सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
स्पन्दनिर्णय एवं स्पन्दकारिका (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैव स्पन्द-शास्त्र सान्वय सटीक)

स्पन्दनिर्णय एवं स्पन्दकारिका (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैव स्पन्द-शास्त्र सान्वय सटीक)

Spanda Nirnaya of Acharya Kshemaraja with Hindi Commentary

आचार्य वसुगुप्त / क्षेमराज द्वारा

DevanagariHindipublished519 पृष्ठ

पृष्ठ 78, कुल 519 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 78

परिचय एवं पृष्ठभूमि ७७
(ख) मन्त्र-स्वप्नावस्था ।
(ग) मन्त्रेश-स्वप्नातीतावस्था ।
(घ) मन्त्रमहेश-तुरीयावस्था ।
(ङ) यथा पूर्वोक्त ।
शुद्धविद्या (५) मन्त्रस्तर—
(क) मन्त्र-जाग्रतावस्था ।
(ख) मन्त्रेश-स्वानावस्था ।
(ग) मन्त्रमहेश-स्वप्नातीतावस्था
(घ) शक्ति-तुरीयावस्था ।
(ङ) शिव-तुरीयातीतावस्था ।
ईश्वर (६) मन्त्रेश स्तर—
(क) मन्त्र-जाग्रतावस्था ।
(ख) मन्त्रेश-स्वानावस्था ।
(ग) मन्त्रमहेश-स्वप्नातीतावस्था ।
(घ) शक्ति-तुरीयावस्था ।
(ङ) शिव-तुरीयातीतावस्था ।
सदाशिव (७) मन्त्रमहेश स्तर—
(क) मन्त्रमहेश-जाग्रतावस्था ।
(ख) क्रियाशक्ति-स्वप्नावस्था ।
(ग) ज्ञानशक्ति-स्वप्नातीतावस्था ।
(घ) इच्छाशक्ति-तुरीयावस्था ।
(ङ) शिव-तुरीयातीतावस्था ।
अव्यक्त स्तर (८) शिव स्तर (Undifferentiated stage)—
(क) क्रिया-जाग्रतावस्था ।
(ख) ज्ञान-स्वप्नावस्था ।
(ग) इच्छा-स्वप्नातीतावस्था ।
(घ) आनन्द-तुरीयावस्था ।
(ङ) चित् तुरीयातीतावस्था
अवस्थाओं के पर्याय—
(क) जाग्रत्-पिण्डस्थ—सर्वतोभद्र ।
(ख) स्वप्न-पदस्थ—व्याप्ति ।
(ग) सुषुप्ति-रूपस्थ—महाव्याप्ति ।
(घ) तुर्य-प्रचय—रूपातीत ।
(ङ) तुरीयातीत—महाप्रचय ।