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श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

DevanagariHindipublished2,549 पृष्ठ

17/335-336 ]
श्रीगुरु-प्रणाम :-
कृपाकी आशा रखकर यह कृष्णदास चैतन्यचरितामृतका गान कर रहा है॥ 335-336॥
श्रीस्वरूप-श्रीरूप-श्रीसनातन।
श्रीरघुनाथदास, आर श्रीजीव-चरण॥ 335॥
अनुभाष्य-‘श्रीस्वरूप’-श्रीदामोदर-स्वरूप; चैःचः मध्यलीला, 10/102-127संख्या और अनुभाष्य द्रष्टव्य है॥ 335॥
शिरॆ धरि वन्दौँ, नित्य करौँ ताँर आश।
चैतन्यचरितामृत कहे कृष्णदास॥ 336॥
इति अनुभाष्ये सप्तदश परिच्छेद।
सतरहवें अध्यायका अनुभाष्य पूर्ण हुआ।
इति श्रीचैतन्यचरितामृते आदिखण्डे यौवनलीलासूत्र-वर्णनं नाम सप्तदशपरिच्छेदः।
श्रीचैतन्यचरितामृत आदिखण्डमें यौवनलीलासूत्र-वर्णन नामक सतरहवाँ अध्याय पूर्ण हुआ।
अनुवाद-श्रीस्वरूप दामोदर गोस्वामी, श्रीरूप गोस्वामी, श्रीसनातन गोस्वामी, श्रीरघुनाथदास गोस्वामी और श्रीजीव गोस्वामीके चरणकमलोंको अपने सिरपर धारण करते हुए, उनकी वन्दना करते हुए और नित्य उनकी
इति आदिलाीला समाप्ता॥
यह आदिलाीला समाप्त हुई॥
सतरहवाँ अध्याय | 269

270 | श्रीचैतन्यचरितामृत

श्लोक सूची
[वर्णक्रमानुसार प्रथम और तृतीय चरण]
अद्वैताऽङ्घ्यब्जभृङ्गांस्तान् 12/1 | ज्ञानतः सुलभा मुक्ति 8/17 | पौगण्ड-लीला चैतन्य 15/4
अचिन्त्याः खलु ये भावा 17/308 | तं श्रीमत्कृष्णचैतन्यदेवं 9/1 | प्रकृतिभ्यः परं यच्च 17/308
अनुवादमनुक्त्वा तु न 16/58 | तदश्मसारं हृदयं 8/25 | प्रसभं नर्त्तते चित्रं 8/1
अमानिना मानदेन 17/31 | तया हि सहितः सर्वान् 15/27 | प्राणिनामुपकाराय यदेवेह 9/43
अम्बुजमम्बुनि जातं 16/82 | तल्लीलावर्णने योग्यः सद्यः 13/1 | प्राणैरर्थैर्धिया वाचा श्रेय 9/42
अश्वमेधं गवालम्भं 17/164 | तस्य श्रीकृष्णचैतन्य 11/4 | प्रेमनाम-प्रदानैश्च गौरो 17/4
अस्त्वेवमङ्ग भजतां 8/19 | तृणादपि सुनीचेन तरोरिव 17/31 | ब्रह्मबन्धुरिति स्माहं 17/78
अहो एषां वरं जन्म 9/46 | त्रिह्रस्व-पृथु-गम्भीरो 14/15 | मयानुमोदितः सोऽसौ 14/69
आविष्कुर्वति वैष्णवीमपि 17/281 | दाता भोक्ता तत्फलानां 9/6 | महत्त्वं गङ्गायाः 16/41
ऊर्ध्वस्कन्धावधूतेन्दोः 11/4 | देवेरेण सुतोत्पत्तिं कलौ 17/164 | मालाकारः स्वयं कृष्ण 9/6
एतावज्जन्मसाफल्यं देहिना 9/42 | द्वितीय-श्रीलक्ष्मीविव 16/41 | मुरभिदि तद्विपरीतं पाद 16/82
ओतं प्रोतमिदं यस्मिन् 13/77 | न गृहं गृहमित्याहुः 15/27 | यवनाः सुमनायन्ते कृष्ण 17/1
कथञ्चन स्मृते यस्मिन् 14/1 | नत्वाखिलान् तेषु मुख्या 11/1 | यस्यां श्रीकृष्णचैतन्यो 13/19
कथञ्चिदाश्रयाद् येषां 10/1 | न विक्रियेताथ यदा 8/25 | यस्यानुकम्पया श्वापि 9/1
कर्मणा मनसा वाचा 9/43 | न स्वाध्यायस्तपस्त्यागो 17/76 | यस्यास्ति भक्तिर्भगवत्य 8/58
कलौ नास्त्येव नास्त्येव 17/21 | न ह्यलब्धास्पदं किञ्चित् 16/58 | रसालङ्कारवत् काव्यं 16/71
कुमनाः सुमनस्त्वं हि 15/1 | ना साधयति मां योगो 17/76 | राजन् पतिर्गुरुरलं भवतां 8/19
कृपासुधा-सरिद्व्यस्य 16/1 | नित्यानन्द-पदाम्भोज 11/1 | राधायाः प्रणयस्य हन्त 17/293
क्वाहं दरिद्रः पापीयान् 17/78 | नीचगैव सदा भाति 16/1 | रासारम्भविधौ निलीय 17/293
गोपीनां पशुपेन्द्रनन्दन 17/281 | नैतच्चित्रं भगवति 13/77 | लक्ष्म्यार्च्चितोऽथ वाग्देव्या 16/3
जीयात् कैशोर-चैतन्यो 16/3 | पञ्चदीर्घः पञ्चसूक्ष्मः 14/15 | लौकिकीमपि तामीश 14/5

वन्दे चैतन्यकृष्णस्य 14/5 | शाखारूपान् भक्तगणान् 10/7 | सुजनस्येव येषां वै 9/46
वन्दे चैतन्यदेवं तं भगवन्तं 8/1 | श्रीचैतन्यपदाम्भोज 10/1 | सुमनोऽर्पणमात्रेण तं 15/1
वन्दे श्रीकृष्णचैतन्य 10/7 | श्रीचैतन्यामरतरोर्द्वितीय 12/3 | सेयं साधनसाहस्रैर्हरि 8/17
वन्दे स्वैराद्भुतेहं तं 17/1 | श्रीमदद्वैतचन्द्रस्य शाखा 12/3 | स्याद्वपुः सुन्दरमपि 16/71
विद्यारम्भमुखा पाणिग्रहणा 15/4 | सङ्कल्पो विदितः साध्यो 14/69 | हरावभक्तस्य कुतो 8/58
विद्या-सौन्दर्य-सद्देश 17/4 | स प्रसीदतु चैतन्यदेवो 13/1 | हरेर्नाम हरेर्नाम हरे 17/21
विस्मृते विपरीतं स्यात् 14/1 | सर्वसद्गुणपूर्णां तां 13/19 | हित्वाऽसारान् सारभृतो 12/1

272 | श्रीचैतन्यचरितामृत

प्रयोजनीय अंशकी पद्य-सूची
[वर्णक्रमानुसार प्रथम और द्वितीय चरण]
अ अतएव दुइगणे दुँहार 11/15 अनन्तदास, कानुपण्डित 12/61
अतएव प्रभु ताँरे बले 13/78 अनन्त नित्यानन्दगण-के 11/57
अङ्के लञा शची ताँरे 14/10 अतएव पुनः कहों 8/13 अनन्त वैकुण्ठ-ब्रह्माण्ड 17/105
अङ्गसेवा गोविन्देर दिलेन 10/141 अतएव बाल्यलीला संक्षेपे 14/96 अनर्गल प्रेम सबार, चेष्टा 11/59
अञ्जलि अञ्जलि भरि' 9/30 अतएव भज, लोक, चैतन्य 8/43 अनायासे पाइल सेइ 12/74
अ-कलङ्क गौरचन्द्र 13/91 अतएव भागवते व्यासेर 17/312 अनायासे भवक्षय, कृष्णेर 8/28
अकिञ्चन प्रभुर प्रिय 10/66 अतएव 'विश्वरूप' नाम 13/76 अनुपम, जीव, राजेन्द्रादि 10/85
अक्रूर बलि' प्रभु याँरे 10/76 अतएव शब्दालङ्कार 16/75 अनुपम वल्लभ, श्रीरूप 10/84
अग्नि उल्का मोर मुखे 17/189 अतएव सब फल देह' 9/39 अन्तरीक्षे देवगण 13/106
अचिन्त्य, अद्भुत कृष्ण 17/306 अतएव 'हरि' 'हरि' बले 13/24 अन्तरे ईश्वर-चेष्टा, बाहिरे 11/10
अचिन्त्य चरित्र प्रभुर 17/304 अतएव हिन्दुमात्र ना करे 17/159 अन्तरे जानिला प्रभु 16/22
अचिरे मिलिबे तारे 17/332 अतएव हैल ताँर 13/25 अन्तरे विस्मित शची 14/30
अच्युतानन्द-अद्वैत 10/150 अतिथि-विप्रेर अन्न खाइल 14/37 अन्तर्धान कैला सङ्गेत 17/282
अच्युतानन्द-प्राय, चैतन्य 12/75 अत्यन्त विरक्त, सदा 11/31 अन्न-जल त्याग कैल 10/98
अच्युतानन्द-बड़ शाखा 12/13 'अद्भुतगुणा'-एइ पुनराय 16/66 अन्यथा ये माने, तार 17/25
अट्ट अट्ट हासे, करे 17/180 अद्भुत चैतन्यलीलाय याहार 17/309 अन्य लोक नाहि जाने 17/87
अतएव अवश्य आमि 17/265 अद्यापि याँहार कृपा-महिमा 11/11 अन्वेषिते आइला ताहाँ 17/283
अतएव आदिखण्डे 13/18 अद्यापिह देख चैतन्य 8/22 अपत्य-विरहे मिश्रेर 13/73
अतएव आपने प्रभु 17/303 अद्वैत आचार्य, आर पण्डित 13/55 अपरश याय गोसाञि 10/142
अतएव आमि आज्ञा 9/36 अद्वैत-आचार्येर स्थाने 13/63 अपराध नाहि, कैले लोकेर 17/97
अतएव गोवध करे बड़ 17/158 अद्वैत-आचार्य-गोसाञि 17/298 अमोघ पण्डित, हस्तिगोपाल 12/86
अतएव गोवध केह ना 17/163 अद्वैत-आचार्य-भार्या 13/111 अयाचित-वृत्ति, किम्बा 17/29
अतएव जरद्गव मारे 17/161 अद्वैत-आचार्य-महाविष्णु 17/319 अलङ्कार नाहि पड़, नाहि 16/92
अतएव तटे रहि' चाकि 12/94 अद्वैत पाइल विश्वरूप 17/10 अलौकिक ऐछे प्रभुर 10/59
अतएव ताँ-सबार वन्दिये 12/92 अध्ययन-लीला प्रभुर दास 15/7 अलौकिक प्रेम ताँर 11/24
अतएव ताँ-सबारे करि' 10/6 अनन्त आचार्य, कविदत्त 12/80 अलौकिक वृक्ष करे 9/32
अतएव दण्ड करि' 12/35 अनन्त चैतनलीला क्षुद्र 13/44 अल्पकाले हैला पञ्जी 15/6
अतएव दिङमात्र इहाँ 15/33 अनन्त चैतन्यभक्त ना 10/121 अल्प दिने द्वादश-फला 14/94

