |
| निजामशाहः . | ११५ | ३३-४० | रामनाथ | १२२ | १७० | राज्याधिकारगर्हणम् | १३९ | १-५ |
| नृसिंहः . | ११५ | ४१-५८ | रुद्र . | १२२ | १७१-१७५ | राजसेवकः | १३९ | १-९ |
| परशुरामः | ११६ | ५९-६१ | रूपनारायणः .. | १२२ | १७६ | रथवेगवर्णनम् ... | १३९ | १-६ |
| पाण्ड्यः .. | ११६ | ६२-६४ | रूपमणिः ... | १२३ | १७७ | समुद्रवर्णनम् ... | १४० | १-६ |
विषयानुक्रमकोशः ३
| विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया. | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोका |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पर्वतवर्णनम् ... | १४० | १-५ | तुरगा . | १४३ | ५०-५७ | ताम्बूलम् | १४४ | १०४ |
| सरोवर्णनम् . | १४० | १ | खड्ग .. | १४३ | ५८-५९ | शस्त्रधारणम् | १४५ | १०५ |
| वनश्रीवर्णनम् | १४० | १-७ | सैन्यम् | १४३ | ६०-६२ | छत्रधारणम् | १४५ | १०६ |
| मृगयावर्णनम् | १४१ | १-७ | दुर्ग | १४३ | ६३-६८ | चामरम् | १४५ | १०७ |
| मृगयाविवृत्ति | १४१ | १ | दूत | १४४ | ६९-७३ | सिंहासनम् | १४५ | १०७ |
| ऋत्याश्रमवर्णनम् | १४१ | १-१४ | भाण्डागारी | १४४ | ७४ | मालाधारणम् | १४५ | १०८ |
| राजनीति | १४२ | १-४२३ | लेखक | १४४ | ७५ | चन्दनलेप | १४५ | १०८ |
| राजा . | १४२ | १-१५ | प्रतीहारी . | १४४ | ७६ | मृगया | १४५ | १०९ |
| सभासद | १४२ | १६-१७ | सूपकार .. | १४४ | ७७ | कटकप्रयाणम् | १४५ | ११० |
| पुरोहित ... | १४२ | १८ | चारा | १४४ | ७८ | उपवनानि | १४५ | १११-११२ |
| धर्माध्यक्ष . | १४२ | १९ | अन्तःपुरवर्गा | १४४ | ७९ | तरव | १४५ | ११३-११४ |
| वैद्य . | १४२ | २० | स्त्रिय | १४४ | ८०-८१ | नीति | १४५ | ११५-४२३ |
| मन्त्री | १४२ | २१-३२ | महिषी | १४४ | ८२ | सामान्यनीति . | १५३ | १-१०५८ |
| सेनापति | १४३ | ३३-३४ | भृत्या . | १४४ | ८३-१०२ | |||
| गजा . | १४३ | ३५-४९ | स्नानम् . | १४४ | १०३ |
४. चित्रप्रकरणम्
| विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोका |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| समस्याख्यानम् | १८१ | १-७७ | मात्राच्युतकादय | १९५ | १-१५ | महोक्ष . | २०७ | १५ |
| प्रहेलिका | १८४ | १-३९ | मात्राच्युतकम् | १९५ | १-२ | धेनु | २०७ | १६ |
| अपह्नुतय | १८६ | १-१५ | बिन्दुच्युतकम् | १९५ | ३-४ | रासभ | २०७ | १७ |
| कूटानि | १८६ | १-९६ | विसर्गच्युतकम् | १९५ | ५-६ | अज .. | २०७ | १८ |
| क्रियागुप्तादयः | १९३ | १-५३ | अक्षरच्युतकम् . | १९५ | ७-८ | मेष | २०७ | १९ |
| क्रियागुप्तम् | १९३ | १-१७ | स्थानच्युतकम् . | १९५ | ९-१० | मयूर | २०७ | २० |
| कर्तृगुप्तम् | १९४ | १८-२५ | व्यञ्जनच्युतकम् | १९६ | ११-१२ | चातक | २०७ | २१ |
| कर्मगुप्तम् .. | १९४ | २६-२८ | च्युतदत्ताक्षरम् | १९६ | १३-१५ | पारावत | २०८ | २२ |
| करणगुप्तम् . | १९४ | २९-३० | अन्तरालापा | १९६ | १-४४ | बक | २०८ | २३-२४ |
| संप्रदानगुप्तम् . | १९४ | ३१-३२ | बहिरालापा .. | १९८ | १-१२० | कुक्कुट | २०८ | २५-२६ |
| अपादानगुप्तम् | १९४ | ३३-३४ | प्रश्नोत्तराणि . | २०५ | १-१० | गौरखरकृकलासौ | २०८ | २७ |
