श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
[ एइ-एतकाल
एइ त' कहिलाङ आचार्य १२/७६ | एइमत लीला दुँहे १४/७० | एकदिन नैवेद्य-ताम्बुल १५/१६
एइ त' कहिलुँ प्रेमफल ९/५४ | एइमत वैष्णव कारे १७/२९ | एकदिन प्रभु विष्णुमण्डपे १७/११५
एइ त' कैशोर-लीला १६/४ | एइ मत शिशुलीला करे १४/९३ | एकदिन प्रभु सब भक्तगण १७/७९
एइ त' निश्चय करि' आइल १०/९५ | एइमत संख्यातीत चैतन्य १०/१५९ | एक दिन बले किछु १७/४७
एइ त' पौगण्ड-लीलार १५/३१ | एइमत सब शाखा १०/१६ | एकदिन प्रभु श्रीवासे आज्ञा १७/९०
एइ त' प्रस्तावे आछे बहुल १२/५५ | एइ मते काजीरे प्रभु १७/२२६ | एकदिन महाप्रभुर नृत्य १७/२४३
एइ त' संक्षेपे कहिलाङ १२/८८ | एइमते दुँहे करेन धर्मेर १४/९० | एकदिन मातार पदे करिया १५/८
एइ तिन शाखा वृक्षर १०/८४ | एइमते नाना छले ऐश्वर्य १४/३६ | एकदिन मिश्र पुत्रेर चापल्य १४/८३
एइ तिन स्कन्धेर कैलुँ १२/९० | एइमते निज-घरे गेला १६/१०५ | एकदिन वल्लभाचार्य-कन्या १४/६२
एइ दुइ-घरे प्रभु एकादशी १०/७१ | एइ 'मध्यलीला'-नाम १३/३७ | एकदिन विप्र, नाम १७/३७
एइ दुइजनेर सूत्र देखिया १३/१७ | एइ मालाकार खाय एइ ९/५१ | एकदिन शची खइ-सन्देश १४/२४
“एइ देख कुओर भितर १७/२८४ | एइ मालीर-एइ वृक्षर १०/३ | एकदिन शची-देवी पुत्रेरे १४/७२
एइ देख, नखचिह्न आमार १७/१८६ | एइ मासे पुत्र हबे १३/८८ | एक दिन श्रीवासेर मन्दिरे १७/२२७
एइ दृढ़ युक्ति करि' १७/२६८ | एइ लागि' श्लोकेर अर्थ १६/५७ | एक दोषे सब अलङ्कार १६/६९
एइ नव मूल निकसिल ९/१५ | एइ शिक्षा सबाकारे, सबे १२/५३ | एक पड़ुया आइल १७/२४८
एइ नव मूले वृक्ष ९/१६ | एइ शिशु सर्वलोके करिबे १४/१६ | एक पादे नाहि, एइ १६/६७
एइ नव मूले वृक्ष ९/१५ | एइ शिशु अङ्गे देखि १४/१४ | एक फल खाइले रसे १७/८५
एइ पञ्चदोषे श्लोक कैल १६/६८ | “एइ श्लोकेर अर्थ कर” १६/४२ | एकफलेर मूल्य करि' ताहा ९/२८
एइ पञ्चपुत्र तोमार-मोर १०/१३४ | एइ सप्तदश प्रकार 'आदि १७/३२८ | एक ब्राह्मणी आसि' १७/२४३
एइ पापे नवद्वीप हइबे १७/२११ | एइ सब चन्द्रोदये तमः १३/४ | एक-भावे चब्बिश प्रहर १०/१७
एइ पितार वाक्य शुनि' १२/१४ | एइ सब ना माने येबा ८/७ | एक श्लोकेर अर्थ यदि १६/३९
एइमत आचार करे भक्ति १७/३० | एइ सब महाशाखा-चैतन्य १०/७९ | एक श्वेतकुष्ठे यैछे १६/७०
एइमत कीर्त्तन करि' १७/१३९ | एइ सब मोर निन्दा १७/२६१ | एकला उठाञा दिते हय ९/३५
एइ मत चापल्य सब १४/६१ | एइसब लीला करे शचीर १७/८७ | एकला मालाकार आमि ९/३४
एह मत दुँहार कथा १७/१५१ | एइ सर्वशाखा पूर्ण-पक्व ११/५८ | एकला मालाकार आमि ९/३७
एइ मत नाना लीला १५/२२ | एक 'अद्वैत' नाम, आर ९/२१ | एकला वा कत फल ९/३४
एइमत नृत्य हइल चारि १७/१२० | एक आम्रबीज प्रभु अङ्गने १७/८० | एकादशे 'नित्यानन्दशाखा १७/३२४
एइमत प्रतिदिन फले १७/८६ | एक एक शाखार शक्ति १०/१६२ | एकैक शाखाते उपशाखा ९/१९
एइ मत बङ्गे प्रभु १६/२० | एक 'कृष्णनामे' करे ८/२६ | एकैक-शाखाते लागे १०/१६०
एइ मत बङ्गेर लोकेर १६/१९ | एक कृष्णनामेर फले ८/२८ | एत कहि आचार्य ताँरे १२/४३
एइ मत बारमास कीर्त्तन १७/८८ | एक कृष्णनामेर महा १७/३२१ | एत कहि' सिंह गेल १७/१८६
एइ मत भक्तयति १३/१०३ | एकजनेर पेट भरे-खाइले १७/८३ | एत कहि' सन्ध्याकाले १७/१३५
एइ मत भक्तिवृक्षे ९/२५ | एकदिन गोपीभावे गृहेते १७/२४७ | “एतकाल प्रकटे केह ना १७/१२६
276 | श्रीचैतन्यचरितामृत
एत-कह ]
एत चिन्ति' लैला प्रभु 9/8 | ए-सब ना माने 8/6 | कतदिन रहि' मिश्र गेला 15/23
एत चिन्ति' विवाह करिते 15/26 | एसब पाषण्डी तबे 17/267 | कत दिने कैल प्रभु 16/8
एत जानि' चन्द्रे राहु 13/92 | एसब-प्रसादे लिखि 9/5 | कत दिने मिश्र पुत्रेर हाते 14/94
एत भावि' कहे,—"शुन 16/91 | ए सब लीला वर्णियाछेन 16/109 | कथा कहि' अनुवाद करे 17/312
एत बलि' काजी गेल 17/129 | | कथाय सभा उज्ज्वल करे 8/64
एत बलि' काजी निज 17/187 | | कन्यागण आइला ताँहा 14/48
एत बलि' गेला प्रभु 17/54 | ऐ | कन्यागण-मध्ये प्रभु 14/49
एत बलि' गेला शची 14/25 | | कन्या मागि' विवाह दिते 15/11
एत बलि' जननीर 14/35 | | कन्य़ारे कहे,—"आमा पूज 14/50
एत बलि' दुँहे रहे 13/86 | ऐछे आर शाखा-उपशाखार 12/88 | कपाट दिया कीर्त्तन करे 17/35
एत बलि नमस्करि' गेला 17/289 | ऐछे कर्म ना करिह 12/52 | कभु दक्षिण, कभु गौड़ 13/12
एत बलि' भारती गोसाञि 17/272 | ऐछे कर्म हेथा कैल 17/43 | कभु दुर्गा, लक्ष्मी हय 17/242
एत बलि' श्रीवास करिल 17/98 | ऐछे ग्रन्थ करि' तेंहो 8/40 | कभु पुत्रसङ्गे शची करिला 14/76
एत बलि' सबे ताँरे 17/287 | ऐछे देवेर वरे केह हय 16/44 | कभु प्रभु करेन ताँरे 17/299
एत शुनि' काजीर दुइ 17/219 | ऐछे प्रभु शची-घरे 13/122 | कभु भक्ति ना देन 8/18
एत शुनि' ता सभारे 17/203 | ऐछे यदि पुनः कर 17/185 | कभु भेद देखि, एड़ 17/113
एत शुनि' द्विज गेला 14/91 | ऐछे शची-जगन्नाथ 13/119 | कभु मृदुहस्ते कैल 14/45
एत शुनि' महाप्रभु हासिते 12/46 | | कभु शिशु-सङ्गे स्नान 14/48
एत शुनि' महाप्रभु हासिया 17/216 | | कमलाकर पिप्पलाइ 11/24
एत शुनि' महाप्रभुर हइल 17/50 | ओ | 'कमलाकान्त विश्वास' 12/28
एथा नवद्वीपे लक्ष्मी विरहे 16/20 | | 'कमले गङ्गार जन्म' 16/79
"एथा हैते विश्वरूप मोरे 15/18 | | कराइल जातकर्म 13/108
एबे कहि चैतन्य-लीला 13/6 | | कलानिधि, सुधानिधि 10/133
एबे कहि बाल्यलीला 14/4 | ओरे मूढ़ लोक, शुन 8/33 | कलार पात उपरे थुइल 17/39
एबे तुमि शान्त हैले 17/147 | | कलिक़ाले तैछे शक्ति 17/163
एबे ये उद्यम चालाओ 17/126 | | कलिक़ाले नामरूपे कृष्ण 17/22
एबे ये ना कर माना 17/174 | क | कल्पित आमार शास्त्र 17/170
एबे शुन, फलदाता ये 9/54 | | कवि कहे,—"कह देखि 16/53
एबे शुन मुख्य-शाखार 10/3 | | कवि कहे,—"ये कहिले 16/49
एबे से जानिलाङ, आर 14/34 | | कविचन्द्र, आर कीर्त्तनीया 10/109
ए वृक्षर अङ्ग हय 9/33 | कंसारि, परमानन्द, पद्मनाभ 13/57 | कवित्व-करणे शक्ति 16/102
एसब जीवेरे अवश्य 17/264 | कंसारि सेन, रामसेन 11/51 | कवि रात्रे कैल सरस्वती 16/105
एसब दुर्जनेर कैछे 17/262 | कत दिन प्रभु चित्ते 15/25 | कह तोमार श्लोके किवा 16/47
पद्य सूची | 277
[ कहिते-केशव
कहिते चाहये किछु ना 16/88 | किबा कोलाहल करे 14/81 | कृष्णपूजा करे तुलसी 13/70
कहिते लागिला प्रभु 17/216 | किशोर-वयसे आरम्भिला 13/31 | कृष्णप्रेममय-तनु, उदार 8/59
कहिते लागिला लोके 17/132 | कीर्त्तन करिते प्रभु करिला 17/224 | कृष्णप्रेम-लीलामृते 13/13
कहिते, शुनिते ऐछे 17/240 | कीर्त्तन करिते प्रभु, आइला 17/89 | कृष्णप्रेमा दिते, निते 11/26
काजी कहे,-"आज्ञा 17/152 | कीर्त्तन करिलुँ माना 17/178 | कृष्णप्रेमामृत वर्षे, ये 11/30
काजी कहे,-"इहा 17/11 | कीर्त्तन ना वर्ज्जिया घरे 17/191 | कृष्णप्रेमे पुलकाश्रु-विह्वल 8/22
काजी कहे,-"तुमि 17/146 | कीर्त्तन शुनि' बाहिरे तारा 17/36 | कृष्ण-बलराम दुइ 13/78
काजी कहे,-"तोमार 17/155 | कीर्त्तने नर्त्तन करे बड़ 12/20 | कृष्ण बलिले अपराधीर 8/24
काजी कहे,-"मोर 17/222 | कीर्त्तनेर कैल प्रभु तिन 17/135 | कृष्णभक्ति पाय, ताँरे 11/29
काजी कहे,-"यबे 17/178 | कीर्त्तनेर ध्वनिते काजी 17/141 | कृष्णमिश्र-नाम आर 12/18
काजीगणेर मुखे येंह 10/53 | कुम्भीपाके पचे सेइ 17/307 | कृष्ण यदि छुटे भक्ते 8/18
काजी-पाशे आसि' सब 17/124 | कुलाधिदेवता मोर 8/80 | कृष्णलीला भागवते कहे 8/34
काजी बले,-"सबे 17/175 | कुलीनग्रामवासी सत्यराज 10/80 | कृष्णवश-हेतु एक 17/75
काजीर भये स्वच्छन्द 17/131 | कुलीनग्रामीर भाग्य कहेन 10/83 | कृष्णसङ्ग देह' मोरे 17/21
काजीरे बसाइला प्रभु 17/144 | कृतघ्न हइला, ताँरे 12/68 | कृष्णस्मृति बिना हय 12/51
काजीरे विदाय दिल 17/225 | कृपा करि' कर मोर 17/270 | 'कृष्ण' 'हरि' नाम 13/23
काटिलेह तरु येन किछु 17/28 | कृपा करि' कर यदि 16/35 | कृष्णेर अचिन्त्यशक्ति 17/305
कान्दिया बलेन शिशु 14/27 | कृष्ण अवतरि' करेन 13/69 | कृष्णेर आह्वान करे सघन 13/71
कायमनोवाक्ये करे 8/62 | कृष्ण अवतारिते आचार्य 13/70 | कृष्णेर कीर्त्तन करे नीच 17/211
