श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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आर चब्बिंश वत्सर कैल १०/११ इत्यादि पूर्वसङ्गी बड़ १०/१२७ उ
आर दिन एक भिक्षुक १७/१०१ इथि लागि' कृपार्द्र ८/१०
आर दिन प्रभुके कहे १७/६१ इथे तर्क करि' केह १७/३०५
आर दिन शिवभक्त शिव १७/९९ इथे दोष नाहि, आचार्य १२/३४ उच्च करि' गाय गीत १७/२०७
आर दिने ज्योतिष १७/१०३ इदं-शब्दे 'अनुवाद' १६/५६ उच्छिष्ट-गर्त्ते त्यक्त-हाण्डीर १४/७३
आर पुत्र-'स्वरूप' १२/२७ इहँ गौर-कभु द्विज १७/३०२ उच्छिष्ट दिया नारायणीर १७/२३०
आर म्लेच्छ कहे, शुन १७/२०१ इह माटि, सेह माटि १४/२८ उच्छिष्ट-मार्जन आर पाद १०/१५५
आर म्लेच्छ कहे १७/१९४ इहा छाड़ि' कृष्ण यदि १७/२८० "उठह, गोपाल-बल १२/२५
आर यत भक्तगण १०/१२८ इहा येइ शुने तार १७/२२६ उठिल गोपाल प्रभुर स्पर्श १२/२६
आर यत वृन्दावने ८/७१ इहा येइ शुने, शुद्धभक्ति १७/३१० उठिल वैष्णव सब करि १७/२२३
आर यदि कीर्त्तन १७/१२८ इहा विस्तारियाछेन दास १४/९५ उडुम्बर-वृक्ष येन फले ९/२५
“आरे पापि, भक्तद्वेषि १७/५१ इहा शुनि' ता-सबार १४/५९ उद्धत लोक भाङ्गे काजीर १७/१४२
आलिङ्गन करि' ताँरे १०/१३२ इहा शुनि' दिग्विजयी १६/९५ उन्मादेर चेष्टा करे १३/४०
आवेशेते महाप्रभु वंशी १७/२३३ इहा शुनि' महाप्रभु अति १६/९३ उपमालङ्कार गुण, किछु १६/४६
आसि' कहे,-'गेलुँ १७/१८९ इहा शुनि' माताके कहिल १४/७५ उपरि उपरि शाखा ९/१७
आसि' कहे,-'हिन्दुर १७/२०४ इहा हैते हबे दुइ १४/१७ उर्द्धबाहु करि' कहों १७/३२
आ-सिन्धुनदी-तीर १०/८७ इहार मध्ये मालि-पाछे १२/६७
आसिया श्रीरूप-गोसाञिर १०/१५७ इहार विचार नाहि जाने ९/२९
आसि' रूप-सनातनेर १०/९५ इहाते विरोध नाहि, विरोध १६/८१ ऋ
आस्ते-व्यस्ते पिता-माता १५/१७ इहाते सन्तुष्ट हबेन १५/२०
आस्ते व्यस्ते भक्तगण १७/२५१ 'इहाँ विष्णुपादपद्मे गङ्गार १६/८०
आस्वादिया पूर्ण कैल १३/४३ 'इहाँ कृष्ण नहे १७/२८७
आस्वादिल एसब रस १०/६० ऋण शोधिबारे चाहि १२/३२
आस्वादेन रामानन्द-स्वरूप १३/४२
ई
ए
इ ईश्वर-अचिन्त्यशक्त्ये १६/८१
ईश्वरत्वे आचार्येरे करियाछे १२/३१ एइ आज्ञा कैल यदि ९/४७
ईश्वरपुरीर शिष्य-ब्रह्मचारी १०/१३८ एइ आदीलीला कैल १७/२७४
इँहा सबार यैछे हैल १०/१०४ ईश्वरपुरीर सङ्गे तथाइ १७/८ एइ कृपा कर,-येन १७/२२०
इँहा-सबार श्रीचरण १३/१२४ ईश्वर हइया कहाय महा ११/९ एइ ग्रन्थ लेखाय मोरे ८/७८
इच्छा नाहि, तबु बले १७/२०० ईश्वरेर दैन्य करि' करियाछे १२/३५ एइ त' करिबे वैष्णव १४/१७
एइ त' कहिल ग्रन्थारम्भे १३/६
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