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सर्वकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished1,406 पृष्ठ

पृष्ठ 987, कुल 1406 में से

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पृष्ठ 987
९५८* संक्षिप्त स्कन्दपुराण *

सेवकः सामदानी च भेदी दण्डी च मत्सरी।
दयावान् दानशीलश्च दानी यज्वा प्रतिग्रही॥
विघ्नकर्ता, अपहर्ता, विघ्ननाश, विनायक, अपकारोपकारी, सर्वसिद्धिफलप्रद, सेवक, सामदानी, भेदी, दण्डी, मत्सरी, दयावान्, दानशील, दानी, यज्वा प्रतिग्रही।

हविरग्निश्चरुस्थाली समिधश्च तिलो यवः।
होतोद्गाता शुचिः कुण्डः सामगो वैकृतिः सवः॥
द्रव्यं पात्राणि सङ्कल्पो मुसलो ह्यरणिः कुशः।
दीक्षितो मण्डपो वेदिर्यजमानः पशुः क्रतुः॥
हवि, अग्नि, चरुस्थाली, समिध, तिल, यव, होता, उद्गाता, शुचि, कुण्ड, सामग, वैकृति, सव, द्रव्य, पात्र, संकल्प, मुसल, अरणि, कुश, दीक्षित, मण्डप, वेदि, यजमान, पशु, क्रतु।

दक्षिणा स्वस्तिमान् स्वस्ति ह्याशीर्वादः शुभप्रदः।
आदिवृक्षो महावृक्षो देववृक्षो वनस्पतिः॥
प्रयागो वेणिमान् वेणी न्यग्रोधश्चाक्षयो वटः।
सुतीर्थस्तीर्थकारी च तीर्थराजो व्रती व्रतः॥
दक्षिणा, स्वस्तिमान्, स्वस्ति, आशीर्वाद, शुभप्रद, आदिवृक्ष, महावृक्ष, देववृक्ष, वनस्पति, प्रयाग, वेणिमान्, वेणी, न्यग्रोध, अक्षयवट, सुतीर्थ, तीर्थकारी, तीर्थराज, व्रती, व्रत।

वृत्तिदाता पृथुः पात्रो दोग्धा गौर्वत्स एव च।
क्षीरं क्षीरवहः क्षीरी क्षीरभागविभागवित्॥
राज्यभागविदो भागी सर्वभागविकल्पकः।
वाहनो वाहको वेगी पादचारी तपश्चरः॥
वृत्तिदाता, पृथु, पात्र, दोग्धा, गौ, वत्स, क्षीर, क्षीरवह, क्षीरी, क्षीरभागविभागवित्, राज्यभागवित्, भागी, सर्वभागविकल्पक, वाहन, वाहक, वेगी, पादचारी, तपश्चर।

गोपनो गोपको गोपी गोपकन्याविहारकृत्।
वासुदेवो विशालाक्षः कृष्णो गोपीजनप्रियः॥
देवकीनन्दनो नन्दी नन्दगोपगृहाश्रयी।
यशोदानन्दनो दामी दामोदर उलूखली॥
गोपन, गोपक, गोपी, गोपकन्याविहारकृत्, वासुदेव, विशालाक्ष, कृष्ण, गोपीजनप्रिय, देवकीनन्दन, नन्दी, नन्दगोपगृहाश्रयी, यशोदानन्दन, दामी, दामोदर, उलूखली।

पूतनारिस्तृणावर्तहारी शकटभञ्जकः।
नवनीतप्रियो वाग्मी वत्सपालकबालकः॥
वत्सरूपधरो वत्सी वत्सहा धेनुकान्तकृत्।
वकारिर्वनवासी च वनक्रीडाविशारदः॥
पूतनारि, तृणावर्तहारी, शकटभंजक, नवनीतप्रिय, वाग्मी, वत्सपालकबालक, वत्सरूपधर, वत्सी, वत्सहा, धेनुकान्तकृत्, वकारि, वनवासी, वनक्रीडाविशारद।

कृष्णवर्णाकृतिः कान्तो वेणुवेत्रविधारकः।
गोपमोक्षकरो मोक्षो यमुनापुलिनेचरः॥
मायावत्सकरो मायी ब्रह्ममायापमोहकः।
आत्मसारविहारज्ञो गोपदारकदारकः॥
कृष्णवर्णाकृति, कान्त, वेणुवेत्रविधारक, गोपमोक्षकर, मोक्ष, यमुनापुलिनेचर, मायावत्सकर, मायी, ब्रह्ममायापमोहक, आत्मसारविहारज्ञ, गोपदारकदारक।

गोचारी गोपतिर्गोपो गोवर्धनधरो बली।
इन्द्रद्युम्नमखध्वंसी वृष्टिहा गोपरक्षकः॥
सुरभित्राणकर्ता च दावपानकरः कली।
कालीयमर्दनः काली यमुनाह्रदविहारकः॥
गोचारी, गोपति, गोप, गोवर्धनधर, बली, इन्द्रद्युम्न-मखध्वंसी, वृष्टिहा, गोपरक्षक, सुरभित्राणकर्ता, दावपानकर, कली, कालीयमर्दन, काली, यमुनाह्रदविहारक।

संकर्षणो बलश्लाघ्यो बलदेवो हलायुधः।
लांगली मुसली चक्री रामो रोहिणिनन्दनः॥
यमुनाकर्षणोद्धारो नीलवासा हली तथा।
रेवतीरमणो लोलो बहुमानकरः परः॥
संकर्षण, बलश्लाघ्य, बलदेव, हलायुध, लांगली, मुसली, चक्री, राम, रोहिणिनन्दन, यमुनाकर्षणोद्धार, नीलवासा, हली, रेवतीरमण, लोल, बहुमानकर, पर।

धेनुकारिमहावीरो गोपकन्याविदूषकः।
काममानहरः कामी गोपीवासोऽपतस्करः॥