कार पदचिह्न घरे, ना 14/8 | कृष्ण अवतारिया कैला 17/298 | कृष्णेर ये साधारण सद्गुण 8/57
काला-कृष्णदास बड़ 11/37 | कृष्णकथा, कृष्णपूजा 13/66 | कृष्णेर वियोगे यत प्रेम 13/43
काशीमिश्र, प्रद्युम्नमिश्र 10/131 | कृष्ण-कृपा नाहि तार 8/7 | “के आछिलुँ पूर्वजन्मे 17/104
काशीश्वर गोसाञिर शिष्य 8/66 | 'कृष्ण' 'कृष्ण' 'हरि' 13/92 | के करिते पारे ताँहा 12/93
काष्ठ-पाषाण द्रवे याहार 11/19 | कृष्णदास-नाम शुद्ध 10/145 | "केने चुरि कर, केने 14/42
काठेर पुत्तली येन कुहके 8/79 | कृष्णदास ब्रह्मचारी 12/84 | केने पर-घरे याह 14/42
काँहा तुमि सर्वशास्त्रे 16/34 | कृष्णदास वैद्य, आर 10/109 | केमने ए सब अर्थ करिले 16/92
काहाँ आमि सबे शिशु 16/34 | 'कृष्णनाम' करे अपराधेर 8/24 | केमने ए सर्वलोकेर 13/68
काहाके वा स्तुति करे 14/81 | कृष्णनाम-बीज ताहे ना 8/30 | केबा आसे केबा याय 13/107
कि-कारणे लीला,-इहा 15/22 | कृष्णनाम-सह यैछे प्रभुर 17/325 | के वर्णिते पारे, ताहा 13/44
किछुमात्र करि' कहि' 12/77 | कृष्णनामे भासाइल 13/30 | केवल ए गण-प्रति 12/71
किन्तु ताँर दैवे किछु 12/32 | कृष्ण देखि' गोपी कहे 17/286 | केवल नीलाचले प्रभुर 10/123
किन्तु सर्वलोक देखि' 13/67 | "कृष्णनाम ना लओ केने 17/249 | 'केवल'-शब्दे पुनरपि 17/24
कि पण्डित, कि तपस्वी 12/72 | कृष्ण नाहि माने, ताते 8/9 | केशव भारती आइला 17/268
278 | श्रीचैतन्यचरितामृत
केशव-गोसाञिदास ]
केशव भारती, आर 13/54
केह करिवारे नारे 10/5
केह कीर्त्तन ना करिह 17/127
केह केह-कृष्णदास 17/198
केह गड़ागड़ि याय, केह 9/50
केह त' आचार्येर आज्ञाय 12/9
केह पाय, केह ना पाय 9/35
केह-हरिदास, सदा बले 17/199
कैशोर-लीलार सूत्र करिल 17/3
कोटिजन्म एइ मते कीड़ाय 17/51
कोटि जन्म हबे तोर 17/52
कौटिल्य-मात्सर्य-हिंसा 8/56
कोन कन्या पलाइल नैवेद्य 14/57
“कोन किछु जाने, किबा 14/59
कोन पाके सेइ पत्री 12/30
कोन वाञ्छा पूरण लागि' 13/52
कोन् बले कर तुमि 17/154
कोन् वा मानुष हय 17/256
क्रन्दनेर छले बलाइल 14/22
क्रमे आमि कहि, शुन, 16/॥54
क्रु
क्रु
क्रोधावेशे प्रभु तारे कैल 17/67
क्रोधावेशे बले तारे तर्ज्जन 17/50
क्रोधे कन्यागण कहे, 14/52
क्रोधे सन्ध्याकाले काजी एक 17/125
क्ष
क्षुधा लागे यबे, तबे 14/34
ख
खइ-सन्देश-अन्न, यतेक 14/28
खण्डवासी मुकुन्ददास, 10/78
खण्डिबे संसार-दुःख 8/43
खण्डिल ताहार चित्ते सब 17/65
खण्डिलेक दुःख-शोक 13/107
खाड़या नैवेद्य तारे इष्टवर 14/60
खाइया हउक् लोक 9/39
खाटे बसि' प्रभु कैल 17/11
खाटे बसि' भक्तगणे दिल 17/242
खोला-बेचा श्रीधर प्रभुर 10/67
ग
गङ्गाजल-पात्र आनि' 17/116
'गङ्गाते कमल जन्मे' 16/79
गङ्गादास पण्डित, गुप्त 13/61
गङ्गादास पण्डित-स्थाने 15/5
गङ्गा-दुर्गा-दासी मोर 14/50
गङ्गाघाटे वृक्षतले रहे 17/47
गङ्गामन्त्री, मामु ठाकुर 12/80
'गङ्गार महत्त्व'-श्लोके 16/56
गङ्गार महत्त्व-साध्य 16/83
गङ्गास्नान कर याइ' 14/74
गङ्गास्नान करि' पूजा 14/49
गङ्गारे वन्दन करि' 16/29
गणिते लागिला सर्वज्ञ 17/104
गणि' ध्याने देखे सर्वज्ञ 17/105
गदाधर, जगदानन्द, शङ्कर 10/125
गदाधर दास गोपीभावे 11/17
गम्भीर चैतन्य-लीला के 14/70
गया हैते आसिया चालाय 17/206
गरुड़ पण्डित लय श्रीनाम 10/75
गार्हस्थ्ये प्रभुर लीला-'आदि' 13/14
गीता-भागवत कहे आचार्य 13/64
गुण्डिचा-मन्दिरे महाप्रभुर 12/20
गुप्ते बोलाइल नीलाम्बर 14/12
गुरुर सम्बन्धे मान्य कैल 10/140
गृहस्थ हइया करि पितृ 15/20
गृहस्थ हइलाम, एबे चाहि 15/25
गृहिणी बिना गृहधर्म ना 15/26
गृहे दुइ जन देखि' 14/7
गो-अङ्गे यत लोम, तत 17/166
गोपगृहे जन्म छिल, गाभीर 17/111
गोप-वेश, त्रिभङ्गिम, मुरली 17/279
गोपाल आचार्य आर विप्र 10/114
गोपाल गोविन्द राम 17/122
गोपिका-भावेरे एइ 17/278
गोपिकार भाव नाहि याय 17/280
गोपीगण देखि' कृष्णेर 17/285
'गोपी' 'गोपी' नाम लय 17/247
'गोपी' 'गोपी' नाम शुनि' 17/248
'गोपी' 'गोपी' बलिले 17/249
गोपीनाथ सिंह-एक चैतन्येर 10/76
गोपी-भाव याते प्रभु 17/277
गोवर्धने त्यजिब देह भृगुपात 10/94
गोविन्द, माधव, वासुदेव 10/115
गोविन्द, श्रीरङ्ग, मुकुन्द 11/51
गोविन्देर आज्ञाय सेवा 10/144
गोविन्देर प्रियसेवक ताँर 8/66
गोविन्देर सङ्गे सेवा करे 10/143
गोविन्देरे आज्ञा दिल, - 'इँहा 12/36
गोसाञिदास आनि' माला 8/76
पद्य सूची | 279
[ गोसाञिदास-चौद्दशत
| गोसाञिदास पूजारी करे | 8/74 | चक्रवर्त्ती शिवानन्द सदा | 12/87 | चैतन्य-नित्यानन्दे नाहि | 8/31 |
|---|---|---|---|---|---|
| गौड़देश-भक्तेर कैल संक्षेप | 10/121 | चतुर्थ-चरणे चारि 'भ' | 16/75 | चैतन्य-पार्षद-श्रीआचार्य | 10/30 |
| गौड़े पूर्वे भृत्य प्रभुर प्रिय | 10/149 | चतुर्थे कहिलुँ जन्मेर् 'मूल' | 17/317 | चैतन्यभक्ति-मण्डपे | 11/10 |
| गौरकथा बिना ताँर | 8/68 | चतुर्द्दशे 'बाल्यलीला'र | 17/326 | चैतन्य-मङ्गल' यँहो | 11/54 |
| गौरचन्द्र-बले लोक प्रश्रय | 17/140 | चतुर्भुज मूर्त्ति करि' | 17/286 | चैतन्यमङ्गल सुने यदि | 8/38 |
| गौरचन्द्र बिना नाहि | 10/11 | चतुर्विध भक्त-भाव करे | 17/275 | चैतन्यमङ्गले' कैल विस्तारित | 15/7 |
| गौरप्रभु दयामय, ताँरे | 13/122 | चन्द्रशेखर-गृहे कैल | 10/154 | 'चैतन्यमङ्गले' सर्वलोके | 15/33 |
| गौरलीलामृत-सिन्धु-अपार | 12/93 | चन्द्रशेखर वैद्य, आर | 10/152 | चैतन्य-महिमा याते जानिबे | 8/33 |
| 'गौरहरि' बलि' तारे हासे | 13/25 | चब्बिश वत्सर ऐछे | 13/33 | चैतन्यमालीर कहि लीला | 12/92 |
| गौराङ्गेर शेषलीला वर्णिवार | 8/65 | चब्बिश वत्सर छिला करिया | 13/34 | चैतन्य-मालीर कृपाजलेर | 12/5 |
| ग्रन्थ-बाहुल्येर भये नारि | 12/55 | चब्बिश वत्सर प्रभु कैल | 13/10 | चैतन्य-रहित देह-शुष्क | 12/70 |
| ग्रन्थ-विस्तार-भये छाड़िला | 13/49 | चब्बिश वत्सर शेषे करिया | 13/11 | चैतन्य-लीलाते व्यास | 11/55 |
| “ग्राम-सम्बन्धे आमि तोमार | 17/48 | चमत्कार हैया लोक | 13/93 | चैतन्यलीलाते 'व्यास'-वृन्दावन | 8/82 |
| ग्राम-सम्बन्धे चक्रवर्त्ती हय | 17/148 | चरणेर धूलि सेइ लय | 17/244 | चैतन्य-लीलार व्यास | 8/34 |
| ग्राम-सम्बन्धे हओ तुमि आमा | 14/52 | चलिते चरणे नूपुर बाजे | 14/78 | चैतन्य-लीलार व्यास,-दास | 13/48 |
| ग्रामेर ठाकुर तुमि, सब | 17/213 | चुरि करि' द्रव्य खाय | 14/40 | चैतन्य-विमुख येइ, तार | 12/72 |
| चैतन्य-गोसाञि बैसे | 12/18 | चैतन्य-विमुख येइ सेइ | 12/71 | ||
| “चैतन्य गोसाञिर गुरु | 12/14 | चैतन्येर शेष-लीला | 8/48 | ||
| चैतन्य-गोसाञिर भक्त रहे | 11/13 | चारि दण्ड निद्रा, सेइ | 10/102 | ||
| घ | चैतन्य-गोसाञिर यत | 10/4 | चारि भाइर दास-दासी | 10/9 | |
| चैतन्य-गोसाञिर लीला | 16/110 | चिकित्सा करेन यारे | 10/51 | ||
| घटी एके शत श्लोक | 16/36 | चैतन्यचन्द्रेर लीला अनन्त | 8/46 | चिह्न देखि' चक्रवर्त्ती | 14/13 |
| घरे आइला प्रभु बहु | 16/23 | चैतन्य-चरण बिनु नाहि | 10/52 | चित्र भाव, चित्र गुण | 17/306 |
| घरे गया सब लोक | 17/131 | चैतन्यचरण बिनु नाहि | 10/36 | चित्रवर्ण पट्टसाड़ी | 13/113 |
| घरे घरे सङ्कीर्त्तन करिते | 17/121 | चैतन्य-चरिते ताँर | 8/61 | चिरकालेर पड़ुया जिने | 15/6 |
| घरे पाठाइया देय धन | 13/82 | चैतन्यचरिते तैँहो अति | 8/67 | चोरे लञा गेल प्रभुके | 14/38 |
| घरे बसि' चिन्तेन ता' | 17/259 | चैतन्य-चापल्य देखि' प्रेमे | 14/71 | चौद्द भुवनेर गुरु-चैतन्य | 12/16 |
| चैतन्यदास, रामदास, आर | 10/62 | चौद्दशत छय शके शेष | 13/80 | ||
| च | चैतन्य ना मानिले तैछे | 8/9 | चौद्दशत पञ्चान्ने हइल | 13/9 | |
| चैतन्य-निताइर याते | 8/36 | चौद्दशत सात शके जन्मेर् | 13/9 | ||
| चैतन्य-नित्यानन्द गाय | 11/11 | चौद्दशत सात शके | 13/89 | ||
| चक्रपाणि आचार्य, आर | 12/58 | चैतन्य-नित्यानन्द भज | 8/13 | ||
| चैतन्य-नित्यानन्दे ताँर | 8/61 |
280 | श्रीचैतन्यचरितामृत
जगत-तबे ]
ज
- जगत व्यापिया मोर हबे — 9/40
- जगत व्यापिल तार के — 9/23
- जगत व्यापिल तार नहिक — 9/24
- जगत् आनन्दमय — 13/101
- जगत् भरिया लोक बले — 13/94
