सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary

भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished696 पृष्ठ

पृष्ठ 59, कुल 696 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 59

४७
२. सिद्धान्त- उत्क्रमण काल में इन्द्रियों का मन से
मिलने का प्रतिपादन तथा इन्द्रियों की अणुता का
उपपादन। —पृ०११३६-४१
२. मनोधिकरण (सूत्र ३)
मरण काल में इन्द्रियों सहित मन का प्राण से
मिलने का वर्णन। —पृ०११४१-४२
३. अध्यक्षाधिकरण (सूत्र ४)
देहाध्यक्ष जीव की प्राण संबद्धता का निरूपण। —पृ०११४२-४३
४. भूताधिकरण (सूत्र ५-६)
जीव समन्वित प्राण की भूतसंबद्धता का निरूपण।
भूतों से प्राण संयोग का समर्थन। —पृ०११४३-४५
५. आसृत्युपक्रमाधिकरण (सूत्र ७-१३)
१. पूर्वपक्ष—विद्वान और अविद्वान के भेद से उपक्रमण
के पार्थक्य की संभावना का संशय।
२ सिद्धान्त—उपक्रमण में विद्वान अविद्वान की समानता
का प्रतिपादन। ब्रह्म प्राप्ति न होने तक संसारगति
का समर्थन। देह त्याग के उपरान्त भी जीव का
सूक्ष्म शरीर से संबन्ध निरूपण। सूक्ष्म शरीर के
सद्भाव से ही दैहिक उष्णता की उपलब्धि ज्ञापन। पृ०११४५-५३
६. पर संपत्त्यधिकरण (सूत्र १४)
जीव समन्वित भूतों की परमात्म लीनता का
वर्णन। —पृ०११५३-५४
७. अविभागाधिकरण (सूत्र १५)
जीव समन्वित भूतों की परमात्मा से अविभक्त
स्थिति का निरूपण —पृ०११५४-५५
८. तदोकोधिकरण (सूत्र १६)
मृत्युकाल में उपासक के हृदयाग्रभाग में ज्वलन का
वर्णन। —पृ०११५५-५७
[email protected]