श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)
Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary
भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा
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की एकरूपता का विश्लेषण। आश्रमोचित कर्म के साथ
विद्या के अविरोध का प्रतिपादन। —पृ०१०६७-६६
६. विधुराधिकरण (सूत्र ३६-३६)
अनाश्रमी व्यक्तियों के लिए भी ब्रह्मविद्या में अधिकार
प्रदर्शन प्रकारान्तर से उक्त मत का प्रतिपादन।
अनाश्रमी की अपेक्षा आश्रमी की श्रेष्ठता
प्रतिपादन। —पृ०१०६६-११०२
१०. तद्भूताधिकरण (सूत्र ४०-४३)
ब्रह्मचर्य आदि नैष्ठिकों के लिए निज आश्रम परित्या-
ज्यता का निषेध, नैष्ठिकों के स्वधर्माच्युत होने पर
प्रायश्चित्ताभाव का निरूपण। स्वधर्माच्युत नैष्ठिकों
का विद्या में अनधिकार प्रदर्शन। —पृ०११०२-५
११. स्वाम्यधिकरण (सूत्र ४४-४५)
१. आत्रेय के मतानुसार कर्मांग उपासना में यजमान
कर्त्तृता का निरूपण।
२. औडुलोमि के मत से ऋत्वित्वक् कर्त्तृत्व निरूपण —पृ०११०