- जगते यतेक जीव, तार — 10/42
- “जगद्गुरुते तुमि कर ऐछे — 12/15
- जगदीश पण्डित, आर हिरण्य — 10/70
- जगन्नाथ आचार्य प्रभुर प्रिय — 10/108
- जगन्नाथ कर, आर कर — 12/60
- जगन्नाथ, जनार्द्दन — 13/58
- जगन्नाथ देखिते आगे — 10/141
- जगन्नाथ तीर्थ, विप्र — 10/114
- जगन्नाथ मिश्र कहे, - 'स्वप्न — 13/84
- जगन्नाथमिश्र-पत्नी शचीर — 13/72
- जगन्नाथ मिश्रवर-पदवी — 13/59
- जगन्नाथ-शचीर देहे — 13/80
- जगाइ मधाइ पर्यन्त — 8/20
- जड़लोक बुझाइते पुनः — 17/23
- जन्म-बाल्य-पौगण्ड — 13/22
- जन्म सार्थक करि' कर — 9/41
- जन्मिले चैतन्यप्रभु — 13/21
- जय श्रीमाधवपुरी कृष्णप्रेमपूर — 9/10
- जरद्गव हञा युवा हय — 17/162
- जल-गोमय दिया सेइ — 17/44
- जल पान करिया नाचे — 17/117
- जलाभावे कृश शाखा — 12/69
- जाति-अनुरोधे तबु सेइ — 17/170
- जानि कार घरे धन — 17/199
- जानि वा ना जानि — 9/5
- जानि-सरस्वती मोरे — 16/89
- जाह्नवीते जलकेलि करे — 16/7
- जितामित्र, काष्ठकाटा — 12/83
- जियाइते पारे यदि, तबे — 17/160
- जिह्वा कृष्णनाम करे, ना — 17/202
- जीवितेइ मृत सेइ, मैले — 12/70
- जीयात् कैशोर-चैतन्यो — 16/3
- ज्योतिर्मय देह, गेह — 13/81
- ज्योतिर्मय-धाम मोर — 13/84
- ज्योत्स्नावती रात्रि, प्रभु — 16/28
ज्ञ
- ज्ञान-कर्म निन्दि' करे — 13/64
- ज्ञान-कर्म-योग-धर्मे नहे — 17/75
- ज्ञान-योग-तप आदि — 17/24
- ज्ञान, योग, तपो-धर्म — 13/65
झ
- झंझावात-प्राय आमि — 16/43
ठ
- ठेङ्गा लञा उठिला प्रभु — 17/250
ड
- डाकिनी-शाँखिनी हैते — 13/117
ढ
- ढक्कावाद्ये नृत्य करे — 11/32
त
- तत्त्व कहिं कैल शचीर दुःख — 16/23
- ततक्षणे जन्मिया वृक्ष बाड़िते — 17/80
- तथा नाना चमत्कार — 14/21
- तथापि खण्डिबे दुःख — 8/11
- तथापि दाम्भिक पड़्या नम्र — 17/258
- तथापि पितार धर्म-पुत्रके — 14/89
- तथापि भूमिष्ठ नह — 13/87
- तथा याह, तँहो यदि — 17/57
- तथा हैते यबे कुलिया — 17/55
- तपन आचार्य, आर — 10/148
- तपन-मिश्ररे घरे भिक्षा — 10/154
- तबु त' ना पाय कृष्णपदे — 8/16
- तबु यदि प्रेम नहे, नहे — 8/29
- तबु श्रीवासेर चित्ते ना — 17/228
- तबे आचार्य-गोसाञिर आनन्द — 17/68
- तबे आचार्येर घरे कैल — 17/241
- तबे आमि प्रतिवाक्य कहिल — 17/214
पद्य सूची | 281
[ तबे-ताते
तबे कत दिने कैल पद 14/23 | तबे से इहारे भक्ति 17/263 | ताँर यशः-गुण सर्वजगते 8/54
तबे कत दिने प्रभुर 14/21 | तबे सेइ पापी प्रभुर लइल 17/56 | ताँर लीला वर्णियाछेन 10/47
तबे जानि, अपराध ताहाते 8/30 | तबे सेइ यवनरे आमि 17/196 | ताँर शाखा-उपशाखा 12/56
तबे त' करिल प्रभु 16/25 | तबे से ग्रन्थेर अर्थ 17/311 | ताँर शाखागण किछु 12/78
तबे त' करिला प्रभु 17/8 | तरुसम सहिष्णुता वैष्णव 17/27 | ताँर शाखा मुख्य एक 10/24
तबे त' करिला सब भक्ते 17/230 | तर्कशास्त्रे सिद्ध येइ 8/14 | ताँर शिष्य-उपशिष्य 10/16
तबे त' द्विभुज केवल 17/15 | तर्के इहा नाहि माने 17/307 | ताँर शिष्य-गोविन्द-पूजक 8/69
तबे त' नगरे हइबे 17/192 | तर्ज्ज-गर्ज्ज करे लोक 17/140 | ताँर सङ्गे ताते करे वैष्णवेर 13/66
तबे त' सकल लोकेर 13/69 | तर्ज्जन गर्ज्जन शुनि' ना 17/141 | ताँर सङ्गे तीनजन प्रभु 10/117
तबे तोमार हबे एइ 17/58 | तव व्याख्या शुनि' आमि 16/91 | ताँर सङ्गे नाचि' बुले 17/137
तबे दिग्विजयी व्याख्यार 16/40 | तहिँ मध्ये प्रेमदान-'विशेष' 17/316 | ताँर सिद्धिकाले दोंहे ताँर 10/139
तबे दुइ भाइ ताँरे मरिते 10/96 | ताँर आज्ञा मानि' सेवा 10/140 | ताँर स्कन्धे चड़ि' प्रभु 17/19
तबे नित्यानन्द-गोसाञिर 17/16 | ताँर आज्ञा लङ्घि' चल 12/10 | ताँर स्थाने रूप-गोसाञि 10/158
तबे नित्यानन्द-स्वरूपेर 17/12 | ताँर इच्छा, - "प्रभुरसङ्गे 16/16 | ताँरे देखि' प्रभुर हइल 14/63
तबे निस्तारिल प्रभु जागाइ 17/17 | ताँर आज्ञा लजा लिखि 8/81 | ताँरे ना भजिले कभु ना 8/32
तबे पुत्र जनमिल 'विश्वरूप' 13/74 | ताँर उपशाखा यत, असंख्य 11/8 | ताँ-सबार कवित्वे हय 16/101
तबे प्रभु माता-पितार कैल 15/13 | ताँर उपशाखा, -यत 10/48 | ताँ-सबार बोले लिखि 8/72
तबे प्रभु श्रीवासेर गृहे 17/34 | ताँर उपशाखा यत, तार 11/56 | ताँ-सबार सङ्गे यैछे 17/237
तबे 'बल' 'बल' प्रभु बले 17/236 | ताँर कि अद्भुत चैतन्यचरित 8/42 | ताँहा आमा-सङ्गे तोमार हबे 16/17
तबे महाप्रभु तार द्वारेते 17/143 | ताँर कृपा बिना अन्ये 8/82 | ताँहा बइ विश्वे किछु नाहि 13/76
तबे महाप्रभु ताँर हृदे 12/25 | ताँर गर्भे जन्मिला श्रीदास 8/41 | ताँहाते हइल चैतन्येर 10/59
तबे मिश्र विश्वरूपेर देखिया 15/11 | ताँर गुरु-अन्य, एइ 12/16 | ताँहार अनन्त गुण, -करि 10/44
तबे विचारये मने हइया 16/88 | ताँर चरित्रचित्र लोके ना 17/297 | ताँहार अनन्त गुण के 8/60
तबे विप्र लइल श्रीवासेर 17/59 | ताँर पत्नी 'शची'- नाम 13/60 | ताँहार अनुज शाखा-शङ्कर 10/33
तबे विश्वरूप इहाँ पाठाइल 15/21 | ताँर परिकर, ताँर शाखा 10/12 | ताँहार कृपाय हैल पाप 17/59
तबे विष्णुप्रिया-ठाकुराणीर 16/25 | ताँर पुत्र-महाशय श्रीकानु 11/40 | ताँहार चरित्र, शुन 12/19
तबे शची कोले करि' 14/44 | ताँर प्रिय शिष्य इँहो 8/60 | ताँहार प्रसादे शुनेन 8/63
तबे शची देखिल, रामकृष्ण 17/17 | ताँर प्रीतयेर कथा आगे 10/23 | ताँहार भगिनी दमयन्ती प्रभुर 10/25
तबे शिष्यगण सब हासिते 16/98 | ताँर भगनीपति श्रीगोपीनाथ 10/130 | ताँहार साधन-रीति शुनिते 10/103
तबे शुक्लाम्बरेर कैल तण्डुल 17/20 | ताँर भर्त्ता कहिले द्वितीय 16/63 | ताँहार हृदय जानि' कहे 16/93
तबे सप्तप्रहर छिला प्रभु 17/18 | ताँर भुक्त-शेष किछु 13/50 | ताते आदिलीलार करि 17/313
तबे सब शिष्टलोक करे 17/43 | ताँर मध्ये रूप-सनातन 10/85 | तार उपशाखागणे जगत 9/22
तबे सुस्थ हइबेन तोमार 14/46 | ताँर यत शाखा हइल 12/4 | ताते एइ श्लोके देखि 16/52
282 | श्रीचैतन्यचरितामृत
ताते-दशसहस्र ]
| ताते तार वध नहे | 17/162 | तिन पुत्र शिवानन्देर प्रभुर | 10/62 | तोमार कवित्व येन | 16/100 |
| ता'ते नृत्य, गीत, वाद्य | 17/205 | तिनलक्ष नाम तेंहो | 10/43 | तोमार चरणे आमि कि | 12/45 |
| ताते बसि' आछे सदा | 8/51 | तिन सन्ध्या राधाकुण्डे | 10/101 | तोमार नगरे हय सदा | 17/173 |
| ताते भाल करि' श्लोक | 16/49 | तिन स्कन्धेर कैल शाखार | 12/76 | “तोमार प्रसादे मोर घुचिल | 17/220 |
| तार कोटि अपराध सब | 17/96 | तुमि काजी-हिन्दु-धर्म | 17/174 | “तोमार मुखे कृष्णनाम | 17/217 |
| तार मध्ये छय वत्सर | 13/38 | तुमि कि जानिबे एड् | 16/50 | तोमार वेदेते आछे गोवधेर | 17/158 |
| तार मध्ये छय वत्सर | 13/12 | “तुमि त' ईश्वर वट | 17/270 | तोमारे करिल दण्ड प्रभु | 12/38 |
| तार मध्ये नीलाचले छय | 13/35 | तुमि पाण्डु, पञ्चपाण्डव | 10/132 | तोमा शान्त कराइते रहिनु | 17/146 |
| तार मध्ये श्लोक तुमि | 16/43 | तुमि भाल जान अर्थ | 16/38 | तोमा सबार भर्त्ता हबे | 14/54 |
| तार शिष्य-उपशिष्य, तार | 10/160 | “तुमि महापण्डित हओ | 16/99 | तोमा-सबार शास्त्रकर्त्ता | 17/167 |
| तार स्कन्धे चड़ि' आइला | 14/38 | तुमि माटि खाइते दिले | 14/27 | तोमासम कवि कोथा नाहि | 16/100 |
| तार स्कन्धे चड़ि' नृत्य | 17/100 | “तुमि ये कहिले, पण्डित | 17/169 | “तोमा-सम पृथिवीते कवि | 16/37 |
| तारा गाय, मुजि नाचि | 10/19 | तुमिह यवन हञा केने | 17/197 | ||
| तारे डाकि' कहे प्रभु | 14/57 | तुष्ट हञा प्रभु आइला | 17/98 | ||
| ता'-सबा निषेधि' प्रभु | 16/98 | तृण हैते नीच हञा सदा | 17/26 | ||
| ता-सबार अन्तरे भय प्रभु | 17/132 | तृणादपि सुनीचेन तरोरिव | 17/31 | त्र | |
| ता-सबार विद्यापाठ भेक | 8/6 | तृतीय-चरणे हय पञ्च | 16/74 | त्रयोदशे महाप्रभुर 'जन्म | 17/325 |
| ताहाँ प्रचारिल दुँहे भक्ति | 10/89 | तृतीय परिच्छेदे जन्मेर् | 17/315 | त्रिजगते यत आछे धन | 9/28 |
| ताहा देखि' रहिनु मुञि | 17/191 | तेंह-विश्वेर उपादान | 13/75 | ||
| ताहाइ करिनु एइ ग्रन्थेर | 8/77 | तेंहो अति कृपा करि' | 8/65 | ||
| ताहाके 'तालाक' दिब | 17/222 | तेंहो त' चैतन्य-कृष्ण | 17/315 | द | |
