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सर्वकोश
स्मृतिचन्द्रिका: व्यवहारकाण्ड (देवण्णभट्ट - दक्षिण भारत का मूर्धन्य न्याय-दर्शन महाग्रन्थ)

स्मृतिचन्द्रिका: व्यवहारकाण्ड (देवण्णभट्ट - दक्षिण भारत का मूर्धन्य न्याय-दर्शन महाग्रन्थ)

Smritichandrika: Vyavaharakanda of Devannabhatta

देवण्णभट्ट (सम्पादक: एल. श्रीनिवासाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished474 पृष्ठ

पृष्ठ 12, कुल 474 में से

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पृष्ठ 12

xiii
पुटसङ्ख्या
(16) अधिमासविषयाणि .... .... ... 102
अधिमासि श्रौतस्मार्तक्रियाः न कार्याः .... .... ”
अधिमासप्राप्तिकालविचारः .... .... .... 103
आवश्यको विधिरधिमासेऽनुष्ठेयः .... ... 106
अधिमासे वर्ज्यानि .... .... .... 109
अधिमासे मृतानामधिमासेऽपि श्राद्धं कार्यम् .... .... 114
संसर्पाहस्पतिसंज्ञौ मासौ नाधिमासौ .... .... 116
(17) मृताहविषयाणि .... .... .... 117
सौरसावनचान्द्रमासनिरूपणम् .... .... 118
सौरसावनचान्द्राहोरात्राणां भेदनिरूपणम् ... .... 119
सांवत्सरिकश्राद्धादावस्तगामिनी तिथिर्ग्राह्या .... ... 121
(18) मृताहापरिज्ञानविषयाणि .... .... .... 124
(19) काम्यश्राद्धकालाः .... .... .... 126
संक्रान्त्यादौ पितृतृप्त्यतिशयकाले पुत्रादिना श्राद्धं कार्यम् .... ”
अयनादौ पुण्यकालविचारः ... .... .... 128
उपरागे ग्रहणकाल एव श्राद्धं कर्तव्यम् .... .... 132
मतान्तरेण काम्यश्राद्धकालनिरूपणम् .... .... 133
काम्यार्थिनैव काम्यश्राद्धानि कार्याणि .... .... 137
(20) गौणश्राद्धकालाः .... .... .... 138
अशौचादिप्राप्तौ श्राद्धक्रियायां कालविचारः .... .... 139
श्राद्धशब्दार्थनिरूपणम् .... .... .... 141
(21) श्राद्धदेशाः ... ... .... 142
श्राद्धार्हदेशनिरूपणम् .... .... .... ”
निषिद्धदेशनिरूपणम् .... .... ... 143

स्मृतिचन्द्रिका: व्यवहारकाण्ड (देवण्णभट्ट - दक्षिण भारत का मूर्धन्य न्याय-दर्शन महाग्रन्थ) · पृष्ठ 12, कुल 474 में से · SarvaKosh