[ अवतीर्ण-आर

अवतीर्ण हैते मने 13/52
अवश्य पाइबे तबे 17/33
अविचार काव्ये अवश्य 16/85
अविचारे देह दोष 14/29
'अविमृष्ट-विधेयांश'-एइ 16/61
'अविमृष्ट-विधेयांश'-दुइ 16/55
अष्ट कन्या क्रमे हैल 13/72
अष्टमास रहिल भिक्षा देन 10/156
अष्टमे चैतन्यलीला-वर्णन' 17/321
अष्टादश वत्सर रहिला 13/13
अष्ठि-वल्कल नाहि 17/85
असंख्य अनन्त गण 11/7
असंख्य अद्वैत-शाखा 12/65
असंख्य भक्तेर कराइला 13/62
असह्य वेदना, दुःखे ज्वलये 17/46
असाररे नामे इँहा नाहि 12/11

आ

आँखि मुदि' काँपि आमि 17/182
आउलाय सकल अङ्ग 8/23
आकाशे उड़िया याङ, पाङ 10/20
आगे अवतारिल ये गुरु 13/53
“आगे केन इहा, माता 14/33
आगे ता' करिब, शुन 9/20
आगे विस्तारिया ताहा 10/104
आगे सम्प्रदाये नृत्य करे 17/136
आचार्य कहे,–“इहाके 12/47
आचार्य-गोसाञि मने 12/53
आचार्य गोसाञि याँरे 10/44
आचार्य गोसाञिर शिष्य 8/70
आचार्य-गोसाञिरे प्रभु करे 17/66
'आचार्यरत्न'-नाम धरे 10/12
आचार्यरत्न, विद्यानिधि 13/55
आचार्य वैष्णवानन्द भक्ति 11/42
आचार्य-व्यवहार सब 12/28
आचार्यरत्न, श्रीनिवास 13/102
आचार्यरत्न, श्रीनिवास 13/108
आचार्यरत्नेर नाम 10/13
आचार्य शेखर ताँरे 17/118
आचार्य-स्थाने मातार 17/71
आचार्येर अभिप्राय 12/54
आचार्येर आज्ञा पाञा 13/111
आचार्येर आर पुत्र 12/27
आचार्येर दुःखे वैष्णव 12/24
आचार्येर मत येइ, सेइ 12/10
आचार्येर लज्जा-धर्म 12/49
आचार्येरे स्थापियाछे करिया 12/34
आजन्म आज्ञाकारी तेंहो 10/74
आजन्म निमग्न नित्यानन्देर 11/39
आजन्म सेविला तेंहो 12/13
आजि आमि क्षमा करि' 17/127
आजि ताँरे निवेदिब, करि' 16/96
आजि दिन भाल,–करिब 14/18
आजि बासा' याह, कालि 16/104
आज्ञा पाञा मिश्र कैल 16/17
आज्ञामाला पाञा आमार 8/77
आटचल्लिश वत्सर 13/8
आत्म-इच्छामृते वृक्ष सिञ्चि 9/38
आत्मपवित्रता-हेतु लिखिलाङ 1/57
आत्म लुकाइते प्रभु 14/33
आत्मवृत्ति करि' करे कुटुम्ब 10/50
आदिलीला-मध्ये प्रभुर 13/15
आदिलीला-सूत्र लिखि 13/51
आधुनिक आमार शास्त्र 17/169
आनन्दे विह्वल मन 13/102
आनन्दित हञा आइल 12/43
आनन्दित हञा सबे 12/26
आनिया नैवेद्य तारा 14/60
आपन-इच्छाय कैल 17/89
आपना शोधिते कहि 11/7
आपनि चन्दन परि' 14/51
आपनि निरभिमानी, अन्ये 17/26
आपने चैतन्यमाली स्कन्ध 9/11
आपने दुइ भाइ हैला 17/229
आपने महाप्रभु गाय याँर 10/18
आमाके प्रणति करे, हय 17/263
आमा देखि' लुकाइला 17/145
आमा सबार पक्षे इहा 14/53
आमा हैते प्रसादपात्र 12/44
आमार महिमा देख, ब्राह्मण 17/42
आमार लिखन येन शुकेर 8/78
आमार हृदय हैते गेला 13/85
आमारे पूजिले पाबे 14/66
आमारेह कभु येइ 12/45
आमि कहि,–'आमार 15/19
आमि त' करिब 15/15
आमि ना लओयाइले 17/261
आमि ना शिखाले 14/87
आमि बालक,–संन्यासेर 15/19
आम्रमहोत्सव प्रभु करे 17/88
आर अर्थालङ्कार आछे 16/78
आर एक दोष आगे 16/61
“आर एक प्रश्न करि 17/172
आर एक विप्र आइल 17/60
आर कोन उपाय नाहि 17/267

274 | श्रीचैतन्यचरितामृत

आर-एइ ]
आर चब्बिंश वत्सर कैल १०/११ इत्यादि पूर्वसङ्गी बड़ १०/१२७ उ
आर दिन एक भिक्षुक १७/१०१ इथि लागि' कृपार्द्र ८/१०
आर दिन प्रभुके कहे १७/६१ इथे तर्क करि' केह १७/३०५
आर दिन शिवभक्त शिव १७/९९ इथे दोष नाहि, आचार्य १२/३४ उच्च करि' गाय गीत १७/२०७
आर दिने ज्योतिष १७/१०३ इदं-शब्दे 'अनुवाद' १६/५६ उच्छिष्ट-गर्त्ते त्यक्त-हाण्डीर १४/७३
आर पुत्र-'स्वरूप' १२/२७ इहँ गौर-कभु द्विज १७/३०२ उच्छिष्ट दिया नारायणीर १७/२३०
आर म्लेच्छ कहे, शुन १७/२०१ इह माटि, सेह माटि १४/२८ उच्छिष्ट-मार्जन आर पाद १०/१५५
आर म्लेच्छ कहे १७/१९४ इहा छाड़ि' कृष्ण यदि १७/२८० "उठह, गोपाल-बल १२/२५
आर यत भक्तगण १०/१२८ इहा येइ शुने तार १७/२२६ उठिल गोपाल प्रभुर स्पर्श १२/२६
आर यत वृन्दावने ८/७१ इहा येइ शुने, शुद्धभक्ति १७/३१० उठिल वैष्णव सब करि १७/२२३
आर यदि कीर्त्तन १७/१२८ इहा विस्तारियाछेन दास १४/९५ उडुम्बर-वृक्ष येन फले ९/२५
“आरे पापि, भक्तद्वेषि १७/५१ इहा शुनि' ता-सबार १४/५९ उद्धत लोक भाङ्गे काजीर १७/१४२
आलिङ्गन करि' ताँरे १०/१३२ इहा शुनि' दिग्विजयी १६/९५ उन्मादेर चेष्टा करे १३/४०
आवेशेते महाप्रभु वंशी १७/२३३ इहा शुनि' महाप्रभु अति १६/९३ उपमालङ्कार गुण, किछु १६/४६
आसि' कहे,-'गेलुँ १७/१८९ इहा शुनि' माताके कहिल १४/७५ उपरि उपरि शाखा ९/१७
आसि' कहे,-'हिन्दुर १७/२०४ इहा हैते हबे दुइ १४/१७ उर्द्धबाहु करि' कहों १७/३२
आ-सिन्धुनदी-तीर १०/८७ इहार मध्ये मालि-पाछे १२/६७
आसिया श्रीरूप-गोसाञिर १०/१५७ इहार विचार नाहि जाने ९/२९
आसि' रूप-सनातनेर १०/९५ इहाते विरोध नाहि, विरोध १६/८१ ऋ
आस्ते-व्यस्ते पिता-माता १५/१७ इहाते सन्तुष्ट हबेन १५/२०
आस्ते व्यस्ते भक्तगण १७/२५१ 'इहाँ विष्णुपादपद्मे गङ्गार १६/८०
आस्वादिया पूर्ण कैल १३/४३ 'इहाँ कृष्ण नहे १७/२८७
आस्वादिल एसब रस १०/६० ऋण शोधिबारे चाहि १२/३२
आस्वादेन रामानन्द-स्वरूप १३/४२
ई
ए
इ ईश्वर-अचिन्त्यशक्त्ये १६/८१
ईश्वरत्वे आचार्येरे करियाछे १२/३१ एइ आज्ञा कैल यदि ९/४७
ईश्वरपुरीर शिष्य-ब्रह्मचारी १०/१३८ एइ आदीलीला कैल १७/२७४
इँहा सबार यैछे हैल १०/१०४ ईश्वरपुरीर सङ्गे तथाइ १७/८ एइ कृपा कर,-येन १७/२२०
इँहा-सबार श्रीचरण १३/१२४ ईश्वर हइया कहाय महा ११/९ एइ ग्रन्थ लेखाय मोरे ८/७८
इच्छा नाहि, तबु बले १७/२०० ईश्वरेर दैन्य करि' करियाछे १२/३५ एइ त' करिबे वैष्णव १४/१७
एइ त' कहिल ग्रन्थारम्भे १३/६
पद्य सूची | 275