| ताहाते असंख्य फल | 9/38 | तेंहो तोमार साध्य-साधन | 16/13 | दण्ड-कथा कहिब आगे | 10/32 |
| ताहाते आचार्य बड़ हय | 17/66 | तेंहो मूर्ति हञा खेले, जानि | 14/9 | दण्ड पात्रा हैल मोर | 12/41 |
| ताहातेइ ध्वज, वज्र | 14/7 | तेंहो लक्ष्मीरूपा, ताँर सम | 10/15 | दण्ड शुनि' 'विश्वास' हइल | 12/37 |
| ताहाते ऐश्वर्य देखि' फाँफर | 17/112 | तेंहो सिद्धि पाइले ताँर देह | 10/46 | दण्डे तुष्ट प्रभु ताँरे | 10/32 |
| ताहाते चैतन्य-लीला | 8/44 | तेञि क्षमा करि, ना | 17/184 | दर्शन करि कैलुँ चरण | 8/74 |
| ताहाते जन्मिल शाखा | 11/5 | तैछे आमार शास्त्र-केताब | 17/155 | दरिद्र कुड़ाञा खाय | 9/30 |
| ताहार माधुरी-गन्धे लुब्ध | 12/94 | 'तोरे शिक्षा दिते कैलु | 17/183 | दश अलङ्कारे यदि एक | 16/69 |
| ताहारे सम्मान करि' प्रभु | 17/103 | तोमरा जीयाइते नार | 17/165 | दशमेते मूल-स्कन्धेर | 17/323 |
| ताहि मध्ये छयऋतुर | 17/238 | तोमार एइ उपदेशे नष्ट | 12/15 | “दशसहस्र गन्धर्व मोरे देह' | 10/19 |
| तिँह श्याम,-वंशीमुख | 17/302 | “तोमार ऐछन रङ्ग | 13/101 | ||
| तिन दिन रहि' सेइ गोपाल | 17/45 | तोमार कविता-श्लोक | 16/38 | ||
| तिन पादे अनुप्रास देखि | 16/67 | तोमार कवित्व किछु | 16/35 |
पद्य सूची | 283
[ दामोदर-नन्दन
दामोदर पण्डित, ठाकुर 10/126 दुर्विज्ञेय नित्यानन्द-तोमार 17/109 'द्वितीय' शब्द-विधेय 16/60
दामोदर पण्डित-शाखा 10/31 दूर हइते आइला काजी 17/144 'द्वितीय श्रीलक्ष्मी' इहाँ 16/59
दामोदर-स्वरूप, आर गुप्त 13/46 दूर हैते देखि' ताँरे बले 17/284 द्वितीय परिच्छेदे 17/314
दार्थ्य लागि' 'हरेर्नाम'-उक्ति 17/23 देख, कोन् काजी आसि 17/134 द्वितीय-श्रीलक्ष्मीरिव 16/41
दिङ्मात्र लिखि, सम्यक् 10/159 देखि' आनन्दित हञा हासे 9/50
दिग्विजयी कहे मने 16/30 देखि' उपराग हासि' 13/100
दिने दिने पिता-मातार 14/93 देखिते आइसे येवा 13/24 ध
दिव्य दिव्य लोक आसि' 14/80 देखिते देखिते वृक्ष लागिल 17/81
दिव्यमूर्त्ति लोक आसि' 13/83 'देखिनु' 'देखिनु' बलि' 17/232
दिव्य वस्त्र, दिव्य वेश 17/5 देखि' प्रभुर मूर्ति सर्वज्ञ 17/106 धन-धान्ये भरे घर 13/119
दिव्य सामग्री, दिव्य 8/52 देखि' शची धाञा आइला 14/26 धरिबारे गेला पुत्रे, गेला 14/72
दीक्षा-अनन्तरे हैल प्रेमेर 17/9 देखिया प्रभुर दुःख हइल 17/244 घरे यत भाण्ड छिल 14/43
दुँहा देखि' दुहार चित्ते 14/65 देखिया बालक-ठाम 13/115 धर्म-शिक्षा दिल बहु 14/83
दुँहार अन्तर-कथा दुँहे 12/48 देखिया मिश्रेर हइल 14/12 धर्मी, कर्मी, तपोनिष्ठ 17/260
दुइ कीर्त्तनीया रहे 10/147 देखिया सन्तुष्ट हैला शचीर 17/84 धान्यराशि मापे यैछे 12/12
दुइ गोसाञि 'हरि' बले 12/21 देखिया दोँहार चित्ते जन्मिल 14/8
दुइजने खट्मटि लागाय 10/23 देखिया अपूर्व हैला विस्मित 14/47
दुइ प्रकारेते करे 12/47 देउटि धरैन, यबे प्रभु 10/37
दुइ भाइ ताँर मुखे 10/97 देखे, दिव्यलोक आसि' 14/76 न
दुइ भाइ-दुइ शाखा 10/8 देवता पूजिते आइल करि' 14/62
दुइ शब्दालङ्कार, तिन 16/72 देवपूजा-छले कैल दुँहे 14/65
दुइ शाखार उपशाखाय 10/10 देवानन्द-चारि भाइ 11/46 नकड़ि, मुकुन्द, सूर्य, माधव 11/48
दुइ शाखार प्रेमफले सकल 10/88 देशे आगमन पुनः, प्रेमेर 17/9 नकुल ब्रह्मचारी-देहे प्रभुर 10/57
दुइ सहस्र वैष्णवेरे नित्य 10/99 देशेर आइला प्रभु शची 16/22 नगरिया पागल कैल सदा 17/209
दुइ स्थाने प्रभु-सेवा 10/122 देह-सम्बन्ध हैते ग्राम 17/148 नगरिया लोके प्रभु यबे 17/121
दुइ हस्ते वेणु बाजाय 17/14 देहरोग, भवरोग,-दुइ 10/51 “नगरे नगरे आजि करिमु 17/133
दुःख कारो मने नहे 14/61 दैवे एकदिन प्रभु पड़िया 15/28 नगरे नगरे भ्रमे कीर्त्तन 13/32
दुःख पाइ' मने आमि 12/39 दैवे वनमाली घटक शची 15/29 नगरे हिन्दुर धर्म बाड़िल 17/193
दुःखित हइला आचार्य 12/23 दोष-गुण-विचारे एइ 16/102 न जानि,-कि खाञा मत्त 17/208
दु-बाहुते दिव्य शङ्ख 13/112 द्वादश प्रबन्ध, ताते 17/328 नदीया-उदयगिरि 13/98
दुर्लभविश्वास, आर 12/59 द्वादश वत्सर शेष रहिला 13/39 नदीयाते गङ्गावास कैल 13/58
दुर्वा, धान्य, गोरोचन 13/114 द्वादशे 'अद्वैतस्कन्ध 17/324 नन्दन-आचार्य-शाखा जगते 10/39
दुर्वा, धान्य, दिल शीर्षे 13/117 द्वारे कपाट,-ना पाइल 17/60
284 | श्रीचैतन्यचरितामृत
नन्द-नृसिंहानन्द ]
नन्द-वसुदेव पूर्वे 13/59 | नारायण, कृष्णदास, आर 11/46 | निभृत हओ यदि, तबे 17/176
नन्दिनी, आर कामदेव 12/59 | नारायण-पण्डित एक बड़इ 10/36 | निमाइ बोलाइया तारे 17/213
“नमो नारायण, देह' करह 17/288 | नारायणी-चैतन्येर उच्छिष्ट 8/41 | 'निमाञि' नाम छाड़ि' 17/210
नम्र हञा शिरे धरौं 17/334 | नारायणेर चिह्नयुक्त श्रीहस्त 14/16 | निमाञिपण्डित-स्थाने करह 16/12
नरक भुञ्जिते चाहे जीव 10/42 | नारीगण कहे, - “नारिकेल 14/46 | निमाञि-मुखे रहि' बले 16/90
नरक हइते तोमार नाहिक 17/165 | नारी सब 'हरि' बले 14/22 | निरन्तर कैल ताहे 13/10
नरदेह, सिंहमुख, गर्ज्जये 17/179 | ना लह देवता-सज्ज, ना 14/53 | निरन्तर बाल्यलीला करे 11/39
नरहरि दास, चिरञ्जीव 10/78 | नाहि, नाहि, नाहि, - तिन 17/25 | निरन्तर शुने तैं हो 8/63
नर्त्तक गोपाल, रामभद्र 11/53 | नाहि पड़ि अलङ्कार, करियाछि 16/52 | निरवधि ताँर चित्ते 8/70
नर्त्तक, वादक, भाट 13/106 | निज-गुणामृते बाड़ाय 8/64 | निरवधि मत्त रहे, विवश 9/51
नवद्वीपे आरम्भिला 9/8 | निज तृतीय भाइ करि' 10/96 | निर्मल हृदये भक्ति कराइब 17/266
नवद्वीपे पुरुषोत्तम पण्डित 11/33 | निज निज भावे करेन 17/300 | निर्लोभ गङ्गादास, आर 10/151
नवमेते 'भक्तिकल्पवृक्षर 17/322 | निजाचिन्त्यशक्त्ये माली हञा 9/12 | निवृत्ति-मार्गे जीवमात्र 17/156
नाचिते नाचिते आइला 17/225 | “नित्य रात्रे करि आमि 17/42 | निश्चय करिते नारे साध्य 16/10
नाचिते नाचिते गोपाल 12/22 | नित्यानन्द-गोसाञि प्रभुर 17/116 | निस्तारिते आइलाम आमि 17/262
नाचिल चैतन्यप्रभु 10/46 | नित्यानन्द-चन्द्र बिना नाहि 11/37 | नीलाचले एइसब भक्त 10/122
नाचे, करे सङ्कीर्त्तन 13/103 | नित्यानन्द-नामे याँर 11/33 | नीलाचले चलेन पथे 10/55
ना जानि, कि मन्त्रौषधि 17/202 | नित्यानन्द-नामे हय 11/34 | नीलाचले तैंहो एक पत्रिका 12/29
ना जानि' शास्त्रेर मर्म 17/167 | नित्यानन्दप्रभु नृत्य करे 11/18 | नीलाचले प्रभुसङ्गे सब 10/124
ना दिया वा एइ फल 9/37 | नित्यानन्द प्रभुर प्रिय 11/28 | नीलाचले प्रभुसह प्रथम 10/129
'नाम' दिया भक्त कैल 16/19 | नित्यानन्द-प्रियभृत्य 11/31 | नीलाचले प्रभुस्थाने मिलिल 10/139
नाना द्रव्य पात्र भरि' 13/105 | नित्यानन्द बलिते हय 8/23 | नीलाचले रहि' प्रभुर करेन 10/127
नाना-भावोद्गम देहे अद्भुत 12/21 | नित्यानन्दभृत्य-परमानन्द 11/44 | नीलाचले रहे प्रभुर चरण 10/150
नाना मन्त्र पड़ेन आचार्य 12/24 | नित्यानन्द-लीला-वर्णने 8/48 | नीलाम्बर चक्रवर्त्ती कहिल 13/88
नाम-बले विष याँरे ना 10/75 | नित्यानन्द-सङ्गे नृत्य करे 17/227 | नीलाम्बर चक्रवर्त्ती हय 17/149
नाम-मात्र करि, दोष ना 10/6 | नित्यानन्द-हरिदास धरि' 17/245 | नैवेद्य काड़िया खा'न 14/51
नाम लैते प्रेम देन, बहे 8/31 | नित्यानन्द हैला राम 17/318 | नृत्य, गीत, प्रेमभक्ति 13/35
'नाम-सङ्कीर्त्तन कर' 16/15 | नित्यानन्दावेशे कैल मूषल 17/16 | नृसिंह-आवेश देखि' 17/93
नाम सार्थक हय, यदि 9/7 | नित्यानन्दे आज्ञा दिल 11/14 | नृसिंह-आवेशे प्रभु हाते 17/92
नाम-सूत्रे गाँथि' पर 17/32 | नित्यानन्दे दृढ़ विश्वास 11/25 | नृसिंहचैतन्य, मीनकेतन 11/53
नाम हैते हय सर्वजगत् 17/22 | नित्यानन्देर गण यत 11/21 | 'नृसिंहानन्द' नाम प्रभु 10/58
ना माने चैतन्य-माली 12/67 | नित्यानन्दे समर्पिल जाति 11/27 |
नामे स्तुतिवाद शुनि' प्रभुर 17/73 | निभृतनिकुञ्जे बसि' देखे 17/283 |
पद्य सूची | 285
[ पञ्च-प्रतिभार
प पाइया अमृतधुनी, पिये 13/123 पुनः पुनः कहे श्रीवास 17/236
पाइया मानुष जन्म 13/123 पुनः यदि ऐछे करे 17/256
पञ्च अलङ्कारेर एबे शुनह 16/72 पाञा उपराग-छल 13/100 पुनरुक्तवदाभासे, नहे पुनरुक्त 16/76