| सम्बन्धगुप्तम् | १९४ | ३५-३७ | चित्रम् . | २०७ | १-१८ | सर्प | २०८ | २८ |
| अधिकरणगुप्तम् | १९४ | ३८-३९ | भाषाचित्रम् . | २०६ | १-३ | पुलिन्द | २०८ | २९ |
| आमन्त्रितगुप्तम् | १९५ | ४०-४३ | जातिवर्णनम् | २०७ | १-४१ | पथिक | २०८ | ३०-३३ |
| कर्तृक्रियागुप्तम् | १९५ | ४४ | सिंहः | २०७ | १-४ | शूर .. | २०८ | ३४ |
| कर्तृकर्मक्रियागुप्तम् | १९५ | ४५-४६ | तरक्षु | २०७ | ५ | बालाः .. | २०८ | ३५-३६ |
| सथिगुप्तम् | १९५ | ४७ | करिणः .. | २०७ | ६ | कुमार . | २०८ | ३७ |
| समासगुप्तम् | १९५ | ४८-४९ | मृगा . | २०७ | ७ | नर्तकी .. | २०८ | ३८ |
| लिङ्गगुप्तम् | १९५ | ५०-५१ | भल्ल | २०७ | ८ | लेखनकर्त्री | २०८ | ३९-४० |
| सुब्बचनगुप्तम् | १९५ | ५२ | हय | २०७ | ९-१३- | कलमकण्डनी-गीतय . | २०८ | ४८ |
| तिङ्वचनगुप्तम् | १९५ | ५३ | कपि | २०७ | १४ |
५. अन्योक्तिप्रकरणम्
| विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोका |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सूर्यान्योक्तय . | २०९ | १-१८ | मेरु | २१५ | ५ | रोहण ... | २१५ | १३-१५ |
| चन्द्रान्योक्तयः . | २०९ | १-४९ | विन्ध्य .. | २१५ | ६ | ( पर्वतदरी ) . | २१५ | १६ |
| मेघान्योक्तयः | २११ | १-८४ | मलय . | २१५ | ७-८ | ( गिरिनिर्झर ) | २१५ | १७ |
| वाय्वन्योक्तय | २१४ | १-१३ | मन्दरः . | २१५ | ९ | समुद्रान्योक्तय .. | २१५ | १-८२ |
| पर्वतान्योक्तय | २१५ | १-१७ | मैनाक . | २१५ | १०-११ | क्षीरसागर .. | २१७ | ४०-४१ |
| हिमाचल ... | २१५ | २-४ | लोकालोकः ... | २१५ | १२ | अगस्त्यः ... | २१७ | ४२-४६ |
४
सुभाषितरत्नभाण्डागारस्य
| विषया | पृष्ठे | श्लोक | विषया | पृष्ठे | श्लोक | विषया | पृष्ठे | श्लोक |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रत्नानि | २१७ | ४७-६३ | (शेष) | २३५ | १६५-१६५ | पलाण्डु | २४३ | १९३ |
| (वज्रमणि) | २१८ | ६४ | जलचरान्योक्तय | २३५ | १-५ | तृणानि | २४४ | १९४-१९४ |
| (कौस्तुभमणि) | २१८ | ६५ | मत्स्य | २३५ | १ | कल्मा | २४३ | १९६-१९७ |
| (सोमकान्त-सूर्यकान्तौ) | २१८ | ६६ | (रोहित) | २३५ | २ | ताम्बूलम् | २४३ | १९८-१९९ |
| (चन्द्रकान्त) | २१८ | ६७ | (राघव) | २३५ | ३ | तुम्बी | २४३ | २००-२०१ |
| (स्फटिक) | २१८ | ६८ | कूर्म | २३५ | ४-५ | वंश | २४३ | २०२ |
| (मरकत) | २१८ | ६९-७१ | वृक्षान्योक्तयः | २३६ | १-२४३ | कुन्द | २४३ | २०३-२०४ |
| (माणिक्यम्) | २१८ | ७२ | कल्पद्रुम | २३७ | ३१-३७ | कमलानि | २४३ | २०५-२४२ |
| काच | २१८ | ३३ | पारिजात | २३७ | ३८-३९ | लता | २४५ | २४३ |
| शङ्ख | २१८ | ७४-८० | चन्दन | २३७ | ४०-६१ | संकीर्णान्योक्तयः | २४५ | १-१०४ |
| (पाञ्चजन्य) | २१८ | ८१-८२ | अगह | २३८ | ६२-६३ | शिवः | २४५ | १-६ |
| नद्यन्योक्तय | २१८ | १-११ | चम्पक | २३८ | ६४-७१ | परशुराम. | २४५ | ७ |
| गङ्गा | २१९ | ९-१० | बकुल | २३८ | ७२-७३ | रामचन्द्र | २४५ | ८ |
| शोण. | २१९ | ११ | अशोक | २३८ | ७४-७७ | सीता | २४५ | ९ |
| तडागान्योक्तय | २१९ | १-१९ | यूथी | २३८ | ७८ | इन्द्र | २४५ | १० |