[ एइ-एतकाल

एइ त' कहिलाङ आचार्य १२/७६ | एइमत लीला दुँहे १४/७० | एकदिन नैवेद्य-ताम्बुल १५/१६
एइ त' कहिलुँ प्रेमफल ९/५४ | एइमत वैष्णव कारे १७/२९ | एकदिन प्रभु विष्णुमण्डपे १७/११५
एइ त' कैशोर-लीला १६/४ | एइ मत शिशुलीला करे १४/९३ | एकदिन प्रभु सब भक्तगण १७/७९
एइ त' निश्चय करि' आइल १०/९५ | एइमत संख्यातीत चैतन्य १०/१५९ | एक दिन बले किछु १७/४७
एइ त' पौगण्ड-लीलार १५/३१ | एइमत सब शाखा १०/१६ | एकदिन प्रभु श्रीवासे आज्ञा १७/९०
एइ त' प्रस्तावे आछे बहुल १२/५५ | एइ मते काजीरे प्रभु १७/२२६ | एकदिन महाप्रभुर नृत्य १७/२४३
एइ त' संक्षेपे कहिलाङ १२/८८ | एइमते दुँहे करेन धर्मेर १४/९० | एकदिन मातार पदे करिया १५/८
एइ तिन शाखा वृक्षर १०/८४ | एइमते नाना छले ऐश्वर्य १४/३६ | एकदिन मिश्र पुत्रेर चापल्य १४/८३
एइ तिन स्कन्धेर कैलुँ १२/९० | एइमते निज-घरे गेला १६/१०५ | एकदिन वल्लभाचार्य-कन्या १४/६२
एइ दुइ-घरे प्रभु एकादशी १०/७१ | एइ 'मध्यलीला'-नाम १३/३७ | एकदिन विप्र, नाम १७/३७
एइ दुइजनेर सूत्र देखिया १३/१७ | एइ मालाकार खाय एइ ९/५१ | एकदिन शची खइ-सन्देश १४/२४
“एइ देख कुओर भितर १७/२८४ | एइ मालीर-एइ वृक्षर १०/३ | एकदिन शची-देवी पुत्रेरे १४/७२
एइ देख, नखचिह्न आमार १७/१८६ | एइ मासे पुत्र हबे १३/८८ | एक दिन श्रीवासेर मन्दिरे १७/२२७
एइ दृढ़ युक्ति करि' १७/२६८ | एइ लागि' श्लोकेर अर्थ १६/५७ | एक दोषे सब अलङ्कार १६/६९
एइ नव मूल निकसिल ९/१५ | एइ शिक्षा सबाकारे, सबे १२/५३ | एक पड़ुया आइल १७/२४८
एइ नव मूले वृक्ष ९/१६ | एइ शिशु सर्वलोके करिबे १४/१६ | एक पादे नाहि, एइ १६/६७
एइ नव मूले वृक्ष ९/१५ | एइ शिशु अङ्गे देखि १४/१४ | एक फल खाइले रसे १७/८५
एइ पञ्चदोषे श्लोक कैल १६/६८ | “एइ श्लोकेर अर्थ कर” १६/४२ | एकफलेर मूल्य करि' ताहा ९/२८
एइ पञ्चपुत्र तोमार-मोर १०/१३४ | एइ सप्तदश प्रकार 'आदि १७/३२८ | एक ब्राह्मणी आसि' १७/२४३
एइ पापे नवद्वीप हइबे १७/२११ | एइ सब चन्द्रोदये तमः १३/४ | एक-भावे चब्बिश प्रहर १०/१७
एइ पितार वाक्य शुनि' १२/१४ | एइ सब ना माने येबा ८/७ | एक श्लोकेर अर्थ यदि १६/३९
एइमत आचार करे भक्ति १७/३० | एइ सब महाशाखा-चैतन्य १०/७९ | एक श्वेतकुष्ठे यैछे १६/७०
एइमत कीर्त्तन करि' १७/१३९ | एइ सब मोर निन्दा १७/२६१ | एकला उठाञा दिते हय ९/३५
एइ मत चापल्य सब १४/६१ | एइसब लीला करे शचीर १७/८७ | एकला मालाकार आमि ९/३४
एह मत दुँहार कथा १७/१५१ | एइ सर्वशाखा पूर्ण-पक्व ११/५८ | एकला मालाकार आमि ९/३७
एइ मत नाना लीला १५/२२ | एक 'अद्वैत' नाम, आर ९/२१ | एकला वा कत फल ९/३४
एइमत नृत्य हइल चारि १७/१२० | एक आम्रबीज प्रभु अङ्गने १७/८० | एकादशे 'नित्यानन्दशाखा १७/३२४
एइमत प्रतिदिन फले १७/८६ | एक एक शाखार शक्ति १०/१६२ | एकैक शाखाते उपशाखा ९/१९
एइ मत बङ्गे प्रभु १६/२० | एक 'कृष्णनामे' करे ८/२६ | एकैक-शाखाते लागे १०/१६०
एइ मत बङ्गेर लोकेर १६/१९ | एक कृष्णनामेर फले ८/२८ | एत कहि आचार्य ताँरे १२/४३
एइ मत बारमास कीर्त्तन १७/८८ | एक कृष्णनामेर महा १७/३२१ | एत कहि' सिंह गेल १७/१८६
एइ मत भक्तयति १३/१०३ | एकजनेर पेट भरे-खाइले १७/८३ | एत कहि' सन्ध्याकाले १७/१३५
एइ मत भक्तिवृक्षे ९/२५ | एकदिन गोपीभावे गृहेते १७/२४७ | “एतकाल प्रकटे केह ना १७/१२६

276 | श्रीचैतन्यचरितामृत

एत-कह ]
एत चिन्ति' लैला प्रभु 9/8 | ए-सब ना माने 8/6 | कतदिन रहि' मिश्र गेला 15/23
एत चिन्ति' विवाह करिते 15/26 | एसब पाषण्डी तबे 17/267 | कत दिने कैल प्रभु 16/8
एत जानि' चन्द्रे राहु 13/92 | एसब-प्रसादे लिखि 9/5 | कत दिने मिश्र पुत्रेर हाते 14/94
एत भावि' कहे,—"शुन 16/91 | ए सब लीला वर्णियाछेन 16/109 | कथा कहि' अनुवाद करे 17/312
एत बलि' काजी गेल 17/129 | | कथाय सभा उज्ज्वल करे 8/64
एत बलि' काजी निज 17/187 | | कन्यागण आइला ताँहा 14/48
एत बलि' गेला प्रभु 17/54 | ऐ | कन्यागण-मध्ये प्रभु 14/49
एत बलि' गेला शची 14/25 | | कन्या मागि' विवाह दिते 15/11
एत बलि' जननीर 14/35 | | कन्य़ारे कहे,—"आमा पूज 14/50
एत बलि' दुँहे रहे 13/86 | ऐछे आर शाखा-उपशाखार 12/88 | कपाट दिया कीर्त्तन करे 17/35
एत बलि नमस्करि' गेला 17/289 | ऐछे कर्म ना करिह 12/52 | कभु दक्षिण, कभु गौड़ 13/12
एत बलि' भारती गोसाञि 17/272 | ऐछे कर्म हेथा कैल 17/43 | कभु दुर्गा, लक्ष्मी हय 17/242
एत बलि' श्रीवास करिल 17/98 | ऐछे ग्रन्थ करि' तेंहो 8/40 | कभु पुत्रसङ्गे शची करिला 14/76
एत बलि' सबे ताँरे 17/287 | ऐछे देवेर वरे केह हय 16/44 | कभु प्रभु करेन ताँरे 17/299
एत शुनि' काजीर दुइ 17/219 | ऐछे प्रभु शची-घरे 13/122 | कभु भक्ति ना देन 8/18
एत शुनि' ता सभारे 17/203 | ऐछे यदि पुनः कर 17/185 | कभु भेद देखि, एड़ 17/113
एत शुनि' द्विज गेला 14/91 | ऐछे शची-जगन्नाथ 13/119 | कभु मृदुहस्ते कैल 14/45
एत शुनि' महाप्रभु हासिते 12/46 | | कभु शिशु-सङ्गे स्नान 14/48
एत शुनि' महाप्रभु हासिया 17/216 | | कमलाकर पिप्पलाइ 11/24
एत शुनि' महाप्रभुर हइल 17/50 | ओ | 'कमलाकान्त विश्वास' 12/28
एथा नवद्वीपे लक्ष्मी विरहे 16/20 | | 'कमले गङ्गार जन्म' 16/79
"एथा हैते विश्वरूप मोरे 15/18 | | कराइल जातकर्म 13/108
एबे कहि चैतन्य-लीला 13/6 | | कलानिधि, सुधानिधि 10/133
एबे कहि बाल्यलीला 14/4 | ओरे मूढ़ लोक, शुन 8/33 | कलार पात उपरे थुइल 17/39
एबे तुमि शान्त हैले 17/147 | | कलिक़ाले तैछे शक्ति 17/163
एबे ये उद्यम चालाओ 17/126 | | कलिक़ाले नामरूपे कृष्ण 17/22
एबे ये ना कर माना 17/174 | क | कल्पित आमार शास्त्र 17/170
एबे शुन, फलदाता ये 9/54 | | कवि कहे,—"कह देखि 16/53
एबे शुन मुख्य-शाखार 10/3 | | कवि कहे,—"ये कहिले 16/49
एबे से जानिलाङ, आर 14/34 | | कविचन्द्र, आर कीर्त्तनीया 10/109
ए वृक्षर अङ्ग हय 9/33 | कंसारि, परमानन्द, पद्मनाभ 13/57 | कवित्व-करणे शक्ति 16/102
एसब जीवेरे अवश्य 17/264 | कंसारि सेन, रामसेन 11/51 | कवि रात्रे कैल सरस्वती 16/105
एसब दुर्जनेर कैछे 17/262 | कत दिन प्रभु चित्ते 15/25 | कह तोमार श्लोके किवा 16/47
पद्य सूची | 277