पञ्चतत्त्व मिलि' यैछे 17/320 पाकिल अनेक फल 17/81 पुनरुक्तवदाभासे शब्दालङ्कार 16/77
पञ्चदशे 'पौगण्डलीला'र 17/326 पाकिल ये प्रेमफल अमृत 9/27 पुनरुक्ति-भये विस्तारिया 14/96
पञ्च दोष एइ श्लोके पञ्च 16/54 पाछे गुप्ते सेइ विप्रे 14/37 पुरुषोत्तम पण्डित, आर 12/63
पञ्चप्रबन्धे पञ्चवयस चरित 17/329 पाछे चतुर्भुज हैला, तिन 17/14 पुरुषोत्तम ब्रह्मचारी, आर 12/62
पञ्चम वर्षे बालक कहे 12/17 पाछे दुर्मत हैल दैवेर 12/8 पुरुषोत्तम, श्रीगालीम 10/112
पञ्चमे 'श्रीनित्यानन्द'-तत्त्व 17/318 पाछे विस्तार करिब 13/7 "पूर्वजन्मे छिला तुमि 17/108
पण्डित-गोसाञि आदि 17/301 पाछे विस्तारिया ताहार 8/45 पूर्वसिद्ध भाव दुँहार 15/29
पण्डित-गोसाञिर शिष्य 8/68 पाछे सम्प्रदाये नृत्य करे 17/137 पूर्वे आमि छिलाम 17/110
पण्डित-गोसाञिर शिष्य 8/59 पातसाह शुनिले तोमार 17/195 पूर्वे नाम छिल याँर 11/42
पण्डित जगदानन्द प्रभुर 10/21 पापक्षय गेल, हैला परम 17/217 पूर्वे महाप्रभु मोरे करेन 12/39
पण्डित, विदग्ध, युवा 14/55 पाप-तमो हैल नाश 13/98 पूर्वे भाल छिल एइ 17/206
पण्डितेर गण सब 12/89 पाषण्डि-प्रधान सेइ दुर्मुख 17/37 पूर्वे याँर घरे छिला 11/43
पडुया पलाया गेल 17/252 पाषण्डी मारिते याय नगरे 17/92 पूर्वे याँर घरे नित्यानन्देर 11/45
'पडुया बालक कैल मोर 16/89 पाषण्डी संहारि' भक्ति 17/53 पूर्वे येन जरासन्ध-आदि 8/8
पडुया सहस्र याहाँ 17/253 पाषण्डी संहारिते मोर एइ 17/53 पूर्वे यैछे छिला तुमि 17/109
पड़िते आइला स्तवे 17/91 पाषण्डी हासिते आइसे 17/35 पैता छिण्डिया शापे प्रचण्ड 17/62
'पतितपावन' नामेर साक्षी 10/120 पिता करि' याँरे बले 10/30 पौगण्ड-लीलाय लीला 15/32
पत्र पड़िया प्रभुर मने 12/33 पिता माता मारि' खाओ 17/154 पौगण्ड-लीलार सूत्र करिये 15/3
पथ छाड़ि' भागे लोक 17/93 पिता-माताय देखाइल 14/6 पौगण्ड वयस-यावत् 13/26
परम आनन्द पाइल वृक्ष 9/47 पितृकुल, मातृकुल 15/14 पौगण्ड-वयसे पड़ेन, पड़ान 13/28
परमतत्त्व, परब्रह्म, परम 17/106 पितृक्रिया विधिमते ईश्वर 15/24 पौगण्ड-वयसे प्रभुर मुख्य 15/3
परमानन्द गुप्त-कृष्णभक्त 11/45 पीताम्बर, माधवाचार्य, दास 11/52 पौर्णमासीर सन्ध्याकाले 13/89
परमानन्द पुरी, आर केशव 9/13 पुड़िल सकल दाड़ि 17/190 प्रक्षालन करि' कृष्णे 17/82
परमानन्दपुरी, आर स्वरूप 10/125 पुण्डरीक विद्यानिधि 10/14 प्रणतिते ह'बे इहार 17/266
परमानन्द महापात्र, ओड्र पुत्र पाञा दम्पति हैला 13/79 प्रतापरुद्र राजा, आर 10/135
परमेश्वरदास-नित्यानन्दैक 11/29 पुत्र-भृत्य-आदि करि' 10/61 प्रतापरुद्रेर स्थाने दिल 12/29
परिपूर्ण भगवान्-सर्वैश्वर्य 17/108 पुत्रमाता-स्नानदिने 13/118 प्रतिग्रह कभु ना करिबे 12/50
पल दुइ-तिन माठा करेन 10/98 पुत्र लागि' आराधिल 13/73 प्रतिग्रह नाहि करे, ना 10/50
पश्चाते पात्ना उड़ाञा 12/12 पुत्रेर प्रभावे यत 13/120 प्रतिभा, कवित्व तोमार 16/85
पश्चिमरे लोक सब मूढ़ 10/89 पुत्रेर लालन-शिक्षा 14/87 प्रतिभार वाक्य तोमार 16/48
286 | श्रीचैतन्यचरितामृत
प्रति-प्रेम ]
प्रति वर्षे प्रभुर गण 10/55 | प्रभु ताँर नाम कैला 10/35 | प्रभुर निन्दाय सबार बुद्धि 17/257
प्रत्यब्दे प्रभुरे देखे 10/128 | प्रभु ताँर पूजा पाञा 14/68 | प्रभुर नृत्य देखि' नृत्य 17/101
प्रथम-चरणे पञ्च 'त' 16/74 | प्रभु ताँरे नमस्करि' 17/269 | प्रभुर पड़ुया दुइ 10/72
प्रथम परिच्छेदे कैलुँ 17/313 | प्रभु तारे कराइल निजरूप 17/231 | प्रभुर भोगसामग्री ये करे 10/25
प्रथमेइ नित्यानन्देर याँर 10/34 | प्रभु तारे प्रेम दिल 17/114 | प्रभुर मध्य-शेष-लीला 13/16
प्रथमे त' आचार्येरे 12/8 | प्रभु तारे प्रेम दिल 17/102 | प्रभुर लीलामृत तँहो 13/50
प्रथमे त' सूत्ररूपे 13/7 | प्रभु तुष्ट हञा साध्य 16/15 | प्रभुर विरह-सर्प लक्ष्मीरे 16/21
प्रथमेते वृन्दावन-माधुर्य 17/235 | 'प्रभु-पादौपाधान' याँर 10/33 | प्रभुर वृत्तान्त द्विज 17/253
प्रथमे षड्भुज ताँरे 17/13 | प्रभु पुनः प्रश्न कैल 17/107 | प्रभुर शाप-वार्त्ता शुने 17/64
“प्रद्युम्न ब्रह्मचारी' ताँर 10/58 | प्रभुप्रिय गोविन्दानन्द 10/64 | प्रभुर हृदय द्रवे शुनि' 10/49
प्रभु आज्ञा दिल,-“तुमि 16/16 | प्रभु बोले,-“ए लोक 17/177 | प्रभुरे अनेक ग्रन्थ दियाछे 10/65
प्रभु आज्ञा दिल-“याह 17/130 | प्रभु बोलेन,-“आमि 17/145 | प्रभुरे कहेन,-“तोमार ना 12/44
प्रभु-आज्ञाय कर एइ 17/33 | प्रभु बोलेन-तुमि मोर 10/20 | प्रभुरे शान्त करि' आनिल 17/252
प्रभुकण्ठ हैते माला 8/75 | प्रभु यबे काशी आइला 10/153 | प्रभु श्रीवासेरे तोषि' 17/240
प्रभुके मिलिया पाइला 17/12 | प्रभु याँर नित्य लय 10/68 | प्रभु सङ्गे नृत्य करे 17/102
प्रभु कहे,-“आमा' पूज 14/66 | प्रभुर अङ्गे नाचे, डम्बुरु 17/99 | प्रभु-सङ्गे रहे गोविन्द 10/118
प्रभु कहे, आमि 'विश्वम्भर' 9/7 | प्रभुर अतिप्रिय दास 10/69 | प्रभु समर्पिल ताँरे 10/92
प्रभु कहे,-"एक दान 17/221 | प्रभुर अत्यन्त प्रिय 10/29 | प्रभु-स्थाने निवेदिल 17/129
प्रभु कहे,-“एकादशीते 15/9 | प्रभुर अनन्त-लीला 16/18 | प्रभुस्थाने याइते सबे 10/54
प्रभु कहे,-“कह श्लोकेर 16/45 | प्रभुर अभिषेक तबे 17/11 | प्रभु हासि' कैला,-“तुमि 17/110
प्रभु कहे,-'कुलीनग्रामेर 10/82 | प्रभुर आज्ञाते तँहो 10/108 | प्रवृत्ति-मार्गे गोवध 17/157
प्रभु कहे,-"गोदुग्ध 17/153 | प्रभुर आज्ञा पाञा 10/157 | प्रसङ्गे करिल एइ 17/310
प्रभु कहे,-"तोमा-सबाके 14/54 | प्रभुर आज्ञाय नित्यानन्द 10/117 | प्रसन्न हइल सब 13/95
प्रभु कहे,-"देवेर वरे 16/44 | प्रभुर आविर्भाव-पूर्वे यत 13/63 | प्रसन्न हैल दशदिक् 13/97
प्रभु कहे,-"प्रश्न लागि' 17/152 | प्रभुर उपरे यँहो कैल 10/31 | प्रहरेक महाप्रभुर चरित्र 10/100
प्रभु कहे,-“बाउलिया 12/49 | प्रभुर कहिल एइ जन्मलीला 14/3 | प्रह्लाद-समान ताँर गुणेर 10/45
प्रभु कहे,-"माता, मोरे 15/8 | प्रभुर कीर्त्तनीया आदि 10/64 | प्राणवल्लभ-सबार 12/89
प्रभु कहे,-“वेदे कहे 17/159 | प्रभुर कृपाय तँहो 10/158 | प्रातःकाले भक्त सबे 17/246
प्रभु कहे,-"व्याकरण 16/33 | प्रभुर गम्भीर वाक्य 12/54 | प्रातःकाले श्रीवास ताहा 17/40
प्रभु कहेन,-“अतएव 16/51 | प्रभुर गुप्तसेवा कैल 10/92 | प्राते आसि' प्रभुपदे लइल 16/107
प्रभु कहेन,-"कहि, यदि 16/47 | प्रभुर चरण धुँइ बोले 17/219 | प्रेम दिते, कृष्ण दिते 11/59
प्रभु कहेन,-“कहि, शुन 16/53 | प्रभुर चरण धरि' वक्रेश्वर 10/18 | प्रेम-नाम प्रचारिया 13/36
प्रभु कृपा कैल, ताँर 16/107 | प्रभुर चरणे यदि आज्ञा 8/75 | प्रेम-फल-फूल करे 10/79
पद्य सूची | 287
[ प्रेमफल-भर्त्सना
| प्रेमफलास्वादे लोक | 10/88 | बड़ भाग्यवान् तुमि, बड़ | 17/218 | बाहिरे भर्त्सन करे करि' | 14/56 |
| प्रेम-फूल-फले भरि' | 11/6 | बड़ हरिदास, आर छोट | 10/147 | बाहिरे याञा आनिलेन | 14/47 |
| प्रेमभक्ति दिया तेंहो | 17/297 | बड़ हैले नीलाचले गेला | 10/156 | बाहिरे हासिया किछु | 12/33 |
| प्रेमभक्ति लओयाइल | 13/38 | बत्रिंश लक्षण-महापुरुष | 14/14 | बिलाइल यारे तार | 8/21 |
| प्रेमार्णव-मध्ये फिरे | 11/28 | बन्धु-बान्धव आसि' दुँहा | 15/24 | बिलाय चैतन्यमाली, नाहि | 9/27 |
| प्रेमावस्था शिखाइला | 13/39 | बन्धु-बान्धव-स्थाने स्वप्न | 14/92 | बूढ़ा भर्त्ता हवे, आर | 14/58 |
| प्रेमे नृत्य करे, हैल | 17/232 | बलदेव-प्रकाश-परव्योमे | 13/75 | बोलाइला कमलाकान्ते | 12/46 |
| प्रेमे मत्त लोक बिना | 9/52 | 'बल' 'बल' बोले प्रभु | 17/239 | ब्रह्मशाप हैते तार हय | 17/64 |
| प्रेमेर उदये हय प्रेमेर | 8/27 | बलभद्र भट्टाचार्य-भक्ति | 10/146 | ब्रह्मानन्द पुरी, आर | 9/13 |
| प्रेमेर कारण भक्ति करेन | 8/26 | बलराम दास-कृष्णप्रेम | 11/34 | ब्रह्मा-शिव-शेष याँर | 17/331 |
| प्रीत्ये करिते चाहे प्रभुरे | 10/22 | बलिते ना पारे किछु | 17/107 | 'ब्राह्मण-पत्नीर भर्त्ता | 16/65 |
| बसाइला तारे प्रभु आदर | 16/30 | ब्राह्मण मारिते चाहे | 17/255 | ||
| बसियाछेन गङ्गातीरे विद्यार | 16/28 | ब्राह्मण-ब्राह्मणी आनि' | 14/20 | ||
