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सर्वकोश
स्पन्दकारिका (भट्ट कल्लट स्पन्दवृत्ति व हिन्दी व्याख्या सहित)

स्पन्दकारिका (भट्ट कल्लट स्पन्दवृत्ति व हिन्दी व्याख्या सहित)

Spanda Karika with Spanda Vritti & Hindi Commentary

महर्षि वसुगुप्त / भट्ट कल्लट द्वारा

स्रोत: मोतीलाल बनारसीदास · मोतीलाल बनारसीदास · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished190 पृष्ठ

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पृष्ठ 180

१७० स्पन्दकारिका
CC-0.In Public Domain. Digitization by eGangotri
जाग्रत्-अवस्था ८९, ९०, ९१, ९८ निमीलन-समाधि ७०
जाग्रत्-स्वातन्त्र्य १३० निमेष १५, २१
जीव २८ निरंजन ११३, ११४
जीव-कला १५२ निर्वाण ७३, ७५
जीवात्मा ६५ निर्वाण-दीक्षा १२२, १२३, १२४, १२५
त निर्विकल्पाभास १४१
तन्मात्र ३९ निर्विकल्प-ज्ञानक्षण ३५, ४०
तमोगुण ३२, ४३, ७८, ९३ निस्तिमित-बुद्धिदशा १०५
तुरीय-दशा ६७, ६८, ७० निस्तरंगमहोदधिकल्प ६४
तुरीयदशारूप प
स्वच्छन्दभूमिका ६७, ६८
तुरीय-भूमिका ६८, ८२ पति-दशा १९, २०
तुर्या ३०, ८८, ८९, ९१ पति-प्रमाता ४८, ५०, ५१, ५३, ५४, ५५,
तुर्यातीत ३० ५६, ५७, ६२
तुर्यातीत-दशा ६८ पतिप्रमातृभाव ५४, ६६
द परप्रकाशबिन्दु १२४
दर्पण-नगर २९ पर-प्रतिभा १०१
दिक्-चरी २३, ४७, ४८ परब्रह्म ६३
दुःख ३४, ३५, ३६, ४०, ४२, ४३, परमार्थसत् ४२, ४३, ७२
५९, ८७ परा ४०, १४६
दुःखिता ३७, ३८, ३९, ९४, ९५, ९६ पराचित्-भूमिका ७०
देहात्मवाद ३५, ३८, ४१ परामर्श २७
ध परामृतरस १५१, १५३
धारणा ३१ पशु-दशा २०
ध्यान २७ पशु-प्रमाता ४९, ५०, ५१, ५४
पशु-प्रमातृभाव ४८, ५०, ५४, ६६,
न पशु-शक्ति १५७
नागार्जुन ७२ पश्यन्ती ४८
नाद ७७, १३८ पिधान ५६, ५९
नाम ३६ पीठेश्वरी १४८
नामरूपात्मक विकल्प ३६ पुरुष-तत्त्व ९७
नित्योदित-समाधि ६९ पुर्यष्टक ३९, ४१, ५१, ८२, ९९, १५८,
नित्य-चेतन ४८ १५९, १६२
नित्यत्व ५८ पूर्ण-अहंविमर्श १७
Prof. Madhav Prasad Lamichhane Collection, Kathmandu, Nepal
नित्य-युक्त ११९ पूर्ण-कर्तृता ५६, ५९, ७०, ७५