[ कहिते-केशव
कहिते चाहये किछु ना 16/88 | किबा कोलाहल करे 14/81 | कृष्णपूजा करे तुलसी 13/70
कहिते लागिला प्रभु 17/216 | किशोर-वयसे आरम्भिला 13/31 | कृष्णप्रेममय-तनु, उदार 8/59
कहिते लागिला लोके 17/132 | कीर्त्तन करिते प्रभु करिला 17/224 | कृष्णप्रेम-लीलामृते 13/13
कहिते, शुनिते ऐछे 17/240 | कीर्त्तन करिते प्रभु, आइला 17/89 | कृष्णप्रेमा दिते, निते 11/26
काजी कहे,-"आज्ञा 17/152 | कीर्त्तन करिलुँ माना 17/178 | कृष्णप्रेमामृत वर्षे, ये 11/30
काजी कहे,-"इहा 17/11 | कीर्त्तन ना वर्ज्जिया घरे 17/191 | कृष्णप्रेमे पुलकाश्रु-विह्वल 8/22
काजी कहे,-"तुमि 17/146 | कीर्त्तन शुनि' बाहिरे तारा 17/36 | कृष्ण-बलराम दुइ 13/78
काजी कहे,-"तोमार 17/155 | कीर्त्तने नर्त्तन करे बड़ 12/20 | कृष्ण बलिले अपराधीर 8/24
काजी कहे,-"मोर 17/222 | कीर्त्तनेर कैल प्रभु तिन 17/135 | कृष्णभक्ति पाय, ताँरे 11/29
काजी कहे,-"यबे 17/178 | कीर्त्तनेर ध्वनिते काजी 17/141 | कृष्णमिश्र-नाम आर 12/18
काजीगणेर मुखे येंह 10/53 | कुम्भीपाके पचे सेइ 17/307 | कृष्ण यदि छुटे भक्ते 8/18
काजी-पाशे आसि' सब 17/124 | कुलाधिदेवता मोर 8/80 | कृष्णलीला भागवते कहे 8/34
काजी बले,-"सबे 17/175 | कुलीनग्रामवासी सत्यराज 10/80 | कृष्णवश-हेतु एक 17/75
काजीर भये स्वच्छन्द 17/131 | कुलीनग्रामीर भाग्य कहेन 10/83 | कृष्णसङ्ग देह' मोरे 17/21
काजीरे बसाइला प्रभु 17/144 | कृतघ्न हइला, ताँरे 12/68 | कृष्णस्मृति बिना हय 12/51
काजीरे विदाय दिल 17/225 | कृपा करि' कर मोर 17/270 | 'कृष्ण' 'हरि' नाम 13/23
काटिलेह तरु येन किछु 17/28 | कृपा करि' कर यदि 16/35 | कृष्णेर अचिन्त्यशक्ति 17/305
कान्दिया बलेन शिशु 14/27 | कृष्ण अवतरि' करेन 13/69 | कृष्णेर आह्वान करे सघन 13/71
कायमनोवाक्ये करे 8/62 | कृष्ण अवतारिते आचार्य 13/70 | कृष्णेर कीर्त्तन करे नीच 17/211
कार पदचिह्न घरे, ना 14/8 | कृष्ण अवतारिया कैला 17/298 | कृष्णेर ये साधारण सद्गुण 8/57
काला-कृष्णदास बड़ 11/37 | कृष्णकथा, कृष्णपूजा 13/66 | कृष्णेर वियोगे यत प्रेम 13/43
काशीमिश्र, प्रद्युम्नमिश्र 10/131 | कृष्ण-कृपा नाहि तार 8/7 | “के आछिलुँ पूर्वजन्मे 17/104
काशीश्वर गोसाञिर शिष्य 8/66 | 'कृष्ण' 'कृष्ण' 'हरि' 13/92 | के करिते पारे ताँहा 12/93
काष्ठ-पाषाण द्रवे याहार 11/19 | कृष्णदास-नाम शुद्ध 10/145 | "केने चुरि कर, केने 14/42
काठेर पुत्तली येन कुहके 8/79 | कृष्णदास ब्रह्मचारी 12/84 | केने पर-घरे याह 14/42
काँहा तुमि सर्वशास्त्रे 16/34 | कृष्णदास वैद्य, आर 10/109 | केमने ए सब अर्थ करिले 16/92
काहाँ आमि सबे शिशु 16/34 | 'कृष्णनाम' करे अपराधेर 8/24 | केमने ए सर्वलोकेर 13/68
काहाके वा स्तुति करे 14/81 | कृष्णनाम-बीज ताहे ना 8/30 | केबा आसे केबा याय 13/107
कि-कारणे लीला,-इहा 15/22 | कृष्णनाम-सह यैछे प्रभुर 17/325 | के वर्णिते पारे, ताहा 13/44
किछुमात्र करि' कहि' 12/77 | कृष्णनामे भासाइल 13/30 | केवल ए गण-प्रति 12/71
किन्तु ताँर दैवे किछु 12/32 | कृष्ण देखि' गोपी कहे 17/286 | केवल नीलाचले प्रभुर 10/123
किन्तु सर्वलोक देखि' 13/67 | "कृष्णनाम ना लओ केने 17/249 | 'केवल'-शब्दे पुनरपि 17/24
कि पण्डित, कि तपस्वी 12/72 | कृष्ण नाहि माने, ताते 8/9 | केशव भारती आइला 17/268
278 | श्रीचैतन्यचरितामृत

केशव-गोसाञिदास ]
केशव भारती, आर 13/54
केह करिवारे नारे 10/5
केह कीर्त्तन ना करिह 17/127
केह केह-कृष्णदास 17/198
केह गड़ागड़ि याय, केह 9/50
केह त' आचार्येर आज्ञाय 12/9
केह पाय, केह ना पाय 9/35
केह-हरिदास, सदा बले 17/199
कैशोर-लीलार सूत्र करिल 17/3
कोटिजन्म एइ मते कीड़ाय 17/51
कोटि जन्म हबे तोर 17/52
कौटिल्य-मात्सर्य-हिंसा 8/56
कोन कन्या पलाइल नैवेद्य 14/57
“कोन किछु जाने, किबा 14/59
कोन पाके सेइ पत्री 12/30
कोन वाञ्छा पूरण लागि' 13/52
कोन् बले कर तुमि 17/154
कोन् वा मानुष हय 17/256
क्रन्दनेर छले बलाइल 14/22
क्रमे आमि कहि, शुन, 16/॥54
क्रु
क्रु
क्रोधावेशे प्रभु तारे कैल 17/67
क्रोधावेशे बले तारे तर्ज्जन 17/50
क्रोधे कन्यागण कहे, 14/52
क्रोधे सन्ध्याकाले काजी एक 17/125
क्ष
क्षुधा लागे यबे, तबे 14/34
ख
खइ-सन्देश-अन्न, यतेक 14/28
खण्डवासी मुकुन्ददास, 10/78
खण्डिबे संसार-दुःख 8/43
खण्डिल ताहार चित्ते सब 17/65
खण्डिलेक दुःख-शोक 13/107
खाड़या नैवेद्य तारे इष्टवर 14/60
खाइया हउक् लोक 9/39
खाटे बसि' प्रभु कैल 17/11
खाटे बसि' भक्तगणे दिल 17/242
खोला-बेचा श्रीधर प्रभुर 10/67
ग
गङ्गाजल-पात्र आनि' 17/116
'गङ्गाते कमल जन्मे' 16/79
गङ्गादास पण्डित, गुप्त 13/61
गङ्गादास पण्डित-स्थाने 15/5
गङ्गा-दुर्गा-दासी मोर 14/50
गङ्गाघाटे वृक्षतले रहे 17/47
गङ्गामन्त्री, मामु ठाकुर 12/80
'गङ्गार महत्त्व'-श्लोके 16/56
गङ्गार महत्त्व-साध्य 16/83
गङ्गास्नान कर याइ' 14/74
गङ्गास्नान करि' पूजा 14/49
गङ्गारे वन्दन करि' 16/29
गणिते लागिला सर्वज्ञ 17/104
गणि' ध्याने देखे सर्वज्ञ 17/105
गदाधर, जगदानन्द, शङ्कर 10/125
गदाधर दास गोपीभावे 11/17
गम्भीर चैतन्य-लीला के 14/70
गया हैते आसिया चालाय 17/206
गरुड़ पण्डित लय श्रीनाम 10/75
गार्हस्थ्ये प्रभुर लीला-'आदि' 13/14
गीता-भागवत कहे आचार्य 13/64
गुण्डिचा-मन्दिरे महाप्रभुर 12/20
गुप्ते बोलाइल नीलाम्बर 14/12
गुरुर सम्बन्धे मान्य कैल 10/140
गृहस्थ हइया करि पितृ 15/20
गृहस्थ हइलाम, एबे चाहि 15/25
गृहिणी बिना गृहधर्म ना 15/26
गृहे दुइ जन देखि' 14/7
गो-अङ्गे यत लोम, तत 17/166
गोपगृहे जन्म छिल, गाभीर 17/111
गोप-वेश, त्रिभङ्गिम, मुरली 17/279
गोपाल आचार्य आर विप्र 10/114
गोपाल गोविन्द राम 17/122
गोपिका-भावेरे एइ 17/278
गोपिकार भाव नाहि याय 17/280
गोपीगण देखि' कृष्णेर 17/285
'गोपी' 'गोपी' नाम लय 17/247
'गोपी' 'गोपी' नाम शुनि' 17/248
'गोपी' 'गोपी' बलिले 17/249
गोपीनाथ सिंह-एक चैतन्येर 10/76
गोपी-भाव याते प्रभु 17/277
गोवर्धने त्यजिब देह भृगुपात 10/94
गोविन्द, माधव, वासुदेव 10/115
गोविन्द, श्रीरङ्ग, मुकुन्द 11/51
गोविन्देर आज्ञाय सेवा 10/144
गोविन्देर प्रियसेवक ताँर 8/66
गोविन्देर सङ्गे सेवा करे 10/143
गोविन्देरे आज्ञा दिल, - 'इँहा 12/36
गोसाञिदास आनि' माला 8/76
पद्य सूची | 279