| मानसम् | २२० | २० | मालती | २३८ | ७९-८८ | स्मर | २४५ | ११ |
| कूपान्योक्तय | २२० | १-९ | मल्लिका | २३९ | ८९ | आकाशम् | २४५ | १२ |
| मरुस्थलान्योक्तय | २२० | १-६ | दमनक | २३९ | ९० | पृथ्वी | २४५ | १३ |
| दावानलान्योक्तय | २२० | १-९ | केतकी | २३९ | ९१-९६ | जलम् | २४५ | १-१५ |
| वाडवानल | २२० | ९ | पाटला | २३९ | ९७ | मारुत | २४५ | १६ |
| व्योमचरान्योक्तय | २२१ | १-२३९ | सहकार | २३९ | ९८-१३२ | मृगतृष्णिका | २४५ | १७ |
| गरुड | २२१ | १-२ | पनस | २४० | १३३ | सुवर्णम् | २४८ | १८-१९ |
| हंस | २२१ | ३-४० | तमाल | २४१ | १३४ | मौक्तिकम् | २४५ | २०-२२ |
| मधुकर | २२२ | ४१-११४ | कदली | २४१ | १३५ | सुवर्णकार | २४६ | २३ |
| कोकिल | २२५ | ११५-१४७ | द्राक्षा | २४१ | १३६-१३७ | हार | २४६ | २४-२९ |
| चातक | २२६ | १४८-१६८ | दाडिम | २४१ | १३८-१३९ | कञ्चुक | २४६ | ३० |
| मयूर | २२६ | १६९-१७८ | नालिकेर | २४१ | १४० | कुण्डलम् | २४६ | ३१ |
| चक्रवाक | २२६ | १७९-१८० | ताल | २४१ | १४१-१४२ | नासाभूषणम् | २४६ | ३२ |
| शुक | २२७ | १८१-२०३ | भूर्ज | २४१ | १४३-१४४ | वलय | २४६ | ३३ |
| काक | २२८ | २०४-२२५ | अश्वत्थ | २४१ | १४५ | रत्न | २४६ | ३४ |
| बक | २२९ | २२६-२३२ | न्यग्रोध | २४१ | १४६-१४८ | वीणादण्ड | २४६ | ३५ |
| घूक | २२९ | २३३ | मधूक | २४१ | १४९-१५० | मुरली | २४६ | ३६-३७ |
| खद्योत | २२९ | २३४-२३९ | शाल्मलि | २४१ | १५१-१५४ | कुविन्द | २४६ | ३८ |
| स्थलचरान्योक्तय | २२९ | १-१६५ | निम्ब | २४१ | १५५-१५९ | लाङ्गलिक | २४६ | ३९ |
| सिंह. | २२९ | १-५४ | बब्बुल | २४२ | १६०-१६३ | कर्णधार | २४६ | ४०-४१ |
| गज | २३१ | ५५-९८ | खदिर. | २४२ | १६४-१६६ | तैलक | २४६ | ४२ |
| मृग | २३३ | ९९-१२३ | किंशुक | २४२ | १६७-१६९ | पञ्जरलावक. | २४६ | ४३ |
| करभ | २३४ | १२४-१३७ | शाखोट | २४२ | १७०-१७१ | व्याध | २४६ | ४४-४५ |
| रासभ | २३४ | १३८ | पीलुः | २४२ | १७२ | विषममन्त्री | २४७ | ४६ |
| वृषभ | २३४ | १३९-१४९ | करीर | २४२ | १७३-१७४ | मालाकार | २४७ | ४७ |
| कपि | २३५ | १५०-१५२ | बिल्व | २४२ | १७५ | कायस्थ | २४७ | ४८ |
| वराह | २३५ | १५३-१५४ | शालि | २४२ | १७६ | कवि. | २४७ | ४९ |
| (आदिवराह) | २३५ | १५५ | कुटज | २४२ | १७७ | बाला | २४७ | ५० |
| श्वा | २३५ | १५६ | इक्षु | २४२ | १७८-१८० | शैलूष | २४७ | ५१ |
| वृश्चिक | २३५ | १५७ | लवङ्गी | २४८ | १८१-१८३ | कुशीलवा | २४७ | ५२ |
| भेक | २३५ | १५८-१५९ | कार्पास | २४२ | १८४-१८६ | बाला | २४७ | ५३ |
| जम्बुक | २३५ | १६० | शण | २४३ | १८७ | पल्लीपतिपुत्री | २४७ | ५४ |
| सर्पः | २३५ | १६१-१६२ | कण्टकारिका | २४३ | १८८ | पान्थ | २४७ | ५५-५६ |
| धत्तुर. | २४३ | १८९-१९२ | कस्तूरिका | २४७ | ५७-६१ |
विषयानुक्रमकोशः ५
| विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोकाः |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दीप .. | २४७ | ६२-६७ | शरः | २४८ | ७५ | नन्दनवनम् | २४८ | ८१ |
| तुला | २४७ | ६८-६९ | लम्पार्क | २४८ | ७६ | वसन्त | २४८ | ८२ |
| कुम्भ | २४८ | ७०-७१ | खल | २४८ | ७७ | मुसल | २४८ | ८३ |