| फ | बसियाछेन सुखे प्रभु | 14/73 | ब्राह्मण-सज्जन-नारी | 13/104 | |
| बहु जन्म करे यदि | 8/16 | ||||
| फल-फूल दिया करि' | 9/44 | बहु यत्न कैला कृष्ण | 17/291 | ||
| फलास्वादे मत्त लोक | 9/48 | बहुशास्त्रे बहुवाक्ये चित्ते | 16/11 | भ | |
| फले-फुले बाड़े,-शाखा | 12/7 | 'बृहत् सहस्रनाम' पड़ | 17/90 | ||
| फाड़िमु तोमार बुक | 17/181 | बाइश घड़ा जल दिने | 10/144 | ||
| फाल्गुनपूर्णिमा-सन्ध्याय | 13/20 | बाउलिया 'विश्वासे' एथा | 12/36 | भङ्गी करि' ज्ञानमार्ग करिल | 17/67 |
| फिरि' गेल विप्र घरे मने | 17/61 | बाटी भरि' दिया बले | 14/24 | भक्तगण लञा कैल विविध | 17/7 |
| बाड़िया पश्चिमदेशे सब | 10/86 | भक्तगण लञा कैला | 13/34 | ||
| बाड़िया व्यापिल सबे | 9/33 | भक्तगणे प्रभु नाम-महिमा | 17/72 | ||
| बारमास ताहा प्रभु करेन | 10/27 | भक्तिकल्पतरुर तेंहो प्रथम | 9/10 | ||
| ब | बालकेर दिव्य ज्योति | 13/116 | भक्ति-कल्पतरु रोपिला | 9/9 | |
| बाल्य, पौगण्ड, कैशोर | 13/18 | भक्तिर महिमा ताहाँ करिल | 17/74 | ||
| बाल्यभाव-छले प्रभु करेन | 13/23 | भक्ते कृपा करेन प्रभु | 10/56 | ||
| बङ्गवाटी-चैतन्यदास | 12/85 | बाल्यभाव प्रकटिया पश्चात् | 14/36 | भक्ष्य, भोज्य, उपहार | 13/115 |
| बड़ शाखा, उपशाखा, तार | 9/23 | बाल्यभावे छत्र-तनु हइल | 14/64 | भगवान् आचार्य | 10/136 |
| बड़शाखा एक,-सार्वभौम | 10/130 | बाल्यलीलाय आगे प्रभुर | 14/6 | भये पलाय पड़ुया, प्रभु | 17/251 |
| बड़ शाखा-गदाधर पण्डित | 10/15 | बाल्यलीला-सूत्र एइ कहिल | 14/95 | भर्त्सन-ताड़न कर | 14/85 |
| बड़ बड़ लोकेर आनिल | 17/41 | बाल्य वयस-यावत् हाते | 13/26 | भर्त्सना-ताड़ने काके | 17/27 |
| बाल्यशास्त्रे लोके तोमार | 16/31 |
288 | श्रीचैतन्यचरितामृत
भवभूति-मिश्र ]
भवभूति, जयदेव आर 16/101
भवानी-पूजार सब सामग्री 17/38
भवानीभर्त्तुः'-शब्द दिले 16/62
भवानी-शब्दे कहे 16/63
भव्यलोक पाठाइया काजी 17/143
भागवताचार्य, आर 12/58
भागवताचार्य, चिरञ्जीव 10/119
भागवताचार्य, ठाकुर 10/113
भागवताचार्य, हरिदास 12/79
भागवती देवानन्द वक्रेश्वर 10/77
भागवते कृष्णलीला वर्णिला 11/55
भागवतेर भक्ति-अर्थ 10/77
भागवते यत भक्तिसिद्धान्तेर 8/37
भागिना, मुइ कुष्ठव्याधिते 17/48
भागिनार क्रोध मामा 17/150
भाग्य मोर, -तुमि-हेन 17/147
भाग्यवन्त दिग्विजयी 16/108
भारतभूमिते हैल मनुष्य 9/41
भारती कहेन, - 'तुमि 17/271
भालमते विचारिले जानि 16/48
“भाल हैल,-विश्वरूप संन्यास 15/14
भासाइल त्रिजगत् कृष्ण 10/161
भासाइल त्रिभुवन प्रेमभक्ति 13/32
भिक्षा कराइया ताँरे कैल 17/269
भितरेर अर्थ केह बुझिते 17/151
भीत देखि' सिंह बले 17/183
भूगर्भ गोसाञि, आर 12/81
भूमिते पड़िला प्रभु 15/16
भूमिते पड़िल, देहे 12/22
भेद जानिवारे करि 12/11
भ्रमिते भ्रमिते प्रभु 17/139
म
मङ्गलचण्डी, विषहरि 17/205
मथुरा-गमने प्रभुर 10/146
मदनगोपाले गेलाङ आज्ञा 8/73
मदमत्त-गति बलदेव 17/118
मद्यभाण्ड-पाशे धरि' 17/40
'मधु आन', 'मधु आन' 17/115
मधुपान, रासोत्सव 17/238
मधुर करिया लीला 13/48
मधुर-वचन, मधुर-चेष्टा 8/55
'मध्य'-'अन्त्य'-नामे 13/14
मध्यमूल परमानन्द पुरी 9/16
मध्ये नाचे आचार्य 17/136
मन दुष्ट हइले नहे 12/51
मनुष्य ठेलि' पथ करे 10/142
मनुष्ये रचिते नारे 8/39
मल्लिकार माला दिया 14/67
महाकृपापात्र प्रभुर जगाइ 10/120
महा-गुणवान् तेंह 13/74
महापुरुषेर चिह्न, लग्ने 13/121
महाप्रभु एइ दुइ दिला 11/14
महाप्रभु ताहा याइ' 17/272
महाप्रभुर प्रिय भृत्य 10/91
महाप्रभुर लीला यत बाहिर 10/97
महाभागवत यदुनाथ 11/35
महाभागवत-श्रेष्ठ दत्त 11/41
महा-महा-शाखा छाइल 9/18
महामादक प्रेमफल पेट 9/49
महा-योगपीठ ताँहा 8/50
महाशाखा-मध्ये तेंहो 12/87
महेश-आवेश हैला 17/100
महेश पण्डित-व्रजेर 11/32
महेश पण्डित, श्रीकर 10/111
महोत्सव कर, सब बोलाह 14/18
मागे वा ना मागे केह 9/29
माटि काड़ि' लञा बले 14/26
“माटि खाइते ज्ञानयोग के 14/30
माटि खाइले रोग हय 14/31
माटि-देह, माटि-भक्ष्य 14/29
माटि-पिण्डे धरि यबे 14/32
माटिर विकार अन्न खाइले 14/31
माटिर विकार घटे पानि 14/32
माताके कहिओ कोटि 15/21
माताके मूर्च्छिता देखि' 14/45
माता-पुत्र दुँहार बाड़िल 15/23
माता बले, -“ताइ दिब 15/9
मातिल सकल लोक-हासे 9/49
मातुलेर अपराध भागिना 17/150
मातृ-आज्ञा पाइया प्रभु 14/77
माधव, वासुदेव घोषेर 11/15
माधवीदेवी-शिखि 10/137
माधुर्य राधा-प्रेमरस 17/276
मालाकार कहे, -शुन 9/31
मालाकारेर इच्छा-जले 11/6
मालि-दत्त जल अद्वैत 12/66
माली मनुष्य आमार नाहि 9/44
मालीर इच्छाय शाखा बहुत 10/86
माली हञा वृक्ष हइलाङ 9/45
मिश्र कहे, -“एइ बड़ 14/79
मिश्र कहे, -“देव, सिद्ध 14/86
मिश्र कहे, -“पुत्र केने 14/89
मिश्र कहे, -“बालगोपाल 14/9
मिश्र कहे शचीस्थाने 13/81
पद्य सूची | 289
[ मिश्र-ये
मिश्र जागिया हइला परम 14/91
“मिश्र, तुमि पुत्रेर तत्त्व 14/85
मिश्र बोले,—'किछु हउक् 14/82
मिश्र-वैष्णव, शान्त 13/120
मिश्रेरे कहये किछु सरोष 14/84
मुकुन्द, काशीनाथ, रुद्र 10/106
मुकुन्ददत्त,-एइ तिन 17/273
मुकुन्द-दत्तेरे कैल दण्ड 17/65
मुकुन्दानन्द चक्रवर्ती, प्रेमी 8/69
मुक्ति-श्रेष्ठ करि' कैनु 12/40
मुखे ना निःसरे वाक्य 16/87
मुख्यमुख्यलीला सूत्रे 13/46
मुख्य मुख्य शाखागणेर 9/20
मुञि बड़ दुःखी, मोरे 17/49
मुञि संहारिमु आजि 17/130
मुरारिके कहे प्रभु 17/77
मुरारिगुप्त-मुखे शुनि' 17/69
मुरारि-चैतन्यदासेर 11/20
मूक कवित्व करे 8/5
मूर्ख, नीच, क्षुद्र मुञि 8/83
मूलशाखा-उपशाखा यतेक 9/31
मूलस्कन्धेर शाखा आर 9/26
मृतपुत्र-मुखे कैल 17/229
मृदङ्ग-करताल-शब्दे 17/207
मृदङ्ग-करताल सङ्कीर्त्तन 17/123
मृदङ्ग भाङ्गिया लोके 17/125
मोर कीर्त्तन माना करिस् 17/182
मोर बुके नख दिया 17/181
मोरे आज्ञा करिला सबे 8/72
'मोरे ना मानिले सब 8/10
मोरे निन्दा करे ये 17/264
म्लेच्छ कहे, -हिन्दुरे 17/198
य
'यत अध्यापक, आर ताँर 17/260
यत उपजिल शाखा के 9/19
यत नर्त्तक, गायन 13/109
यत यत भक्तगण वैसे 17/334
यत यत महान्त कैला 10/5
यथा तथा भक्तगण 17/18
यथार्थ कहिबे, छले ना 17/172
“यदि नैवेद्य ना देह 14/58
यदि पुनः ऐछे नाहि 17/58
यदि वा तार्किक कह 8/14
यदु गाङ्गुलि आर 12/86
यदुनाथ, पुरुषोत्तम, शङ्कर 10/80
यद्यपि एइ श्लोके आछे 16/68
यमुनाकर्षण-लीला 17/117
यवन-ताड़नेओ याँर 10/45
यशोदानन्दन यैछे हैल 14/3
यशोदानन्दन हैला शचीर 17/275
याँर अन्न मागि' काड़ि' 10/38
याँर कृष्णसेवा देखि' 10/107
याँर गृहे महाप्रभुर सदा 10/10
याँर घरे दानकेलि कैल 11/17
याँर घरे देवी-भावे नाचिला 10/13
याँर देहे कृष्ण पूर्वे 10/69
याँर देहे रहे कृष्ण 11/40
याँर नाम लञा प्रभु 10/14
याँर पिता 'नीलाम्बर' 13/60
याँर फुटा-लोहपात्रे प्रभु 10/68
याँर मुखे बाहिराय ऐछे 16/99
याँर सङ्गे नित्यानन्द 11/23
याँर सेवक-रघुनाथ, रूप 8/80
याँर स्मृते सिद्ध हय 8/84
याँ-सबार कीर्त्तने नाचे 10/115
याँ-सबा-स्मरणे पाइ 12/91
याँ-सबा-स्मरणे भवबन्ध 12/90
याँ-सबा-स्मरणे हय 12/91
याँहा ताँहा प्रेमफल 9/36
याँहा ताँहा सर्वलोक करये 13/82
याँहा याय, ताँहा लओयाय 16/8
याँहार अवधि ना पाय 11/60
याँहार कीर्त्तने नाचे चैतन्य 10/40
याँहार दर्शने कृष्णप्रेमभक्ति 11/22
याँहार प्रसादे इय अभीष्ट 11/12
याँहार मिलने प्रभु 131
याँहार श्रवणे नाशे 8/35
याँहार स्मरणे हय सर्वबन्ध 10/29
याँहार हृदये नृत्य करे 11/35
याँहा-सने प्रभु करे नित्य 10/67
याते जानि कृष्णभक्ति 8/36
यादवदास, विजयदास 12/61
यादवाचार्य गोसाञि श्रीरूपेर 8/67
यारे कृपा कैल बाल्ये 10/70
यारे देखे, तारे कहे 13/30
यारे देखे, तारे दिया 11/58
यारे सङ्गे लैया कैल 10/145
या शुनि' दिग्विजयी कैल 16/27
याहाँ ताहाँ प्रभुर निन्दा 17/258
याहार श्रवणे भक्तेर बहे 10/28
याहार श्रवणे शुद्ध कैल 8/42
युगधर्म-कृष्णनाम-प्रेम 17/316
येइ दुइ आसिं कैल 12/81
येइ पेयादा याय, तार 17/190
येइ याँहा ताँहा दान 9/48
येइ येइ अंशो कहे 17/332
ये कहे, से करिब 17/271
290 | श्रीचैतन्यचरितामृत
