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स्पन्दकारिका (भट्ट कल्लट स्पन्दवृत्ति व हिन्दी व्याख्या सहित)

स्पन्दकारिका (भट्ट कल्लट स्पन्दवृत्ति व हिन्दी व्याख्या सहित)

Spanda Karika with Spanda Vritti & Hindi Commentary

महर्षि वसुगुप्त / भट्ट कल्लट द्वारा

स्रोत: मोतीलाल बनारसीदास · मोतीलाल बनारसीदास · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished190 पृष्ठ

पृष्ठ 24, कुल 190 में से

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उद्धरणों के संकेत-चिह्नों का विवरण
संकेत-चिह्न ग्रन्थ का नाम
अ० प्र० सि० अजड़प्रमातृसिद्धि ।
ई० प्र० वि० ईश्वर-प्रत्यभिज्ञा-विमर्शिनी ।
ई० सि० ईश्वर-सिद्धि ।
का० क्र० कालिका-क्रम ।
तं० तन्त्रालोक ।
तं० वि० तन्त्रालोक-विवेक ।
तं० सा० तन्त्रसार ।
प० त्रि० परार्त्रिशिका ।
प० सा० परमार्थ-सार ।
पा० यो० द० पातञ्जल योगदर्शन ।
प्र० हृ० प्रत्यभिज्ञा-हृदय ।
भा० द० भारतीय-दर्शन ।
मा० वि० मालिनीविजय ।
वि० भै० विज्ञान-भैरव ।
शि० सू० शिवसूत्र ।
शि० सू० वि० शिवसूत्रविमर्शिनी ।
शि० सू० वा० शिवसूत्रवार्त्तिक (भास्कर)
शि० सू० वा० ( वरद ) शिवसूत्रवार्त्तिक ( वरदराज )
शि० दृ० शिवदृष्टिः ।
शि० स्तो० शिवस्तोत्रावली ।
ष० त० सं० षट्त्रिंशत्तत्वसंदोह ।
स्व० तं० स्वच्छन्दतन्त्र ।
स्प० वि० स्पन्दकारिकाविवृति ।
स्त० चि० स्तवचिन्तामणि ।
स्तु० कु० स्तुतिकुसुमाञ्जलि ।
स्प० नि० स्पन्द-निर्णय ।
स्प० सं० स्पन्द-संदोह ।