| कलशः . | २४८ | ७२ | कण्टक | २४८ | ७८ | सकीर्णा | २४८ | ८४-१०४ |
| दुग्धम् | २४८ | ७३ | कालकूटम् | २४८ | ७९ | |||
| बडिशदण्ड .. | २४८ | ७४ | जिह्वा | २४८ | ८० |
६. नवरसप्रकरणम्
| विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोकाः |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| शृङ्गाररसनिर्देशः | २५० | वलित्रयम् | २६७ | ३२८-३३८ | मयूरविषयकोक्ति | २८३ | १६६ | |
| मनसिजप्रशंसा | २५० | १-२२ | रोमावली | २६७ | ३३९-३६९ | मुक्ताकलाप प्रत्युक्ति | २८३ | १६७ |
| स्त्रीप्रशंसा | २५० | १-६१ | पृष्ठभाग | २६८ | ३७० | वियोगिन्या विप्रलापा | २८३ | २-४९ |
| युववर्णनम् | २५२ | १-९ | नितम्ब | २६८ | ३७१-३७९ | मदन प्रत्युक्तय | २८५ | ४३-४५ |
| बालात्ववर्णनम् | २५३ | १-४८ | (काञ्ची) | २६८ | ३८०-३८१ | चन्द्रं प्रत्युक्तय | २८५ | ४६-४८ |
| वयःसंधिवर्णनम् | २५४ | १-६० | जघनम् | २६८ | ३८२-३८५ | रोहिणी प्रत्युक्ति | २८५ | ४९ |
| तरुणीपृथगवयववर्णनं | २५७ | १-४३२ | मदनमन्दिरम् | २६८ | ३८६-३८७ | नायिका प्रति सखी-वचनम् | २८५ | १-३३ |
| केशपाश | २५७ | १-२६ | ऊरु | २६८ | ३८८-३९८ | दूती प्रति स्वावस्था-कथनम् | २८७ | १-१० |
| (अभ्यङ्गारम्भ ) | २५७ | २७-२९ | जङ्घे | २६९ | ३९९-४०२ | नायक प्रति दूतीप्रेषणम् | १-९ | |
| (सीमन्तरचनम्) | २५८ | ३०-३७ | चरणौ | २६९ | ४०३-४१६ | नायकस्याग्रे दूत्युक्तय | २८७ | १-९७ |
| (सीमन्तसिन्दूरम्) | २५८ | ३८-३९ | गुल्फौ | २६९ | ४१७ | नायकं प्रति नायिका-संदेश | २९१ | १-४ |
| ललाट | २५८ | ४० | पादाङ्गुल्य | २६९ | ४१८ | नायिका प्रति संदेश-प्रेपणम् | २९१ | १ |
| (तिलकः) | २५८ | ४१-५१ | नाखाः | २६९ | ४१९-४२१ | नायिका प्रति नायक-संदेश | २९१ | १-३६ |
| भ्रुवौ | २५८ | ५२-५९ | (गमनम्) | २६९ | ४२२-४२५ | दूतीं प्रति नायिका-प्रश्ना | २९२ | १-३ |
| नेत्रे | २५९ | ६०-९६ | (जृम्भा) | २६९ | ४२६-४२७ | दूत्युपहासप्रश्ना | २९३ | १-१२ |
| (कटाक्ष ) | २६० | ९७-११२ | (निद्रा) | २७० | ४२८-४३० | नायिका प्रति नायका-वस्थाकथनम् | २९३ | १-५ |
| (अश्रूणि ) | २६० | ११३ | (कान्ति ) | २७० | ४३१-४३२ | सूर्यास्तमनसमयवर्ण-नम् | २९३ | १-७३ |
| नासा | २६० | ११४-११७ | समग्रस्त्रीस्वरूपवर्णनम् | २७० | १-७७ | चक्रवाकावस्थाख्यानम् | २९६ | १-१३ |
| (नासाभूषणम् ) | २६० | ११८-१२२ | परस्परदर्शनम् | २७३ | १-२ | संध्यावर्णनम् | २९६ | १-६ |
| कर्णौ | २६० | १२३-१३० | नायकदर्शनम् | २७३ | १-६ | रजनिवर्णनम् | २९६ | १-६ |
| (कर्णभूषणम्) | २६१ | १३१-१३३ | नायिकादर्शनम् | २७३ | १-३४ | तमोवर्णनम् | २९६ | १-४० |
| कपोलौ | २६१ | १३४-१३६ | विरह | २७४ | १ | अभिसारिकासंचार-कथनम् | २९८ | १-२३ |
| अधर | २६१ | १३७-१५४ | वियोगिनोऽवस्था-वर्णनम् | २७४ | १-९ | नक्षत्रोदयवर्णनम् | २९९ | १-२ |
| दन्ता | २६१ | १५५-१५८ | वियोगिन्या अवस्था-वर्णनम् | २७५ | १-६५ | चन्द्रोदयवर्णनम् | २९९ | १-१६४ |
| चिबुकः | २६१ | १५९ | वियोगिनो विप्रलापा | २७७ | १-१६७ | चन्द्रकलावर्णनम् | ३०३ | १२३ |
| मुखम् | २६२ | १६०-२०६ | मदनं प्रत्युक्तय | २८२ | १२३-१४३ | ज्योत्स्नावर्णनम् | ३०३ | १२४-१३८ |