ये-वर्णिते ]
ये किछु करिल इहाँ 16/109 राढ़े याँर जन्म कृष्णदास 11/36 “लग्न गणि' पूर्वे आमि 14/13
ये कीर्त्तन प्रवर्त्ताइल 17/204 रात्र-दिने प्रेमे नृत्य 13/31 लग्न गणि' हर्षमति 13/121
ये कृष्णैरे कराइला 17/292 रात्रिदिने राधाकृष्णेर मानस 10/100 लघु-गुरु-भाव ताँर ना 10/4
ये तोमा' देखिल, तार 17/97 रात्रि-दिवसे कृष्णविरह 13/40 लज्जित हइला प्रभु जानि' 14/44
ये दण्ड पाइल भाग्यवान् 12/41 रात्रे निद्रा नाहि याइ 17/209 लज्जित हइया प्रभु प्रसाद 17/68
ये दण्ड पाइल श्रीशची 12/42 रात्रे श्रीवासेर द्वारे स्थान 17/38 ललाटे लिखिल ताँर 'रामदास' 17/69
येन काँचा-सोना-द्युति 13/104 रात्रे सङ्कीर्त्तन कैल एक 17/34 लागिल ये प्रेमफल 9/26
येबा अवशिष्ट, आगे 10/47 रात्रे स्वप्न देखे,—एक 14/84 लिखित ग्रन्थेर यदि करि 17/311
ये ये पूर्वे निन्दा कैल 9/53 राधा देखि' कृष्ण ताँरे 17/290 लिखियाछेन इँहा जानि' 8/37
ये ये लैल श्रीअच्युतानन्देर 12/73 राधाभाव अङ्गीकार करियाछे 17/276 लुकाइते नारिल, ताहे 17/285
ये व्याख्या करिल, से 16/90 राधार विशुद्ध-भावेर 17/292 लुकाञा लागिला शिशु 14/25
ये से बड़ हउक्, एबे 14/86 रामदास अभिराम—सख्य 10/116 लुकाइया दुइ प्रभुर याँर 10/39
ये हओ, से हओ तुमि 17/114 रामदास, कविदत्त 10/113 लुकाइला दुइ भुज राधार 17/291
यौतुक पाइल यत 13/109 रामदास-मुख्यशाखा, सख्य 11/16 लोकनाथ पण्डित, आर मुरारि 12/64
यौवन-प्रवेशे अङ्गेर अङ्ग 17/5 रामभद्राचार्य, आर ओढ़ लोक-भय देखि' प्रभुर 17/94
यौवन-लीलार सूत्र करि 17/3 रामाइ-नन्दाइ-दोँहे प्रभुर 10/143 “लोक भय पाय,—मोर 17/95
रामानन्द राय, पट्टनायक 10/133 लोक लज्जा हय, धर्म-कीर्त्ति 12/52
रामानन्द वसु, जगन्नाथ 11/48 लोक सब उद्धारिते तोमार 17/49
रामानन्द-सह मोर देह 10/134 लोके ख्याते यँहो सत्थामार 10/21
र रुक्मिण्यादि-रूप प्रभु 17/241 लोकेर निस्तार-हेतु करेन 13/68
रूप-सनातन-सङ्गे याँर 10/105
रक्त-पीतवर्ण,—नाहि अष्ठि 17/83
रक्षा करे नृसिंहरे 12/23
रघुनाथ बाल्ये कैल प्रभुर 10/155 व
रघुनाथ भट्टाचार्य-मिश्रेर 10/153 ल
रघुनाथ वैद्य, आर 10/126
रघुनाथ वैद्य उपाध्याय 11/22 वंशीवाद्ये गोपीगणेर वने 17/237
'रत्नबाहु' बलि' प्रभु 10/66 लओयाइल सर्वलोके 13/33 वक्रेश्वर पण्डित-प्रभुर बड़ 10/17
राघव-पण्डित-प्रभुर आद्य 10/24 लक्ष्मी चित्ते सुख पाइल 14/63 वनमाली आचार्य देखे 17/119
राघव लइया या'न गुप्त 10/26 लक्ष्मी ताँर अङ्गे दिल 14/67 वनमाली कविचन्द्र, आर 12/63
'राघवेर झालि' बलि' 10/27 'लक्ष्मीरिव' अर्थालङ्कार 16/78 वनमाली पण्डित शाखा 10/73
राजसेवा हय ताँहा 8/52 'लक्ष्मीर समता' अर्थ 16/60 वराह-आवेशे हैला मुरारि 17/19
राढ़देशे जन्मिला ठाकुर 13/61 लक्ष्मीर विवाह कैल शचीर 15/30 वर्णना करेन वैष्णव 13/17
वर्णिते वर्णिते ग्रन्थ हइल 8/46
पद्य सूची | 291
[ वल्लभ-व्रजेन्द्र
वल्लभचैतन्यदास 12/82 | 'विरुद्धमति'-कृत नाम 16/62 | वृन्दावनदास इहा चैतन्य 17/330
वल्लभाचार्येर कन्या देखे 15/28 | विरुद्धमति', 'भग्नक्रम' 16/55 | वृन्दावन-दास कैल 8/44
वसन्तकाले रासलीला 17/282 | 'विरुद्धमति'-शब्द शास्त्रे 16/64 | वृन्दावन-दास कैल 8/35
वसन्त, नवनी होड़, गोपाल 11/50 | विरोधाळङ्कार इहार महा 16/80 | वृन्दावनदास-नारायणीर नन्दन 11/54
वस्तुतः सरस्वती अशुद्ध 16/97 | विवाह करिले हैल नवीन 13/27 | वृन्दावनदास-पदे कोटि 8/40
वस्त्र-गुप्त दोला चड़ि' 13/114 | विविध औद्धत्य करे 16/7 | वृन्दावन-दास मुखे वक्ता 8/39
वाणीनाथ बसु आदि यत 10/81 | विश विश शाखा करि' 9/18 | वृन्दावन-दासेर पादपद्म 8/81
वाणीनाथ ब्रह्मचारी-बड़ 12/82 | विशेषे सेवन करे 13/79 | वृन्दावन-मथुरादि यत 10/87
वात्सल्य, दास्य, सख्य 17/296 | 'विश्वम्भर' नाम इहार 14/19 | वृन्दावनवासी भक्तेर 8/49
वाद्यगीत-कोलाहल, सङ्गीत 17/173 | विश्वम्भरेर कुशल हउक् 14/82 | वृन्दावने कल्पद्रुमे सुवर्ण 8/50
वायुव्याधि-छले कैल प्रेम 17/7 | विश्वरूप शुनि' घर छाड़ि' 15/12 | वृन्दावने कैल श्रीमूर्त्ति-पूजार 10/90
वाराणसी-मध्ये प्रभुर भक्त 10/152 | विश्वासेरे कहे,-"तुमि 12/38 | वृन्दावने दुइ भाइर चरण 10/94
वासुदेव-गीते करे प्रभुर 11/19 | विषयीर अन्न खाइले 12/50 | वृष अन्न उपजाय, ताते 17/153
वासुदेव दत्त-प्रभुर भृत्य 10/41 | विषये निमग्न लोक 13/67 | वेदधर्म करि' करे विष्णुर 8/8
वासुदेव दत्तेर तेंहो कृपार 12/57 | विष्णाइ हाजरा, कृष्णानन्द 11/50 | वेदधर्मातीत हञा 11/9
विचार करिले कवित्व 16/86 | विष्णुदास, नन्दन 11/43 | वेद-पुराणे आछे हेन 17/160
विचार करिले चित्ते पाबे 8/15 | विष्णु-नैवेद्य खाइल 14/39 | वेदमन्त्रे सिद्ध करे ताहार 17/161
विचार-समय ताँर बुद्धि 16/97 | विष्णुपादोत्पत्ति-'अनुमान' 16/83 | वैयाकरण तुमि, नाहि पड़ 16/50
विचारिया कहे काजी 17/168 | विष्णु पुरी, केशव पुरी 9/14 | वैराग्य-लोक-भये प्रभु ना 10/22
विचारिया गुण-दोष 16/51 | विष्णुर नैवेद्य मागि' 10/71 | वैष्णव खायेन फल,-प्रभुर 17/86
विजय आचार्येर घरे 17/246 | विस्तार देखिया किछु 8/47 | वैष्णव, पण्डित, धनी 13/56
विजय पण्डित, आर पण्डित 12/65 | विस्तारि' कहिब आगे 10/60 | वैष्णवाज्ञा-बले करि 8/83
विद्यापति, जयदेव 13/42 | विस्तारिया वर्णिला ताहा 15/31 | वैष्णवेर आज्ञा पाञा चिन्तित 8/73
विद्या-बले पाइल 16/108 | विस्तारि' वर्णियाछेन 13/47 | वैष्णवेर गुणग्राही, ना देखये 8/62
विद्या-बले सबा जिनि' 16/24 | विस्तारि' वर्णियाछेन 17/138 | "व्याकरण पड़ाह, निमाञि 16/31
विद्यार औद्धत्य काहाँ 17/6 | विस्तारि' वर्णिला 17/330 | व्याकरण-मध्ये, जानि 16/32
विद्यार प्रभाव देखि' चमत्कार 16/9 | विस्तारि' वर्णिला इहा 17/142 | व्याकरणे दुइ शिष्य 10/72
'विधेय' आगे कहि' पाछे 16/57 | विस्तारि वर्णिला इहा दास 17/274 | व्याख्या शुनि' सर्वलोकेर 16/5
विनयभङ्गीते कारो दुःख 16/6 | विस्मिता हइया माता 14/75 | व्याघ्र-गाले चड़ मारे 11/20
विप्र कहे,-"एइ यदि 14/88 | विस्मित हञा दिग्विजयी 16/42 | व्याघ्रनख हेमजड़ि 13/113
विप्र कहे,-"श्लोके नाहि 16/46 | वृक्षर द्वितीय स्कन्ध-आचार्य 12/4 | व्याधि-छले जगदीश 14/39
'विभवति' क्रियर वाक्य 16/66 | वृन्दावन-दास इहा 17/138, 16/26, | व्रजवासी वैष्णवेरे आलिङ्गन 10/101
विरह-सर्प-विषे ताँर 16/21 | 15/32 | व्रजेन्द्रनन्दन बिना अन्यत्र 17/278
292 | श्रीचैतन्यचरितामृत
ब्रजेन्द्र-श्लोकेर ]
ब्रजेन्द्रनन्दने कहे 'प्राणनाथ' 17/303 शास्त्रदृष्टे कैल लुप्ततीर्थेर 10/90 शुनिया पड़ुया ताहाँ अर्थवाद 17/72
ब्रजेन्द्रनन्दने माने आपनार 17/277 “शास्त्रेर विचार भाल-मन्द 16/94 शुनिया प्रभुर चित्ते आनन्द 17/235
शिरे धरि वन्दों, नित्य 17/336 शुनिया प्रभुर दण्ड आचार्य 12/37
शिवपत्नीर भर्त्ता'—इहा 16/64 शुनिया प्रभुर मन प्रसन्न 12/48
शिवाइ, नन्दाइ, अवधूत 11/49 शुनिया प्रभुर वाक्य दिग्विजयी 16/87
श शिवानन्द-सम्बन्धे प्रभुर 10/63 शुनिया पाइला आचार्य 12/17
शिवानन्द सेन—प्रभुर भृत्य 10/54 शुनिया ब्राह्मण गर्वे वर्णिते 16/36
शङ्कर, मुकुन्द, ज्ञानदास 11/52 शिवानन्देर उपशाखा—ताँर 10/61 शुनिया मुरारि श्लोक कहिते 17/77
शङ्करारण्य-आचार्य-वृक्षेर 10/106 शिशुगण लये पाड़ा-पड़सीर 14/40 शुनिया ये क्रु
शङ्खचक्रगदापद्म-शार्ङ्ग 17/13 शिशुगणे मिलि' कैल विविध 14/23 शुनिया सकल लोक विस्मित 14/92
शची आसि' कहे,—“केने 14/74 शिशुद्वारे कैल मोरे एत 16/96 शुनिया सन्तुष्ट हैल पिता 15/15
शची कहे,—“आर एक 14/80 'शिशुद्वारे देवी मोरे करिल 16/95 शुनिलुँ फाँकिते तोमार 16/32
शची कहे,—“ना खाइब 15/10 शिशुर शून्यपदे केने नूपूरेर 14/79 शुनि' शची पुत्रे किछु 14/41
शची कहे,—“मुञि देखों 13/83 शिशुसब शची-स्थाने कैल 14/41 शुनि' शची-मिश्रेर दुःखी 15/13
शचीके प्रेमदान, तबे अद्वैत 17/10 शिष्यगण पड़ाइते करिला 16/4 शुनि' शची-मिश्रेर मने 14/20
शची-जगन्नाथे देखि' देन 14/71 शिष्यगण लज्जा पुनः विद्यार 16/24 शुनि' सब म्लेच्छ आसि' 17/192
शची बले,—“याह, पुत्र 14/77 शिष्य, प्रशिष्य, आर उपशिष्य 9/24 शुनि' सब लोक तबे 16/39