[ गोसाञिदास-चौद्दशत

गोसाञिदास पूजारी करे8/74चक्रवर्त्ती शिवानन्द सदा12/87चैतन्य-नित्यानन्दे नाहि8/31
गौड़देश-भक्तेर कैल संक्षेप10/121चतुर्थ-चरणे चारि 'भ'16/75चैतन्य-पार्षद-श्रीआचार्य10/30
गौड़े पूर्वे भृत्य प्रभुर प्रिय10/149चतुर्थे कहिलुँ जन्मेर् 'मूल'17/317चैतन्यभक्ति-मण्डपे11/10
गौरकथा बिना ताँर8/68चतुर्द्दशे 'बाल्यलीला'र17/326चैतन्य-मङ्गल' यँहो11/54
गौरचन्द्र-बले लोक प्रश्रय17/140चतुर्भुज मूर्त्ति करि'17/286चैतन्यमङ्गल सुने यदि8/38
गौरचन्द्र बिना नाहि10/11चतुर्विध भक्त-भाव करे17/275चैतन्यमङ्गले' कैल विस्तारित15/7
गौरप्रभु दयामय, ताँरे13/122चन्द्रशेखर-गृहे कैल10/154'चैतन्यमङ्गले' सर्वलोके15/33
गौरलीलामृत-सिन्धु-अपार12/93चन्द्रशेखर वैद्य, आर10/152चैतन्य-महिमा याते जानिबे8/33
'गौरहरि' बलि' तारे हासे13/25चब्बिश वत्सर ऐछे13/33चैतन्यमालीर कहि लीला12/92
गौराङ्गेर शेषलीला वर्णिवार8/65चब्बिश वत्सर छिला करिया13/34चैतन्य-मालीर कृपाजलेर12/5
ग्रन्थ-बाहुल्येर भये नारि12/55चब्बिश वत्सर प्रभु कैल13/10चैतन्य-रहित देह-शुष्क12/70
ग्रन्थ-विस्तार-भये छाड़िला13/49चब्बिश वत्सर शेषे करिया13/11चैतन्य-लीलाते व्यास11/55
“ग्राम-सम्बन्धे आमि तोमार17/48चमत्कार हैया लोक13/93चैतन्यलीलाते 'व्यास'-वृन्दावन8/82
ग्राम-सम्बन्धे चक्रवर्त्ती हय17/148चरणेर धूलि सेइ लय17/244चैतन्य-लीलार व्यास8/34
ग्राम-सम्बन्धे हओ तुमि आमा14/52चलिते चरणे नूपुर बाजे14/78चैतन्य-लीलार व्यास,-दास13/48
ग्रामेर ठाकुर तुमि, सब17/213चुरि करि' द्रव्य खाय14/40चैतन्य-विमुख येइ, तार12/72
चैतन्य-गोसाञि बैसे12/18चैतन्य-विमुख येइ सेइ12/71
“चैतन्य गोसाञिर गुरु12/14चैतन्येर शेष-लीला8/48
चैतन्य-गोसाञिर भक्त रहे11/13चारि दण्ड निद्रा, सेइ10/102
घचैतन्य-गोसाञिर यत10/4चारि भाइर दास-दासी10/9
चैतन्य-गोसाञिर लीला16/110चिकित्सा करेन यारे10/51
घटी एके शत श्लोक16/36चैतन्यचन्द्रेर लीला अनन्त8/46चिह्न देखि' चक्रवर्त्ती14/13
घरे आइला प्रभु बहु16/23चैतन्य-चरण बिनु नाहि10/52चित्र भाव, चित्र गुण17/306
घरे गया सब लोक17/131चैतन्यचरण बिनु नाहि10/36चित्रवर्ण पट्टसाड़ी13/113
घरे घरे सङ्कीर्त्तन करिते17/121चैतन्य-चरिते ताँर8/61चिरकालेर पड़ुया जिने15/6
घरे पाठाइया देय धन13/82चैतन्यचरिते तैँहो अति8/67चोरे लञा गेल प्रभुके14/38
घरे बसि' चिन्तेन ता'17/259चैतन्य-चापल्य देखि' प्रेमे14/71चौद्द भुवनेर गुरु-चैतन्य12/16
चैतन्यदास, रामदास, आर10/62चौद्दशत छय शके शेष13/80
चचैतन्य ना मानिले तैछे8/9चौद्दशत पञ्चान्ने हइल13/9
चैतन्य-निताइर याते8/36चौद्दशत सात शके जन्मेर्13/9
चैतन्य-नित्यानन्द गाय11/11चौद्दशत सात शके13/89
चक्रपाणि आचार्य, आर12/58चैतन्य-नित्यानन्द भज8/13
चैतन्य-नित्यानन्दे ताँर8/61

280 | श्रीचैतन्यचरितामृत

जगत-तबे ]

ज

  • जगत व्यापिया मोर हबे — 9/40
  • जगत व्यापिल तार के — 9/23
  • जगत व्यापिल तार नहिक — 9/24
  • जगत् आनन्दमय — 13/101
  • जगत् भरिया लोक बले — 13/94
  • जगते यतेक जीव, तार — 10/42
  • “जगद्गुरुते तुमि कर ऐछे — 12/15
  • जगदीश पण्डित, आर हिरण्य — 10/70
  • जगन्नाथ आचार्य प्रभुर प्रिय — 10/108
  • जगन्नाथ कर, आर कर — 12/60
  • जगन्नाथ, जनार्द्दन — 13/58
  • जगन्नाथ देखिते आगे — 10/141
  • जगन्नाथ तीर्थ, विप्र — 10/114
  • जगन्नाथ मिश्र कहे, - 'स्वप्न — 13/84
  • जगन्नाथमिश्र-पत्नी शचीर — 13/72
  • जगन्नाथ मिश्रवर-पदवी — 13/59
  • जगन्नाथ-शचीर देहे — 13/80
  • जगाइ मधाइ पर्यन्त — 8/20
  • जड़लोक बुझाइते पुनः — 17/23
  • जन्म-बाल्य-पौगण्ड — 13/22
  • जन्म सार्थक करि' कर — 9/41
  • जन्मिले चैतन्यप्रभु — 13/21
  • जय श्रीमाधवपुरी कृष्णप्रेमपूर — 9/10
  • जरद्गव हञा युवा हय — 17/162
  • जल-गोमय दिया सेइ — 17/44
  • जल पान करिया नाचे — 17/117
  • जलाभावे कृश शाखा — 12/69
  • जाति-अनुरोधे तबु सेइ — 17/170
  • जानि कार घरे धन — 17/199
  • जानि वा ना जानि — 9/5
  • जानि-सरस्वती मोरे — 16/89
  • जाह्नवीते जलकेलि करे — 16/7
  • जितामित्र, काष्ठकाटा — 12/83
  • जियाइते पारे यदि, तबे — 17/160
  • जिह्वा कृष्णनाम करे, ना — 17/202
  • जीवितेइ मृत सेइ, मैले — 12/70
  • जीयात् कैशोर-चैतन्यो — 16/3
  • ज्योतिर्मय देह, गेह — 13/81
  • ज्योतिर्मय-धाम मोर — 13/84
  • ज्योत्स्नावती रात्रि, प्रभु — 16/28

ज्ञ

  • ज्ञान-कर्म निन्दि' करे — 13/64
  • ज्ञान-कर्म-योग-धर्मे नहे — 17/75
  • ज्ञान-योग-तप आदि — 17/24
  • ज्ञान, योग, तपो-धर्म — 13/65

झ

  • झंझावात-प्राय आमि — 16/43

ठ

  • ठेङ्गा लञा उठिला प्रभु — 17/250

ड

  • डाकिनी-शाँखिनी हैते — 13/117

ढ

  • ढक्कावाद्ये नृत्य करे — 11/32

त

  • तत्त्व कहिं कैल शचीर दुःख — 16/23
  • ततक्षणे जन्मिया वृक्ष बाड़िते — 17/80
  • तथा नाना चमत्कार — 14/21
  • तथापि खण्डिबे दुःख — 8/11
  • तथापि दाम्भिक पड़्या नम्र — 17/258
  • तथापि पितार धर्म-पुत्रके — 14/89
  • तथापि भूमिष्ठ नह — 13/87
  • तथा याह, तँहो यदि — 17/57
  • तथा हैते यबे कुलिया — 17/55
  • तपन आचार्य, आर — 10/148
  • तपन-मिश्ररे घरे भिक्षा — 10/154
  • तबु त' ना पाय कृष्णपदे — 8/16
  • तबु यदि प्रेम नहे, नहे — 8/29
  • तबु श्रीवासेर चित्ते ना — 17/228
  • तबे आचार्य-गोसाञिर आनन्द — 17/68
  • तबे आचार्येर घरे कैल — 17/241
  • तबे आमि प्रतिवाक्य कहिल — 17/214

पद्य सूची | 281

[ तबे-ताते
तबे कत दिने कैल पद 14/23 | तबे से इहारे भक्ति 17/263 | ताँर यशः-गुण सर्वजगते 8/54
तबे कत दिने प्रभुर 14/21 | तबे सेइ पापी प्रभुर लइल 17/56 | ताँर लीला वर्णियाछेन 10/47
तबे जानि, अपराध ताहाते 8/30 | तबे सेइ यवनरे आमि 17/196 | ताँर शाखा-उपशाखा 12/56
तबे त' करिल प्रभु 16/25 | तबे से ग्रन्थेर अर्थ 17/311 | ताँर शाखागण किछु 12/78
तबे त' करिला प्रभु 17/8 | तरुसम सहिष्णुता वैष्णव 17/27 | ताँर शाखा मुख्य एक 10/24
तबे त' करिला सब भक्ते 17/230 | तर्कशास्त्रे सिद्ध येइ 8/14 | ताँर शिष्य-उपशिष्य 10/16
तबे त' द्विभुज केवल 17/15 | तर्के इहा नाहि माने 17/307 | ताँर शिष्य-गोविन्द-पूजक 8/69
तबे त' नगरे हइबे 17/192 | तर्ज्ज-गर्ज्ज करे लोक 17/140 | ताँर सङ्गे ताते करे वैष्णवेर 13/66
तबे त' सकल लोकेर 13/69 | तर्ज्जन गर्ज्जन शुनि' ना 17/141 | ताँर सङ्गे तीनजन प्रभु 10/117
तबे तोमार हबे एइ 17/58 | तव व्याख्या शुनि' आमि 16/91 | ताँर सङ्गे नाचि' बुले 17/137
तबे दिग्विजयी व्याख्यार 16/40 | तहिँ मध्ये प्रेमदान-'विशेष' 17/316 | ताँर सिद्धिकाले दोंहे ताँर 10/139
तबे दुइ भाइ ताँरे मरिते 10/96 | ताँर आज्ञा मानि' सेवा 10/140 | ताँर स्कन्धे चड़ि' प्रभु 17/19
तबे नित्यानन्द-गोसाञिर 17/16 | ताँर आज्ञा लङ्घि' चल 12/10 | ताँर स्थाने रूप-गोसाञि 10/158
तबे नित्यानन्द-स्वरूपेर 17/12 | ताँर इच्छा, - "प्रभुरसङ्गे 16/16 | ताँरे देखि' प्रभुर हइल 14/63
तबे निस्तारिल प्रभु जागाइ 17/17 | ताँर आज्ञा लजा लिखि 8/81 | ताँरे ना भजिले कभु ना 8/32
तबे पुत्र जनमिल 'विश्वरूप' 13/74 | ताँर उपशाखा यत, असंख्य 11/8 | ताँ-सबार कवित्वे हय 16/101
तबे प्रभु माता-पितार कैल 15/13 | ताँर उपशाखा, -यत 10/48 | ताँ-सबार बोले लिखि 8/72
तबे प्रभु श्रीवासेर गृहे 17/34 | ताँर उपशाखा यत, तार 11/56 | ताँ-सबार सङ्गे यैछे 17/237
तबे 'बल' 'बल' प्रभु बले 17/236 | ताँर कि अद्भुत चैतन्यचरित 8/42 | ताँहा आमा-सङ्गे तोमार हबे 16/17
तबे महाप्रभु तार द्वारेते 17/143 | ताँर कृपा बिना अन्ये 8/82 | ताँहा बइ विश्वे किछु नाहि 13/76
तबे महाप्रभु ताँर हृदे 12/25 | ताँर गर्भे जन्मिला श्रीदास 8/41 | ताँहाते हइल चैतन्येर 10/59
तबे मिश्र विश्वरूपेर देखिया 15/11 | ताँर गुरु-अन्य, एइ 12/16 | ताँहार अनन्त गुण, -करि 10/44
तबे विचारये मने हइया 16/88 | ताँर चरित्रचित्र लोके ना 17/297 | ताँहार अनन्त गुण के 8/60
तबे विप्र लइल श्रीवासेर 17/59 | ताँर पत्नी 'शची'- नाम 13/60 | ताँहार अनुज शाखा-शङ्कर 10/33
तबे विश्वरूप इहाँ पाठाइल 15/21 | ताँर परिकर, ताँर शाखा 10/12 | ताँहार कृपाय हैल पाप 17/59
तबे विष्णुप्रिया-ठाकुराणीर 16/25 | ताँर पुत्र-महाशय श्रीकानु 11/40 | ताँहार चरित्र, शुन 12/19
तबे शची कोले करि' 14/44 | ताँर प्रिय शिष्य इँहो 8/60 | ताँहार प्रसादे शुनेन 8/63
तबे शची देखिल, रामकृष्ण 17/17 | ताँर प्रीतयेर कथा आगे 10/23 | ताँहार भगिनी दमयन्ती प्रभुर 10/25
तबे शिष्यगण सब हासिते 16/98 | ताँर भगनीपति श्रीगोपीनाथ 10/130 | ताँहार साधन-रीति शुनिते 10/103
तबे शुक्लाम्बरेर कैल तण्डुल 17/20 | ताँर भर्त्ता कहिले द्वितीय 16/63 | ताँहार हृदय जानि' कहे 16/93
तबे सप्तप्रहर छिला प्रभु 17/18 | ताँर भुक्त-शेष किछु 13/50 | ताते आदिलीलार करि 17/313
तबे सब शिष्टलोक करे 17/43 | ताँर मध्ये रूप-सनातन 10/85 | तार उपशाखागणे जगत 9/22
तबे सुस्थ हइबेन तोमार 14/46 | ताँर यत शाखा हइल 12/4 | ताते एइ श्लोके देखि 16/52
282 | श्रीचैतन्यचरितामृत