| (स्मितम्) | २६३ | २०७-११० | चन्द्रं प्रत्युक्तय | २८२ | १४४-१४८ | सकलद्विचन्द्रवर्णनम् | ३०३ | १३९-१६४ |
| कण्ठ | २६३ | २११-२१७ | पवनं प्रत्युक्तय | २८३ | १४९-१५० | नायकागमनावस्था-वर्णनम् | ३०४ | १-६ |
| (वाणी) | २६३ | २१८-२२३ | मेघं प्रत्युक्तय | २८३ | १५१-१५३ | |||
| बाहू | २६४ | २२४-२२९ | अशोकं प्रत्युक्ति | २८३ | १५४-१५५ | |||
| करौ | २६४ | २३०-२३५ | तमालं प्रत्युक्ति | २८३ | १५६ | |||
| (कङ्कणम्) | २६४ | २३६-२४२ | मृणालाहारं प्रत्युक्ति | २८३ | १५७ | |||
| (हस्तरङ्गा) | २६४ | २४३ | मधुकरं प्रत्युक्तय | २८३ | १५८-१६१ | |||
| अङ्गुष्ट्य | २६४ | २४४-२४५ | हंसं प्रत्युक्ति | २८३ | १६२ | |||
| (मुद्रिका) | २६४ | २४६ | चकोरं प्रत्युक्ति | २८३ | १६३ | |||
| स्तनौ | २६४ | २४७-२९८ | कृष्णसारं प्रत्युक्ति | २८३ | १६४ | |||
| कञ्चुकी | २६६ | २९९ | सारङ्गं प्रत्युक्ति | २८३ | १६५ | |||
| (हारः) | २६६ | ३००-३११ | ||||||
| मध्यदेश | २६६ | ३१२-३२३ | ||||||
| नाभि | २६७ | ३२४-३२७ |
६
सुभाषितरत्नभाण्डागारस्य
| विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोका |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नायकागमने नायिका प्रति सखीवचनम् | ३०४ | १-४ | नायकं प्रति नायिकोक्तय | ३३० | १-८ | कन्दुकक्रीडा | ३४६ | ३४-४३ |
| नायकातिथ्यवर्णनम् | ३०५ | १-४ | नाथिक प्रति सखीवाक्यम् | ३३० | १-४ | हेमन्तवायव | ३४७ | ४४-४ |
| नायकस्य नायिका प्रति प्रश्न | ३०५ | १-३ | ससाय प्रति नायकोक्ति | ३३० | १ | हेमन्तपथिक | ३४७ | ४५-५२ |
| प्रणयकलहे नायिकानुनय | ३०५ | १-७० | नाथिका प्रति सखीवाक्यम् | ३३० | १ | शिशिरवर्णनम् | ३४७ | १-२२ |
| सख्यनुनय | ३०७ | १-२३ | देशान्तरोपगतो नायक | ३३० | १-३ | शिशिरसमयस्वभावाख्यानम् | ३४७ | २-१५ |
| कलहान्तरिताप्रलापाख्यानम् | ३०८ | १-१६ | वसन्तवर्णनम् | ३३० | १-१८४ | हज्जोलनक्रीडा | ३४८ | १६-६७ |
| नायिकानुनय | ३०९ | १-४ | वसन्तसमयस्वभावाख्यानम् | ३३१ | ४-१०१ | शिशिरवायव | ३४८ | १८-१९ |
| नायकयोरुक्तिप्रत्युक्तय | ३०९ | १-१२ | मदनपूजा | ३३३ | १०२ | शिशिरपथिक | ३४८ | २०-२२ |
| नायिकाशिक्षा | ३१० | १-८ | कुसुमावचय | ३३४ | १०३-११९ | स्त्रीस्वभावानिन्दा | ३४८ | १-८३ |
| नायिकाप्रसाद | ३१० | १-५ | वसन्तवायव | ३३४ | १२०-१३७ | सतीवर्णनम् | ३५० | १-४१ |
| परस्परप्रसाद | ३१० | १-३२ | वसन्तपथिका | ३३५ | १३८-१८४ | असतीचरितम् | ३५१ | १-६३ |
| प्रियचाटूक्तय | ३१२ | १-७९ | ग्रीष्मववर्णनम् | ३३५ | १-१३० | पान्थसकेत | ३५४ | ६७-८८ |
| पानगोष्ठीवर्णनम् | ३१४ | १-६७ | ग्रीष्मगमयस्वभावाख्यानम् | ३३५ | ३-३२ | वेश्यागर्हणम् | ३५५ | १-५१ |
| द्यूतक्रीडावर्णनम् | ३१६ | १-६ | मध्याह्न | ३३६ | ३३-५८ | अष्टनायिका | ३५५ | १-१०३ |
| बाह्यरतक्रीडावर्णनम् | ३१६ | १-२८ | जलकेलिः | ३३७ | ५९-११६ | स्वाधीनपतिका | ३५५ | १-९ |
| आलिङ्गनम् | ३१६ | १-११ | प्रपापालिका | ३३९ | ११७-१२३ | खण्डिता | ३५५ | १०-२१ |
| चुम्बनम् | ३१६ | १२-१६ | ग्रीष्मवायव | ३३९ | १२४-१२६ | अभिसारिका | ३५६ | २२-४० |
