श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)
Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary
भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा
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शास्त्र और प्रत्यक्ष के विरोध में शास्त्र की प्रधानता
या प्रामाणिकता का खण्डन भेदवासना की दोषरूपता
का निराकरण । असत्य या मिथ्या पदार्थ जन्य सत्य-
ज्ञान की उत्पत्ति का खण्डन स्फोटवाद का
निराकरण ।
४. वेदांत वाक्यों की निर्विशेष वस्तुमात्र बोधकता
खण्डन पूर्वक सविशेष वस्तु बोधकता का स्थापन ।
पराविद्या की सविशेष वस्तु बोधकता का समर्थन ।
“सत्यं ज्ञानमनन्तं” श्रुति के सत्य आदि पदों की
अखंडार्थता में सामानाधिकरण की अनुपपत्ति का
प्रदर्शन तथा सविशेषार्थकता का निरूपण । सगुण
और निर्गुण बोधक श्रुतियों की भिन्न भिन्न विषयों
की सार्थकता निरूपण पूर्वक विरोध का परिहार ।
ब्रह्म की ज्ञातृता एवं ज्ञेयता के निषेध का खण्डन ।
ब्रह्म की भेद प्रतिपादक एवं भेद निषेधिका श्रुतियों की
स्वमतानुसार व्याख्या और अविरोध स्थापन । ब्रह्म
के निर्विशेष भाव के प्रतिपादन में परपक्ष द्वारा
प्रस्तुत श्रुति स्मृति वाक्यों का स्वमतानुसार सविशेष
भाव से प्रतिपादन तथा उन वाक्यों की उपबृंहण
विधि का निरूपण ।
जीव और ब्रह्म के भद उपपादन के लिए “द्वासुपर्णा”
आदि श्रुति का निरूपण तथा मुक्तावस्था में भी दोनों
की पृथकता का विवेचन ।
५. अविद्या कल्पना में दोष प्रदर्शन:- (i) अविद्या की
ब्रह्माश्रयता का निराकरण (ii) अविद्या द्वारा ब्रह्म
तिरोधान की अनुपपत्ति (iii) अविद्या की दोष
रूपता की अनुपपत्ति (iv) अविद्या की अनिर्वच-
नीयता की अनुपपत्ति (v) तम या अन्धकार की
द्रव्यता का समर्थन (vi) अज्ञान की भावरूपता का
विवेचन (vii) अविद्या की भावरूपता के खण्डन
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