ताते-दशसहस्र ]

ताते तार वध नहे17/162तिन पुत्र शिवानन्देर प्रभुर10/62तोमार कवित्व येन16/100
ता'ते नृत्य, गीत, वाद्य17/205तिनलक्ष नाम तेंहो10/43तोमार चरणे आमि कि12/45
ताते बसि' आछे सदा8/51तिन सन्ध्या राधाकुण्डे10/101तोमार नगरे हय सदा17/173
ताते भाल करि' श्लोक16/49तिन स्कन्धेर कैल शाखार12/76“तोमार प्रसादे मोर घुचिल17/220
तार कोटि अपराध सब17/96तुमि काजी-हिन्दु-धर्म17/174“तोमार मुखे कृष्णनाम17/217
तार मध्ये छय वत्सर13/38तुमि कि जानिबे एड्16/50तोमार वेदेते आछे गोवधेर17/158
तार मध्ये छय वत्सर13/12“तुमि त' ईश्वर वट17/270तोमारे करिल दण्ड प्रभु12/38
तार मध्ये नीलाचले छय13/35तुमि पाण्डु, पञ्चपाण्डव10/132तोमा शान्त कराइते रहिनु17/146
तार मध्ये श्लोक तुमि16/43तुमि भाल जान अर्थ16/38तोमा सबार भर्त्ता हबे14/54
तार शिष्य-उपशिष्य, तार10/160“तुमि महापण्डित हओ16/99तोमा-सबार शास्त्रकर्त्ता17/167
तार स्कन्धे चड़ि' आइला14/38तुमि माटि खाइते दिले14/27तोमासम कवि कोथा नाहि16/100
तार स्कन्धे चड़ि' नृत्य17/100“तुमि ये कहिले, पण्डित17/169“तोमा-सम पृथिवीते कवि16/37
तारा गाय, मुजि नाचि10/19तुमिह यवन हञा केने17/197
तारे डाकि' कहे प्रभु14/57तुष्ट हञा प्रभु आइला17/98
ता'-सबा निषेधि' प्रभु16/98तृण हैते नीच हञा सदा17/26
ता-सबार अन्तरे भय प्रभु17/132तृणादपि सुनीचेन तरोरिव17/31त्र
ता-सबार विद्यापाठ भेक8/6तृतीय-चरणे हय पञ्च16/74त्रयोदशे महाप्रभुर 'जन्म17/325
ताहाँ प्रचारिल दुँहे भक्ति10/89तृतीय परिच्छेदे जन्मेर्17/315त्रिजगते यत आछे धन9/28
ताहा देखि' रहिनु मुञि17/191तेंह-विश्वेर उपादान13/75
ताहाइ करिनु एइ ग्रन्थेर8/77तेंहो अति कृपा करि'8/65
ताहाके 'तालाक' दिब17/222तेंहो त' चैतन्य-कृष्ण17/315द
ताहाते असंख्य फल9/38तेंहो तोमार साध्य-साधन16/13दण्ड-कथा कहिब आगे10/32
ताहाते आचार्य बड़ हय17/66तेंहो मूर्ति हञा खेले, जानि14/9दण्ड पात्रा हैल मोर12/41
ताहातेइ ध्वज, वज्र14/7तेंहो लक्ष्मीरूपा, ताँर सम10/15दण्ड शुनि' 'विश्वास' हइल12/37
ताहाते ऐश्वर्य देखि' फाँफर17/112तेंहो सिद्धि पाइले ताँर देह10/46दण्डे तुष्ट प्रभु ताँरे10/32
ताहाते चैतन्य-लीला8/44तेञि क्षमा करि, ना17/184दर्शन करि कैलुँ चरण8/74
ताहाते जन्मिल शाखा11/5तैछे आमार शास्त्र-केताब17/155दरिद्र कुड़ाञा खाय9/30
ताहार माधुरी-गन्धे लुब्ध12/94'तोरे शिक्षा दिते कैलु17/183दश अलङ्कारे यदि एक16/69
ताहारे सम्मान करि' प्रभु17/103तोमरा जीयाइते नार17/165दशमेते मूल-स्कन्धेर17/323
ताहि मध्ये छयऋतुर17/238तोमार एइ उपदेशे नष्ट12/15“दशसहस्र गन्धर्व मोरे देह'10/19
तिँह श्याम,-वंशीमुख17/302“तोमार ऐछन रङ्ग13/101
तिन दिन रहि' सेइ गोपाल17/45तोमार कविता-श्लोक16/38
तिन पादे अनुप्रास देखि16/67तोमार कवित्व किछु16/35

पद्य सूची | 283

[ दामोदर-नन्दन
दामोदर पण्डित, ठाकुर 10/126 दुर्विज्ञेय नित्यानन्द-तोमार 17/109 'द्वितीय' शब्द-विधेय 16/60
दामोदर पण्डित-शाखा 10/31 दूर हइते आइला काजी 17/144 'द्वितीय श्रीलक्ष्मी' इहाँ 16/59
दामोदर-स्वरूप, आर गुप्त 13/46 दूर हैते देखि' ताँरे बले 17/284 द्वितीय परिच्छेदे 17/314
दार्थ्य लागि' 'हरेर्नाम'-उक्ति 17/23 देख, कोन् काजी आसि 17/134 द्वितीय-श्रीलक्ष्मीरिव 16/41
दिङ्मात्र लिखि, सम्यक् 10/159 देखि' आनन्दित हञा हासे 9/50
दिग्विजयी कहे मने 16/30 देखि' उपराग हासि' 13/100
दिने दिने पिता-मातार 14/93 देखिते आइसे येवा 13/24 ध
दिव्य दिव्य लोक आसि' 14/80 देखिते देखिते वृक्ष लागिल 17/81
दिव्यमूर्त्ति लोक आसि' 13/83 'देखिनु' 'देखिनु' बलि' 17/232
दिव्य वस्त्र, दिव्य वेश 17/5 देखि' प्रभुर मूर्ति सर्वज्ञ 17/106 धन-धान्ये भरे घर 13/119
दिव्य सामग्री, दिव्य 8/52 देखि' शची धाञा आइला 14/26 धरिबारे गेला पुत्रे, गेला 14/72
दीक्षा-अनन्तरे हैल प्रेमेर 17/9 देखिया प्रभुर दुःख हइल 17/244 घरे यत भाण्ड छिल 14/43
दुँहा देखि' दुहार चित्ते 14/65 देखिया बालक-ठाम 13/115 धर्म-शिक्षा दिल बहु 14/83
दुँहार अन्तर-कथा दुँहे 12/48 देखिया मिश्रेर हइल 14/12 धर्मी, कर्मी, तपोनिष्ठ 17/260
दुइ कीर्त्तनीया रहे 10/147 देखिया सन्तुष्ट हैला शचीर 17/84 धान्यराशि मापे यैछे 12/12
दुइ गोसाञि 'हरि' बले 12/21 देखिया दोँहार चित्ते जन्मिल 14/8
दुइजने खट्मटि लागाय 10/23 देखिया अपूर्व हैला विस्मित 14/47
दुइ प्रकारेते करे 12/47 देउटि धरैन, यबे प्रभु 10/37
दुइ भाइ ताँर मुखे 10/97 देखे, दिव्यलोक आसि' 14/76 न
दुइ भाइ-दुइ शाखा 10/8 देवता पूजिते आइल करि' 14/62
दुइ शब्दालङ्कार, तिन 16/72 देवपूजा-छले कैल दुँहे 14/65
दुइ शाखार उपशाखाय 10/10 देवानन्द-चारि भाइ 11/46 नकड़ि, मुकुन्द, सूर्य, माधव 11/48
दुइ शाखार प्रेमफले सकल 10/88 देशे आगमन पुनः, प्रेमेर 17/9 नकुल ब्रह्मचारी-देहे प्रभुर 10/57
दुइ सहस्र वैष्णवेरे नित्य 10/99 देशेर आइला प्रभु शची 16/22 नगरिया पागल कैल सदा 17/209
दुइ स्थाने प्रभु-सेवा 10/122 देह-सम्बन्ध हैते ग्राम 17/148 नगरिया लोके प्रभु यबे 17/121
दुइ हस्ते वेणु बाजाय 17/14 देहरोग, भवरोग,-दुइ 10/51 “नगरे नगरे आजि करिमु 17/133
दुःख कारो मने नहे 14/61 दैवे एकदिन प्रभु पड़िया 15/28 नगरे नगरे भ्रमे कीर्त्तन 13/32
दुःख पाइ' मने आमि 12/39 दैवे वनमाली घटक शची 15/29 नगरे हिन्दुर धर्म बाड़िल 17/193
दुःखित हइला आचार्य 12/23 दोष-गुण-विचारे एइ 16/102 न जानि,-कि खाञा मत्त 17/208
दु-बाहुते दिव्य शङ्ख 13/112 द्वादश प्रबन्ध, ताते 17/328 नदीया-उदयगिरि 13/98
दुर्लभविश्वास, आर 12/59 द्वादश वत्सर शेष रहिला 13/39 नदीयाते गङ्गावास कैल 13/58
दुर्वा, धान्य, गोरोचन 13/114 द्वादशे 'अद्वैतस्कन्ध 17/324 नन्दन-आचार्य-शाखा जगते 10/39
दुर्वा, धान्य, दिल शीर्षे 13/117 द्वारे कपाट,-ना पाइल 17/60
284 | श्रीचैतन्यचरितामृत