| विहार | ३१७ | १७-२८ | ग्रीष्मपथिका | ३३९ | १२७-१३० | कलहान्तरिता | ३५७ | ४१-६८ |
| सुरतप्रशंसा | ३१७ | १-९ | वर्षावर्णनम् | ३४० | १-१११ | विप्रलब्धा | ३५८ | ६९-७९ |
| नववधूसंगमे सखीवाक्यम् | ३१७ | १-४ | वर्षासमयस्वभावाख्यानम् | ३४० | ५-७२ | प्रोषितभर्तृका | ३५५ | ८०-८७ |
| नववधूसंगम | ३१७ | १-१९ | दोलाकेलि | ३४२ | ७३-७७ | वासकसज्जा | ३५९ | ८८-९६ |
| सुरतकेलिकथनम् | ३१८ | १-५१ | वर्षावायव | ३४२ | ७८-८० | उत्का | ३५९ | ९७-१०३ |
| विपरीतरतकिया | ३२० | १-२१ | वर्षापथिका | ३४२ | ८१-९६ | वीररसनिर्देशः | ३६० | १-५१ |
| सुरतनिवृत्ति | ३२१ | १-३४ | वर्षापथिककामिनी | ३४३ | ९७-१०९ | करुणरसनिर्देशः | ३६१ | १-४१ |
| चन्द्रास्तसमयवर्णनम् | ३२२ | १-१४ | खद्योत | ३४३ | ११० | अद्भुतरसनिर्देशः | ३६३ | १-२३ |
| मध्यरात्रक्रीडावर्णनम् | ३२३ | १-५ | हंस | ३४४ | १११ | हास्यरसनिर्देशः | ३६३ | १-५६ |
| प्रभातवर्णनम् | ३२३ | १-६८ | शरद्वर्णनम् | ३४४ | १-५८ | भयानकरसनिर्देशः | ३६४ | १-१४ |
| प्रभातवायुवर्णनम् | ३२५ | १-४१ | शरत्समयस्वभावाख्यानम् | ३४४ | ४-४७ | बीभत्सरसनिर्देशः | ३६६ | १-२ |
| सूर्योदयवर्णनम् | ३२७ | १-२५ | भ्रमरक्रीडा | ३४५ | ४८-५४ | रौद्ररसनिर्देशः | ३६६ | १-५६ |
| नायिकानिर्गमनम् | ३२८ | १-६ | शरद्वायव | ३४५ | ५५-५६ | शान्तरसनिर्देशः | ३६७ | १-२६० |
| सभोगाविष्करणम् | ३२८ | १-२३ | शरत्पथिक | ३४५ | ५७-५८ | वैराग्यम् | ३६७ | १-११४ |
| प्रियप्रस्थानावस्थाकथनम् | ३२९ | १-२४ | हेमन्तवर्णनम् | ३४५ | १-५२ | विषयोपहाम | ३७१ | ११५-१३७ |
| सखीं प्रति नायिकावाक्यम् | ३३० | १-२ | हेमन्तसमयस्वभावाख्यानम् | ३४५ | ४-३३ | गर्भवासप्रयुक्तं दुःखम् | ३७२ | १३८-१४३ |
| अनित्यता निरूपणम् | ३७२ | १४४-१८८ | ||||||
| कालाचरितम् | ३७३ | १८९-२०४ | ||||||
| पश्चात्ताप | ३७४ | २०५-२३० | ||||||
| विचार | ३७५ | २३१-२६३ |
७. संकीर्णप्रकरणम्
संकीर्णश्लोका ३७७ | १-७०६
ABBREVIATIONS AND SOURCES
[ THE EDITOR EXPRESSES HIS GRATITUDE TO DR V RAGHAVAN FOR THE HELP AND CO-OPERATION KINDLY EXTENDED BY HIM ]
N. B.—NSP refers to a publication of the Nirnaya Sagar Press, by year, KM denotes a volume of the NSP Kāvyamālā Series, by number.
अनर्घ. रा = अनर्घराघवम् of Murāri, styled Bālavālmīki, son of Vardhamāna, 9th c A. D., probably patronised by a Kalacūri King of Māhiṣmatī NSP 1908
अमरु = अमरुशतकम् (also called Śṛṅgāraśataka) of Amaruka, 8th cent A D NSP 1929
अरसी = अरसीठाकुर probably Arisiṃha, teacher and associate of Amaracandra, of the time of Vastupāla, first half of the 13th cent A D
अलं कौ. = अलंकारकौस्तुभ of Viśveśvara Paṇḍita (Pāṇḍeya) of Almora, son of Lakṣmīdhara, beginning of the 18th cent NSP 1898
अलं स. = अलंकारसर्वस्वम् of Rājānaka Ruyyaka of Kashmīr, son of Tilaka, guru of Maṅkhuka, c 1150 A D NSP 1893
अ. शा , अ. शाकुं. = अभिज्ञानशाकुन्तलम् of Kālidāsa NSP 1947.
