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सर्वकोश
श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

Sri Ramakrishna Vachanamrita (Part 1 - Tr. Nirala)

श्री 'म' (महेंद्रनाथ गुप्त) / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा

DevanagariHindipublished711 पृष्ठ

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पृष्ठ 619

५९६ श्रीरामकृष्णवचनामृत ७ सितम्बर, १८८४

हुए बहुत झूम रहे हैं। यह देख निरंजन उन्हें पकड़ने के लिए बढ़े। श्रीरामकृष्ण ने मधुर स्वरों में कहा – 'मत छू।' श्रीरामकृष्ण को नाचते हुए देखकर भक्तगण उठकर खड़े हो गये। श्रीरामकृष्ण मास्टर का हाथ पकड़कर कहते हैं – 'नाच।'

श्रीरामकृष्ण अपने आसन पर बैठे हुए हैं। भाव की पूर्ण मात्रा है – बिलकुल मतवाले हैं।

भाव का कुछ उपशम होने पर कह रहे हैं – ॐ ॐ ॐ काली! भक्तों में से कितने ही खड़े हैं। महिमाचरण खड़े हुए श्रीरामकृष्ण को पंखा झुल रहे हैं।

श्रीरामकृष्ण – (महिमाचरण से) – आप लोग बैठिये।

“आप वेद से जरा कुछ सुनाइये।”

महिमाचरण सुना रहे हैं – जय यज्वमान आदि; फिर वे महानिर्वाण-तन्त्र की स्तुति का पाठ करने लगे –

“ॐ नमस्ते सते ते जगत्कारणाय नमस्ते चिते सर्वलोकाश्रयाय।
नमोऽद्वैततत्त्वाय मुक्तिप्रदाय, नमो ब्रह्मणे व्यापिने शाश्वताय॥
त्वमेकं शरण्यं त्वमेकं वरेण्यम् त्वमेकं जगत्पालकं स्वप्रकाशम्।
त्वमेकं जगत्कर्तृपातृप्रहर्तृ त्वमेकं परं निश्चलं निर्विकल्पम्॥
भयानां भयं भीषणं भीषणानाम् गतिः प्राणिनां पावनं पावनानाम्।
महोच्चैः पदानां नियन्तृ त्वमेकम् परेषां परं रक्षणं रक्षणानाम्॥
वयं त्वां स्मरामो वयं त्वां भजामो वयं त्वां जगत्साक्षिरूपं नमामः॥
सदेकं निधानं निरालम्बमीशम् भवाम्भोधिपोतं शरण्यं व्रजामः॥”

श्रीरामकृष्ण ने हाथ जोड़कर स्तुति सुनी। पाठ हो जाने पर हाथ जोड़कर उन्होंने प्रणाम किया। भक्तों ने भी प्रणाम किया।

कलकत्ते से अधर आये। श्रीरामकृष्ण को प्रणाम किया।

श्रीरामकृष्ण – (मास्टर से) – आज खूब आनन्द रहा। महिम चक्रवर्ती भी इधर झुक रहा है। कीर्तन में खूब आनन्द रहा – क्यों?

मास्टर – जी हाँ।

महिमाचरण ज्ञानचर्चा करते हैं। आज उन्होंने कीर्तन किया है, और नाचे भी हैं। श्रीरामकृष्ण इस बात पर आनन्द प्रकट कर रहे हैं।

शाम हो रही है। भक्तों में से बहुतेरे श्रीरामकृष्ण को प्रणाम कर बिदा हुए।

(४)

प्रवृत्ति या निवृत्ति? अधर का कर्म

शाम हो गयी है। दक्षिणवाले लम्बे बरामदे में और पश्चिम के गोल बरामदे में बत्ती