नन्द-नृसिंहानन्द ]
नन्द-वसुदेव पूर्वे 13/59 | नारायण, कृष्णदास, आर 11/46 | निभृत हओ यदि, तबे 17/176
नन्दिनी, आर कामदेव 12/59 | नारायण-पण्डित एक बड़इ 10/36 | निमाइ बोलाइया तारे 17/213
“नमो नारायण, देह' करह 17/288 | नारायणी-चैतन्येर उच्छिष्ट 8/41 | 'निमाञि' नाम छाड़ि' 17/210
नम्र हञा शिरे धरौं 17/334 | नारायणेर चिह्नयुक्त श्रीहस्त 14/16 | निमाञिपण्डित-स्थाने करह 16/12
नरक भुञ्जिते चाहे जीव 10/42 | नारीगण कहे, - “नारिकेल 14/46 | निमाञि-मुखे रहि' बले 16/90
नरक हइते तोमार नाहिक 17/165 | नारी सब 'हरि' बले 14/22 | निरन्तर कैल ताहे 13/10
नरदेह, सिंहमुख, गर्ज्जये 17/179 | ना लह देवता-सज्ज, ना 14/53 | निरन्तर बाल्यलीला करे 11/39
नरहरि दास, चिरञ्जीव 10/78 | नाहि, नाहि, नाहि, - तिन 17/25 | निरन्तर शुने तैं हो 8/63
नर्त्तक गोपाल, रामभद्र 11/53 | नाहि पड़ि अलङ्कार, करियाछि 16/52 | निरवधि ताँर चित्ते 8/70
नर्त्तक, वादक, भाट 13/106 | निज-गुणामृते बाड़ाय 8/64 | निरवधि मत्त रहे, विवश 9/51
नवद्वीपे आरम्भिला 9/8 | निज तृतीय भाइ करि' 10/96 | निर्मल हृदये भक्ति कराइब 17/266
नवद्वीपे पुरुषोत्तम पण्डित 11/33 | निज निज भावे करेन 17/300 | निर्लोभ गङ्गादास, आर 10/151
नवमेते 'भक्तिकल्पवृक्षर 17/322 | निजाचिन्त्यशक्त्ये माली हञा 9/12 | निवृत्ति-मार्गे जीवमात्र 17/156
नाचिते नाचिते आइला 17/225 | “नित्य रात्रे करि आमि 17/42 | निश्चय करिते नारे साध्य 16/10
नाचिते नाचिते गोपाल 12/22 | नित्यानन्द-गोसाञि प्रभुर 17/116 | निस्तारिते आइलाम आमि 17/262
नाचिल चैतन्यप्रभु 10/46 | नित्यानन्द-चन्द्र बिना नाहि 11/37 | नीलाचले एइसब भक्त 10/122
नाचे, करे सङ्कीर्त्तन 13/103 | नित्यानन्द-नामे याँर 11/33 | नीलाचले चलेन पथे 10/55
ना जानि, कि मन्त्रौषधि 17/202 | नित्यानन्द-नामे हय 11/34 | नीलाचले तैंहो एक पत्रिका 12/29
ना जानि' शास्त्रेर मर्म 17/167 | नित्यानन्दप्रभु नृत्य करे 11/18 | नीलाचले प्रभुसङ्गे सब 10/124
ना दिया वा एइ फल 9/37 | नित्यानन्द प्रभुर प्रिय 11/28 | नीलाचले प्रभुसह प्रथम 10/129
'नाम' दिया भक्त कैल 16/19 | नित्यानन्द-प्रियभृत्य 11/31 | नीलाचले प्रभुस्थाने मिलिल 10/139
नाना द्रव्य पात्र भरि' 13/105 | नित्यानन्द बलिते हय 8/23 | नीलाचले रहि' प्रभुर करेन 10/127
नाना-भावोद्गम देहे अद्भुत 12/21 | नित्यानन्दभृत्य-परमानन्द 11/44 | नीलाचले रहे प्रभुर चरण 10/150
नाना मन्त्र पड़ेन आचार्य 12/24 | नित्यानन्द-लीला-वर्णने 8/48 | नीलाम्बर चक्रवर्त्ती कहिल 13/88
नाम-बले विष याँरे ना 10/75 | नित्यानन्द-सङ्गे नृत्य करे 17/227 | नीलाम्बर चक्रवर्त्ती हय 17/149
नाम-मात्र करि, दोष ना 10/6 | नित्यानन्द-हरिदास धरि' 17/245 | नैवेद्य काड़िया खा'न 14/51
नाम लैते प्रेम देन, बहे 8/31 | नित्यानन्द हैला राम 17/318 | नृत्य, गीत, प्रेमभक्ति 13/35
'नाम-सङ्कीर्त्तन कर' 16/15 | नित्यानन्दावेशे कैल मूषल 17/16 | नृसिंह-आवेश देखि' 17/93
नाम सार्थक हय, यदि 9/7 | नित्यानन्दे आज्ञा दिल 11/14 | नृसिंह-आवेशे प्रभु हाते 17/92
नाम-सूत्रे गाँथि' पर 17/32 | नित्यानन्दे दृढ़ विश्वास 11/25 | नृसिंहचैतन्य, मीनकेतन 11/53
नाम हैते हय सर्वजगत् 17/22 | नित्यानन्देर गण यत 11/21 | 'नृसिंहानन्द' नाम प्रभु 10/58
ना माने चैतन्य-माली 12/67 | नित्यानन्दे समर्पिल जाति 11/27 |
नामे स्तुतिवाद शुनि' प्रभुर 17/73 | निभृतनिकुञ्जे बसि' देखे 17/283 |
पद्य सूची | 285

[ पञ्च-प्रतिभार
प पाइया अमृतधुनी, पिये 13/123 पुनः पुनः कहे श्रीवास 17/236
पाइया मानुष जन्म 13/123 पुनः यदि ऐछे करे 17/256
पञ्च अलङ्कारेर एबे शुनह 16/72 पाञा उपराग-छल 13/100 पुनरुक्तवदाभासे, नहे पुनरुक्त 16/76
पञ्चतत्त्व मिलि' यैछे 17/320 पाकिल अनेक फल 17/81 पुनरुक्तवदाभासे शब्दालङ्कार 16/77
पञ्चदशे 'पौगण्डलीला'र 17/326 पाकिल ये प्रेमफल अमृत 9/27 पुनरुक्ति-भये विस्तारिया 14/96
पञ्च दोष एइ श्लोके पञ्च 16/54 पाछे गुप्ते सेइ विप्रे 14/37 पुरुषोत्तम पण्डित, आर 12/63
पञ्चप्रबन्धे पञ्चवयस चरित 17/329 पाछे चतुर्भुज हैला, तिन 17/14 पुरुषोत्तम ब्रह्मचारी, आर 12/62
पञ्चम वर्षे बालक कहे 12/17 पाछे दुर्मत हैल दैवेर 12/8 पुरुषोत्तम, श्रीगालीम 10/112
पञ्चमे 'श्रीनित्यानन्द'-तत्त्व 17/318 पाछे विस्तार करिब 13/7 "पूर्वजन्मे छिला तुमि 17/108
पण्डित-गोसाञि आदि 17/301 पाछे विस्तारिया ताहार 8/45 पूर्वसिद्ध भाव दुँहार 15/29
पण्डित-गोसाञिर शिष्य 8/68 पाछे सम्प्रदाये नृत्य करे 17/137 पूर्वे आमि छिलाम 17/110
पण्डित-गोसाञिर शिष्य 8/59 पातसाह शुनिले तोमार 17/195 पूर्वे नाम छिल याँर 11/42
पण्डित जगदानन्द प्रभुर 10/21 पापक्षय गेल, हैला परम 17/217 पूर्वे महाप्रभु मोरे करेन 12/39
पण्डित, विदग्ध, युवा 14/55 पाप-तमो हैल नाश 13/98 पूर्वे भाल छिल एइ 17/206
पण्डितेर गण सब 12/89 पाषण्डि-प्रधान सेइ दुर्मुख 17/37 पूर्वे याँर घरे छिला 11/43
पडुया पलाया गेल 17/252 पाषण्डी मारिते याय नगरे 17/92 पूर्वे याँर घरे नित्यानन्देर 11/45
'पडुया बालक कैल मोर 16/89 पाषण्डी संहारि' भक्ति 17/53 पूर्वे येन जरासन्ध-आदि 8/8
पडुया सहस्र याहाँ 17/253 पाषण्डी संहारिते मोर एइ 17/53 पूर्वे यैछे छिला तुमि 17/109
पड़िते आइला स्तवे 17/91 पाषण्डी हासिते आइसे 17/35 पैता छिण्डिया शापे प्रचण्ड 17/62
'पतितपावन' नामेर साक्षी 10/120 पिता करि' याँरे बले 10/30 पौगण्ड-लीलाय लीला 15/32
पत्र पड़िया प्रभुर मने 12/33 पिता माता मारि' खाओ 17/154 पौगण्ड-लीलार सूत्र करिये 15/3
पथ छाड़ि' भागे लोक 17/93 पिता-माताय देखाइल 14/6 पौगण्ड वयस-यावत् 13/26
परम आनन्द पाइल वृक्ष 9/47 पितृकुल, मातृकुल 15/14 पौगण्ड-वयसे पड़ेन, पड़ान 13/28
परमतत्त्व, परब्रह्म, परम 17/106 पितृक्रिया विधिमते ईश्वर 15/24 पौगण्ड-वयसे प्रभुर मुख्य 15/3
परमानन्द गुप्त-कृष्णभक्त 11/45 पीताम्बर, माधवाचार्य, दास 11/52 पौर्णमासीर सन्ध्याकाले 13/89
परमानन्द पुरी, आर केशव 9/13 पुड़िल सकल दाड़ि 17/190 प्रक्षालन करि' कृष्णे 17/82
परमानन्दपुरी, आर स्वरूप 10/125 पुण्डरीक विद्यानिधि 10/14 प्रणतिते ह'बे इहार 17/266
परमानन्द महापात्र, ओड्र पुत्र पाञा दम्पति हैला 13/79 प्रतापरुद्र राजा, आर 10/135
परमेश्वरदास-नित्यानन्दैक 11/29 पुत्र-भृत्य-आदि करि' 10/61 प्रतापरुद्रेर स्थाने दिल 12/29
परिपूर्ण भगवान्-सर्वैश्वर्य 17/108 पुत्रमाता-स्नानदिने 13/118 प्रतिग्रह कभु ना करिबे 12/50
पल दुइ-तिन माठा करेन 10/98 पुत्र लागि' आराधिल 13/73 प्रतिग्रह नाहि करे, ना 10/50
पश्चाते पात्ना उड़ाञा 12/12 पुत्रेर प्रभावे यत 13/120 प्रतिभा, कवित्व तोमार 16/85
पश्चिमरे लोक सब मूढ़ 10/89 पुत्रेर लालन-शिक्षा 14/87 प्रतिभार वाक्य तोमार 16/48
286 | श्रीचैतन्यचरितामृत