अष्ट. रत्न. = अष्टरत्नम् Ptd HAEBERLIN’s Anthology and Jīvananda’s Kāvyasaṁgraha
आनन्द (देवीश ) = देवीशतकम् of Ānandavardhana of Kashmīr, son of Nona, end of the 9th cent K M ix
आसी. प्र. = आसीननगरप्राकारप्रशस्ति quoted in the Śārṅgadharapaddhati
उत्तर. ; उत्तर. रा = उत्तररामचरितम् of Bhavabhūti, son of Nīlakaṇṭha and Jātūkarṇī He was a contemporary of Vākpatirāja and lived under Yaśovarman of Kanauj, beginning of the 8th cent A. D. NSP 1949.
औचित्य. = औचित्यविचारचर्चा of Kṣemendra of Kashmīr, styled Vyāsadāsa, pupil of Abhinavagupta, son of Prakāśendra, guru of Bhatta Udayasiṃha and prince Lakṣmaṇāditya, wrote under the Kashmīrian kings Ananta and Kalaśa, first half of 11th cent, K. M. i
कथार्ण. = कथार्णव of Śivadāsa, a late work
• कथास. = कथासरित्सागर of Somadeva of Kashmīr, son of Rāma,, written for Sūryamatī, queen of King Ananta (1028–1063 A. D.) NSP 1930 and also of Hermann Brockhaus
कवि. क. = कविकण्ठाभरणम् of Kṣemendra. K M iv, written under King Ananta See also above.
कविता. = कवितामृतकूप. A choice collection of Sanskrit couplets compiled and published in Calcutta, 1826
कवीन्द्र. = कवीन्द्रकण्ठाभरणम् of Viśveśvara Paṇḍita (Pāṇḍeya) K. M. viii. See above under Alaṅkāra Kaustubha
का. द ; काव्या. = काव्यादर्श of Daṇḍin, 7th cent. ed पं प्रेमचन्द्र तर्कवागीश, Bibl. Indica 1863 and also of Pt Rangacharya Reddy 1938.
का. नीति., कामं नी. = कामन्दकीयनीति: c. 700 A. D.; ed. Triv. Skt. Ser no xiv.
2
का प्र ; काव्य प्र = काव्यप्रकाशः of Mammaṭa Bhaṭṭa and Allaṭa (Alaka) (1050–1100 A D) Ed Vāmanācārya Jhalakīkar 1917.
काव्यप्र = काव्यप्रदीप of Govinda Bhaṭṭa (Ṭhakkura) of Mithilā, son of Keśava, c end of 15th cent NSP 1933.
काव्यालं = काव्यालंकार of Rudraṭa surnamed शतानन्द, son of Vāmuka (850 A D) NSP 1886
काव्यालं सू = काव्यालंकारसूत्राणि of Vāmana, minister under Jayāpīḍa of Kashmīr (779–813 A. D.) NSP 1926
काशीखं = काशीखण्ड from Skandapurāṇa
किरात = किरातार्जुनीयम् of Bhāravi, first mentioned in the Aihole inscription (634 A D), c 550 A. D NSP 1942.
कुट्टनीमत. = कुट्टनीमतम् of Dāmodaragupta, of the court of Jayāpīḍa of Kashmīr (779–813 A D) KM III, edited also with commentary by T. M. Tripathi, Gujarati Printing Press, Bombay, 1924
कुमार = कुमारसम्भवम् of Kālidāsa NSP 1946
कुव = कुवलयानन्द of Appayya Dīkṣita of Tamil country, author of 104 works, patronised by Cinna Bomma of Vellore and Venkatapatirāya of Vijayanagar, flourished between 1552 and 1624 or 1520 and 1593. NSP 1942
कृष्ण कर्ण = कृष्णकर्णामृतम् of Līlāśuka-Bilvamaṅgala, son of Dāmodara and Nīlī, pupil of Īśānadeva, 11th cent
क्षेमेन्द्र = See above under Aucityavicāracarcā and Kavikaṇṭhābharaṇa, author also of Kavikaṇikā, Suvṛttatilaka, Rāmāyaṇamañjarī, Bhāratamañjarī, Bṛhatkathāmañjarī, Lāvaṇyavatī, Nītilatā, Munimatamīmāṃsā Caturvarga saṅgraha, Bauddhāvadāna-kalpalatā, Avasarasāra, Lalitaratnamālā, Citrabhāratanāṭaka, Vātsyāyanasūtrasāra, Samayamātṛkā, Pavanapañcāśikā, Sevyasevakopadeśa, Cārucaryā, Kalāvilāsa, Padya-Kādambarī, Śaśivaṃśa, Kanakajānakī, Deśopadeśa, Narmamālā, Muktāvalī, Amṛtataraṅgakāvya, Darpadalana, Daśāvatāracarita, Rājāvalī, Lokaprakāśa, Vinayavallī and Vyāsāṣṭaka
खण्डप्र , खण्डप्रशस्ति = खण्डप्रशस्तिकाव्यम् attributed to Hanūmat Kavi, a Ms
गरुड = गरुडपुराणम् NSP 1938.