शची-मिश्रेर पूजा लञा 13/118 शिष्येते ना बुझे, आमि 16/33 शुनि' स्तब्ध हैल काजी 17/168
शचीर इङ्गिते सम्बन्ध करिल 15/30 शिष्येर प्रतीत हय 13/29 शुद्ध वात्सल्य मिश्रेर, नाहि 14/90
शत दुइ फल प्रभु शीघ्र 17/82 शिष्येर समान मुञि ना 16/103 शूकर चराय डोम, सेइ 10/83
शत शत पड़ुया आसि 16/9 शुकाइया मरे, तबु जल 17/28 शेष अष्टादश वर्ष 13/37
शत शत शिष्यसङ्गे सदा 16/5 शुक्लाम्वर-ब्रह्मचारी बड़ 10/38 शेष-लीला शुनिते सबार 8/71
शत-श्लोकेर एक श्लोक 16/40 शुन, गौरहरि, एइ प्रश्नेर 17/176 शेषे अवतीर्ण हैला 13/62
शब्द शुनिलेइ हय द्वितीय 16/65 शुनि' क्रु शैशव-चापल्य किछु ना 16/103
शब्दालङ्कारे—तिनपदे आछे 16/73 शुनि' क्रोध कैल सब 17/254 श्याम-अङ्ग पीतवस्त्र 17/15
शयने आमार उपर लाफ 17/180 शुनि' चमकित हैल पिता 14/78 श्यामसुन्दर, शिखिपिच्छ 17/279
शाखार उपरे हैल वृक्ष-दुइ 9/21 शुनि' देखि' सर्वलोक 17/187 श्लोक पड़ि' ताँर भाव 14/68
शाखार उपशाखा, तार 12/77 शुनि' प्रभु क्रोधे कैल कृष्णे 17/250 श्लोकेर अर्थ कैल विप्र 16/45
शाखा-श्रेष्ठ ध्रुवानन्द, श्रीधर 12/79 शुनि' प्रभु 'बल' 'बल' 17/234
शाप शुनि' महाप्रभुर हइल 17/63 शुनि प्रभु 'हरि' बलि' उठिला 17/223
“शापिब तोमारे मुञि 17/62 शुनिब तोमार मुखे शास्त्रेर 16/104
शालग्राम सेवा करे 13/86 शुनिया आविष्ट हैला प्रभु 17/91
शास्त्र-आज्ञाय वध कैले 17/157 शुनिया कहिल प्रभु बहुत 16/37
पद्य सूची | 293
[ श्रवण-षोल
श्र
श्रवण-मात्रे कण्ठे कैल १५/५
श्रीईश्वरपुरी-रूपे अङ्कुर ९/११
श्रीकृष्णचैतन्य, अद्वैत १७/३३३
श्रीकृष्णचैतन्य-दया करह ८/१५
श्रीकृष्णचैतन्य नवद्वीपे १३/८
श्रीकृष्णचैतन्यलीला १७/३३१
श्रीगदाधरदास-शाखा १०/५३
श्रीगदाधर पण्डित-उपशाखा १२/७८
श्रीगोपाल-नामे आर १२/१९
श्रीगोपालभट्ट-एक शाखा १०/१०५
'श्रीगोविन्द-देव' नाम ८/५१
श्रीगोविन्द-नाम ताँर १०/१३८
श्रीगौरीदास पण्डिते प्रेमोद्दण्ड ११/२६
श्रीचन्द्रशेखर वैद्य, द्विज १०/११२
श्रीचैतन्य-नित्यानन्द १३/१२४
श्रीचैतन्य-नित्यानन्दे करि' ११/२७
श्रीचैतन्य मालाकार पृथिवीते ९/९
श्रीचैतन्य-माली कैला १७/३२२
श्रीचैतन्येर अति प्रिय १०/७४
श्रीजगदीश पण्डित हय ११/३०
श्रीजीव, गोपालभट्ट ९/४
श्रीजीव पण्डित नित्यानन्द ११/४४
श्रीधरेर लौहपात्रे कैल १७/७०
श्रीनाथ चक्रवर्ती, आर १२/८३
श्रीनाथ पण्डित-प्रभुर १०/१०७
श्रीनाथ मिश्र, शुभानन्द १०/११०
श्रीनित्यानन्द-पद बिना ११/४७
श्रीनित्यानन्द-वृक्षर स्कन्ध ११/५
श्रीनित्यानन्देर तेंहो ११/३६
श्रीनिधि, श्रीगोपीकान्त १०/११०
श्रीनृसिंह-उपासक-प्रद्युम्न १०/३५
श्रीनृसिंह तीर्थ, आर ९/१४
श्रीपति, श्रीनिधि-ताँर १०/९
श्रीपुरुषोत्तमदास-ताँहार ११/३८
श्रीमन्त, गोकुलदास ११/४९
श्रीमाधव घोष-मुख्य ११/१८
श्रीमाध्वाचार्य, कमलाकान्त १०/११९
श्रीमान्पण्डित शाखा १०/३७
श्रीमान् सेन प्रभुर सेवक १०/५२
श्रीमुकुन्द-दत्त शाखा १०/४०
श्रीमुरारि गुप्त-शाखा १०/४९
श्रीयदुनन्दनाचार्य-अद्वैतेर १२/५६
'श्रीयुत लक्ष्मी' अर्थे १६/७७
श्रीरघुनाथदास, आर १७/३३५
श्रीराधार दासीमध्ये याँर १०/१३७
श्रीराधार प्रलाप यैछे १३/४१
श्रीरामदास आर, गदाधर ११/१३
श्रीरामदास, माधव, आर १०/११८
श्रीरूप-रघुनाथ-चरणेर एड् ८/८४
श्रीरूप, सनातन, भट्ट-रघुनाथ ९/४
'श्रीलक्ष्मी'-शब्दे १६/७३
श्रीवत्स पण्डित, ब्रह्मचारी १२/६२
श्रीवल्लभसेन, आर सेन १०/६३
श्रीवास कहेन तबे रास १७/२३९
श्रीवास कहे,-'वंशी १७/२३३
श्रीवास-गृहेते गिया गदा १७/९४
श्रीवास पण्डित आर १०/८
"श्रीवास पण्डितेर स्थाने आछे १७/५७
श्रीवास-पुत्रेरे ताँहा हैल १७/२२८
श्रीवास बलेन,-'ये १७/९६
श्रीवास वर्णन वृन्दावन १७/२३४
श्रीवासादि गदाधरादि यत १७/३३३
श्रीवासादि यत महाप्रभुर १७/३००
श्रीवासे कराइलि तुइ भवानी १७/५२
श्रीवासे कहेन प्रभु करिया १७/९५
श्रीवासेर ब्राह्मणी १३/११०
श्रीवासेर वस्त्र सिये दरजी १७/२३१
श्रीवासेरे दुःख दिते नाना १७/३६
श्रीविजयदास-नाम प्रभुर १०/६५
श्रीवीरभद्र गोसाञि-स्कन्ध ११/८
श्रीशची-जगन्नाथ १३/५४
श्री'-शब्दे, 'लक्ष्मी'-शब्दे १६/७६
श्रीशिखि माहिति, आर १०/१३६
श्रीसदाशिव कविराज-बड़ ११/३८
श्रीस्वरूप-श्रीरूप १७/३३५
श्रीहट्ट-निवासी श्रीउपेन्द्रमिश्र १३/५६
श्रीहरि आचार्य, दास-पुरिया १२/८४
श्रीहरिचरण, आर माधव १२/६४
श्रीहर्ष, रघुमिश्र, पण्डित १२/८५
शृङ्ग-वेत्र-गोपवेश, शिरे ११/२१
ष
षड्वर्ग, अष्टवर्ग, सर्व १३/९०
षष्ठ परिच्छेदे 'अद्वैत १७/३१९
षोड़श वत्सर कैल १०/९३
षोड़शे कहिलुँ 'कैशोर १७/३२७
षोलसाङ्गेर काष्ठ तुलि' ये १०/११६
षोलसाङ्गेर काष्ठ ये तुलि' ११/१६
294 | श्रीचैतन्यचरितामृत
सङ्कीर्त्तन-सुन्दर ]
स
सङ्कीर्त्तन करि' वैसे श्रमयुक्त 17/79
सङ्कीर्त्तन बाद यैछे नहे 17/221
संक्षेपे करिये किछु से 10/123
संक्षेपे कहिये, कहा ना 13/53
संक्षेपे कहिल जन्मलीला 14/4
संक्षेपे कहिल महाप्रभुर 10/163
संक्षेपे कहिलाङ एइ 11/60
संक्षेपे कहिलुँ अति, —ना 17/329
संक्षेपे लिखिये सम्यक् 13/51
सङ्गे चलि' आइसे काजी 17/224
सङ्गे नित्यानन्द, चन्द्रशेखर 17/273
संन्यास करह तुमि' 15/18
संन्यास करिया तीर्थ करिवारे 15/12
संन्यास करिया यबे प्रभु 17/55
संन्यासि-बुद्धये मोरे प्रणत 17/265
संन्यासी-बुद्धये मोरे 8/11
“संसार-सुख तोमार हउक 17/63
स-कलङ्क चन्द्रे आर 13/91
सकल पण्डित जिनि' करे 17/6
सकल भरिया आछे प्रेम 10/161
सकल शाखार सेइ स्कन्ध 9/12
सख्य, दास्य, —दुइ भाव 17/299
सगणे सचेले गया कैल 17/74
सप्तम परिच्छेदे 'पञ्चतत्त्वेर' 17/320
सप्तदशे 'यौवनलीला' कहिलुँ 17/327
सप्त मिश्र ताँर पुत्र—सप्त 13/57
सत्यराज आदि—ताँर 10/48
स्थावर-जङ्गम हैल 13/97
सदा नाम लइबे, यथा 17/30
सदाशिव-पण्डित याँर 10/34
सन्ध्याकाले कर सबे नगर 17/133
सन्ध्याते देउटि सबे ज्वाल 17/134
सन्ध्याय गङ्गास्नान करि' 17/120
“सब देश भ्रष्ट कैल एकला 17/255
सबाके खाओयाल आगे 17/84
सबार अध्यक्ष-प्रभुर मर्म 10/124
सबार प्रेम-ज्योत्स्नाय 13/5
सबार सम्मान-कर्त्ता, करेन 8/56
सबारे कहे श्रीवास हासिया 17/41
सबारे निषेधिल, —“इहार 17/73
सबेइ चैतन्यभृत्य, —चैतन्य 10/81
'सबे घरे याह, आमि 17/214
सबे मिलि' नृत्य करे 17/119
सबे मेलि' करे तबे 17/254
समग्र बलिते नारे 'सहस्र 10/163
समस्त भक्तरे दिल इष्ट 17/70
समासे गौण हैल, शब्दार्थ 16/59
सरस्वती याहा बलाय, सेइ 16/94
सरस्वती रात्रे ताँरे उपदेश 16/106
सर्व अङ्ग-सुनिर्माण 13/116
सर्वज्ञ कहे, —“आमि ताहा 17/112
सर्वज्ञ गोसाञि जानि' सबार 17/259
सर्व त्यजि' कैल प्रभुर 10/91
सर्वत्र करेन कृष्णनामेर अ28
सर्वत्र लओयाइल प्रभु 13/27
सर्वप्राणीर उपकार हय 9/45
सर्वभावे आश्रियाछे चैतन्य 12/57
सर्वभावे सेवे नित्यानन्देर 11/41
सर्वलोक शुनिले मन्त्रेर 17/212
सर्वलोके करिबे एइ धारण 14/19
सर्वलोके मत्त कैला आपन 9/52
सर्व वैष्णवगण हरिध्वनि 8/76
सर्वशाखागणेर यैछे फल 17/323
सर्वशाखा-श्रेष्ठ वीरभद्र 11/56
सर्वशास्त्रे कहे कृष्णभक्तिर 13/65
सर्वशास्त्रे सर्व पण्डित पाय 16/6
सर्वस्व दण्डिया तार जाति 17/128
सर्वाङ्ग बेडिल कीटे, काटे 17/46
सर्वाङ्गे हइल कुष्ठ, बहे 17/45
सर्वेन्द्रिय-तृप्ति हय श्रवणे 16/110
सर्वोत्तम हइलेओ तारे 8/12
सवंशे करेन याँरा चैतन्येर 10/11
सवंशे तोमारे आर यवन 17/185
सहजे यवन-शास्त्रे अदृढ़ 17/171
सहस्र दण्डवत् करे, लय 10/99
सहस्र-मुखे याँर गुण 10/41
सहस्र-वदने सेवा ना 8/53
सहस्र-वदने तँहो 13/45
'सहस्र वदने' यार दिते 10/162
सहस्र सेवक सेवा करे 8/53
'साक्षात्', 'आवेश' आर 10/56
साक्षात् ईश्वर करि' प्रभुरे 16/106
साक्षात् ईश्वर तँहो, —नाहिक 16/13
'साक्षाते' सकल भक्ते देखे 10/57
साध्य-साधन श्रेष्ठ ना हय 16/11
सात सात पुत्र हबे—चिरायु 14/55
सार्द्ध सप्त प्रहर करे 10/102
सालङ्कार हैले अर्थ करे 16/86
सावित्री, गौरी, सरस्वती 13/105
साहजिक प्रीति दुँहार 14/64
सिङ्गाभट्ट, कामाभट्ट 10/149
सिंह-राशि, सिंह-लग्न 13/90
सिन्दूर, हरिद्रा, तैल 13/110
सुखी हइया लोक मोर 9/40
सुन्दर शरीर यैछे भूषणे 16/70
सुन्दरानन्द—नित्यानन्देर शाखा 11/23
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