प्रति-प्रेम ]
प्रति वर्षे प्रभुर गण 10/55 | प्रभु ताँर नाम कैला 10/35 | प्रभुर निन्दाय सबार बुद्धि 17/257
प्रत्यब्दे प्रभुरे देखे 10/128 | प्रभु ताँर पूजा पाञा 14/68 | प्रभुर नृत्य देखि' नृत्य 17/101
प्रथम-चरणे पञ्च 'त' 16/74 | प्रभु ताँरे नमस्करि' 17/269 | प्रभुर पड़ुया दुइ 10/72
प्रथम परिच्छेदे कैलुँ 17/313 | प्रभु तारे कराइल निजरूप 17/231 | प्रभुर भोगसामग्री ये करे 10/25
प्रथमेइ नित्यानन्देर याँर 10/34 | प्रभु तारे प्रेम दिल 17/114 | प्रभुर मध्य-शेष-लीला 13/16
प्रथमे त' आचार्येरे 12/8 | प्रभु तारे प्रेम दिल 17/102 | प्रभुर लीलामृत तँहो 13/50
प्रथमे त' सूत्ररूपे 13/7 | प्रभु तुष्ट हञा साध्य 16/15 | प्रभुर विरह-सर्प लक्ष्मीरे 16/21
प्रथमेते वृन्दावन-माधुर्य 17/235 | 'प्रभु-पादौपाधान' याँर 10/33 | प्रभुर वृत्तान्त द्विज 17/253
प्रथमे षड्भुज ताँरे 17/13 | प्रभु पुनः प्रश्न कैल 17/107 | प्रभुर शाप-वार्त्ता शुने 17/64
“प्रद्युम्न ब्रह्मचारी' ताँर 10/58 | प्रभुप्रिय गोविन्दानन्द 10/64 | प्रभुर हृदय द्रवे शुनि' 10/49
प्रभु आज्ञा दिल,-“तुमि 16/16 | प्रभु बोले,-“ए लोक 17/177 | प्रभुरे अनेक ग्रन्थ दियाछे 10/65
प्रभु आज्ञा दिल-“याह 17/130 | प्रभु बोलेन,-“आमि 17/145 | प्रभुरे कहेन,-“तोमार ना 12/44
प्रभु-आज्ञाय कर एइ 17/33 | प्रभु बोलेन-तुमि मोर 10/20 | प्रभुरे शान्त करि' आनिल 17/252
प्रभुकण्ठ हैते माला 8/75 | प्रभु यबे काशी आइला 10/153 | प्रभु श्रीवासेरे तोषि' 17/240
प्रभुके मिलिया पाइला 17/12 | प्रभु याँर नित्य लय 10/68 | प्रभु सङ्गे नृत्य करे 17/102
प्रभु कहे,-“आमा' पूज 14/66 | प्रभुर अङ्गे नाचे, डम्बुरु 17/99 | प्रभु-सङ्गे रहे गोविन्द 10/118
प्रभु कहे, आमि 'विश्वम्भर' 9/7 | प्रभुर अतिप्रिय दास 10/69 | प्रभु समर्पिल ताँरे 10/92
प्रभु कहे,-"एक दान 17/221 | प्रभुर अत्यन्त प्रिय 10/29 | प्रभु-स्थाने निवेदिल 17/129
प्रभु कहे,-“एकादशीते 15/9 | प्रभुर अनन्त-लीला 16/18 | प्रभुस्थाने याइते सबे 10/54
प्रभु कहे,-“कह श्लोकेर 16/45 | प्रभुर अभिषेक तबे 17/11 | प्रभु हासि' कैला,-“तुमि 17/110
प्रभु कहे,-'कुलीनग्रामेर 10/82 | प्रभुर आज्ञाते तँहो 10/108 | प्रवृत्ति-मार्गे गोवध 17/157
प्रभु कहे,-"गोदुग्ध 17/153 | प्रभुर आज्ञा पाञा 10/157 | प्रसङ्गे करिल एइ 17/310
प्रभु कहे,-"तोमा-सबाके 14/54 | प्रभुर आज्ञाय नित्यानन्द 10/117 | प्रसन्न हइल सब 13/95
प्रभु कहे,-"देवेर वरे 16/44 | प्रभुर आविर्भाव-पूर्वे यत 13/63 | प्रसन्न हैल दशदिक् 13/97
प्रभु कहे,-"प्रश्न लागि' 17/152 | प्रभुर उपरे यँहो कैल 10/31 | प्रहरेक महाप्रभुर चरित्र 10/100
प्रभु कहे,-“बाउलिया 12/49 | प्रभुर कहिल एइ जन्मलीला 14/3 | प्रह्लाद-समान ताँर गुणेर 10/45
प्रभु कहे,-"माता, मोरे 15/8 | प्रभुर कीर्त्तनीया आदि 10/64 | प्राणवल्लभ-सबार 12/89
प्रभु कहे,-“वेदे कहे 17/159 | प्रभुर कृपाय तँहो 10/158 | प्रातःकाले भक्त सबे 17/246
प्रभु कहे,-"व्याकरण 16/33 | प्रभुर गम्भीर वाक्य 12/54 | प्रातःकाले श्रीवास ताहा 17/40
प्रभु कहेन,-“अतएव 16/51 | प्रभुर गुप्तसेवा कैल 10/92 | प्राते आसि' प्रभुपदे लइल 16/107
प्रभु कहेन,-"कहि, यदि 16/47 | प्रभुर चरण धुँइ बोले 17/219 | प्रेम दिते, कृष्ण दिते 11/59
प्रभु कहेन,-“कहि, शुन 16/53 | प्रभुर चरण धरि' वक्रेश्वर 10/18 | प्रेम-नाम प्रचारिया 13/36
प्रभु कृपा कैल, ताँर 16/107 | प्रभुर चरणे यदि आज्ञा 8/75 | प्रेम-फल-फूल करे 10/79
पद्य सूची | 287

[ प्रेमफल-भर्त्सना

प्रेमफलास्वादे लोक10/88बड़ भाग्यवान् तुमि, बड़17/218बाहिरे भर्त्सन करे करि'14/56
प्रेम-फूल-फले भरि'11/6बड़ हरिदास, आर छोट10/147बाहिरे याञा आनिलेन14/47
प्रेमभक्ति दिया तेंहो17/297बड़ हैले नीलाचले गेला10/156बाहिरे हासिया किछु12/33
प्रेमभक्ति लओयाइल13/38बत्रिंश लक्षण-महापुरुष14/14बिलाइल यारे तार8/21
प्रेमार्णव-मध्ये फिरे11/28बन्धु-बान्धव आसि' दुँहा15/24बिलाय चैतन्यमाली, नाहि9/27
प्रेमावस्था शिखाइला13/39बन्धु-बान्धव-स्थाने स्वप्न14/92बूढ़ा भर्त्ता हवे, आर14/58
प्रेमे नृत्य करे, हैल17/232बलदेव-प्रकाश-परव्योमे13/75बोलाइला कमलाकान्ते12/46
प्रेमे मत्त लोक बिना9/52'बल' 'बल' बोले प्रभु17/239ब्रह्मशाप हैते तार हय17/64
प्रेमेर उदये हय प्रेमेर8/27बलभद्र भट्टाचार्य-भक्ति10/146ब्रह्मानन्द पुरी, आर9/13
प्रेमेर कारण भक्ति करेन8/26बलराम दास-कृष्णप्रेम11/34ब्रह्मा-शिव-शेष याँर17/331
प्रीत्ये करिते चाहे प्रभुरे10/22बलिते ना पारे किछु17/107'ब्राह्मण-पत्नीर भर्त्ता16/65
बसाइला तारे प्रभु आदर16/30ब्राह्मण मारिते चाहे17/255
बसियाछेन गङ्गातीरे विद्यार16/28ब्राह्मण-ब्राह्मणी आनि'14/20
फबसियाछेन सुखे प्रभु14/73ब्राह्मण-सज्जन-नारी13/104
बहु जन्म करे यदि8/16
फल-फूल दिया करि'9/44बहु यत्न कैला कृष्ण17/291
फलास्वादे मत्त लोक9/48बहुशास्त्रे बहुवाक्ये चित्ते16/11भ
फले-फुले बाड़े,-शाखा12/7'बृहत् सहस्रनाम' पड़17/90
फाड़िमु तोमार बुक17/181बाइश घड़ा जल दिने10/144
फाल्गुनपूर्णिमा-सन्ध्याय13/20बाउलिया 'विश्वासे' एथा12/36भङ्गी करि' ज्ञानमार्ग करिल17/67
फिरि' गेल विप्र घरे मने17/61बाटी भरि' दिया बले14/24भक्तगण लञा कैल विविध17/7
बाड़िया पश्चिमदेशे सब10/86भक्तगण लञा कैला13/34
बाड़िया व्यापिल सबे9/33भक्तगणे प्रभु नाम-महिमा17/72
बारमास ताहा प्रभु करेन10/27भक्तिकल्पतरुर तेंहो प्रथम9/10
बबालकेर दिव्य ज्योति13/116भक्ति-कल्पतरु रोपिला9/9
बाल्य, पौगण्ड, कैशोर13/18भक्तिर महिमा ताहाँ करिल17/74
बाल्यभाव-छले प्रभु करेन13/23भक्ते कृपा करेन प्रभु10/56
बङ्गवाटी-चैतन्यदास12/85बाल्यभाव प्रकटिया पश्चात्14/36भक्ष्य, भोज्य, उपहार13/115
बड़ शाखा, उपशाखा, तार9/23बाल्यभावे छत्र-तनु हइल14/64भगवान् आचार्य10/136
बड़शाखा एक,-सार्वभौम10/130बाल्यलीलाय आगे प्रभुर14/6भये पलाय पड़ुया, प्रभु17/251
बड़ शाखा-गदाधर पण्डित10/15बाल्यलीला-सूत्र एइ कहिल14/95भर्त्सन-ताड़न कर14/85
बड़ बड़ लोकेर आनिल17/41बाल्य वयस-यावत् हाते13/26भर्त्सना-ताड़ने काके17/27
बाल्यशास्त्रे लोके तोमार16/31

288 | श्रीचैतन्यचरितामृत