गीत = गीतगोविन्दम् or अष्टपदी of Jayadeva Miśra of Kindubilva in Orissa, son of Bhojadeva, flourished in the court of Lakṣmaṇasena of Bengal, 12th cent. A D. NSP 1949
गुण., गुण. रत्न. = गुणरत्नम् Subhāṣita, ascribed to Bhavabhūti Ptd Haberlin's Anthology and Jīvananda's Kāvyasaṃgraha
गोभट्ट = गोभट्ट or गोपभट्ट Styled Sūci-Gobhaṭa, quoted in Saduktikarṇāmṛta and Sūktimuktāvalī.
घट. ख = घटखर्परकाव्यम् of Ghaṭakharpara (also called यमककाव्यम्), of ten attributed to Kālidāsa. Ptd. in the Kashmir Text Series with Abhinavagupta's commentary
चाणक्य = चाणक्यनीतिसार of Cāṇakya ed Haberlin
3
चातका. = चातकाष्टकम् Ptd. in Hæberlin's Anthology
चा. नी. = (लघु) चाणक्यशतकम् of Cāṇakya, a Ms.
चोर. पं = चौरपञ्चाशिका of Bilhaṇa of Kashmīr, came south to the Cālukya court of Vikramāditya VI (1076–1127 A. D.) ed Bohlen
छलित = छलितरामनाटकम् quoted in Daśarūpa, Sarasvatīkaṇṭhābharaṇa, Śṛṅgāraprakāśa, Nāṭyadarpaṇa, etc
ज्योतिस्तत्त्व = of Raghunandana Bhaṭṭācārya (A. D. 1490–1570), quoted in the Nirṇayasindhu (1612)
दंपती., दं. = दम्पतीशिक्षा of Nīlaratnaśarma ed श्रीरामपुर सन् १२४० (A. D. 1813) (Bengali and Sanskrit)
दर्प द = दर्पदलनम् of Kṣemendra. See above. KM vi
दश, दशरू = दशरूपकम् of Dhanañjaya, son of Viṣṇu, of the court of king Muñja-Vākpatirāja of Dhārā (974 A. D), brother of Dhanika, author of Daśarūpāvaloka. NSP 1941
दशकु = दशकुमारचरितम् of Daṇḍin. See above under Kāvyādarśa NSP 1951
दृ श., दृष्टांत. = दृष्टान्तकलिकाशतकम् or दृष्टान्तशतकम् of Kusumadeva, quoted by Vallabhadeva, in his Subhāṣitāvali. KM xiv and also cf Haeberlin's Anth
धनंजय = धनञ्जयविजयव्यायोग of Kāñcana, son of Nārāyaṇa Vāgīśvara, wrote by the order of King Jayadeva, in his court, presided over by Gadādhara, quoted by Siṃhabhūpāla (Rasārṇavasudhākara c 400)
धर्म.; धर्मवि. = धर्मविवेक of Halāyudha (1000–1100 A. D.) Haeberlin Anth
धूर्तस. = धूर्तसमागम of Jyotirīśvara Kaviśekhara of Mithilā 14th cent. A. D. Ed. CAPPELLER and LASSEN
ध्वन्या = ध्वन्यालोक of Ānandavardhana. See above under Devīśataka. NSP 1935.
नकुल. = Mentioned in Brahmavaivaswatapurāṇa
न. र. = नवरत्नस्तोत्रम् Ptd HABERLIN
नल. चं = नलचम्पू or दमयन्तीकथा of Trivikrama Bhaṭṭa, of Śāṇḍilya gotra, son of Nemāditya and grandson of Śrīdhara, composed the Nausari inscription of Rāṣṭrakūṭa Indra III in 915 A D NSP 1931.
नव साहसाङ्क. = नवसाहसाङ्कचरितम् of Padmagupta alias Parimala, c 1005 A D, celebrates Sindhurāja of Malwa
नागा. = नागानन्दम् of King Harṣavardhana, 7th century A. D. Triv. Skt. Series no. LIX
नीतित. = नीतितरङ्ग of Viśveśvaradatta
नीति. स. = नीतिसंकल्प Ed Gildemeister lib.
नीतिम. = नीतिप्रदीप of Vetāla Bhaṭṭa, Ptd HABERLIN and JIVANANDA.
नै.; नैषध = नैषधीयचरितम् of Śrīharṣa, son of Hīra and Māmalladevī; wrote under Vijayacandra and Jayacandra of Kanauj, 2nd half of the 12th century A. D. NSP 1952 and Calcutta 1836
पंच. रत्न. = पंचरत्नस्तोत्रम् Ptd HABERLIN.
प. त., पंच. = पञ्चतन्त्रम् of Viṣṇuśarman with Saralā Comm. NSP 1950 and also cf. Kosegarten.