श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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अधम निन्दकादिका भी
श्रीकृष्णप्रेम-प्राप्ति-फलसे उद्धार :-
ये ये पूर्वे निन्दा कैल, बलि' मातोयाल।
सेइ फल खाय, नाचे, बले-भाल, भाल ॥ 53 ॥
अनुवाद—जिन्होंने पहले श्रीचैतन्य महाप्रभुको मतवाला
कहकर उनकी निन्दा की थी, वे भी फलको खाकर
नाचते हुए कहने लगे कि 'बहुत अच्छा है', 'बहुत
अच्छा है' ॥ 53 ॥
एइ त' कहिलुँ प्रेमफल-वितरण।
एबे शुन, फलदाता ये ये शाखागण ॥ 54 ॥
अनुवाद—यहाँ तक प्रेमफलके वितरणके सम्बन्धमें मैंने वर्णन किया। अब फल प्रदान करनेवाली जो-जो
शाखाएँ हुईं, उनको श्रवण करो ॥ 54 ॥
श्रीरूप-रघुनाथ-पदे यार आश।
चैतन्यचरितामृत कहे कृष्णदास ॥ 55 ॥
अनुवाद—श्रीरूप-रघुनाथ गोस्वामीके चरणकमल ही
जिसके एकमात्र आश्रय हैं, वह कृष्णदास
श्रीचैतन्यचरितामृतका वर्णन कर रहा है ॥ 55 ॥
इति श्रीचैतन्यचरितामृते आदिखण्डे भक्तिकल्पतरुवर्णनं नाम
नवमः परिच्छेदः।
श्रीचैतन्यचरितामृतके आदिखण्डमें भक्तिकल्पवृक्षका वर्णन
नामक नौवें अध्यायका अनुवाद समाप्त।