सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 98, कुल 609 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 98

श्री कृष्णाय नमः
अविघ्न मस्तु
सिद्धान्त दर्पणः
मध्यमाधिकारः
प्रथमः प्रकाशः
काल वर्णनम्
श्री भूमाधव चक्र चक्रयवनिभृत्तद्भाभिरभ्युज्ज्वलं
श्री कण्ठ प्रमुखाखिला मरशिखा जुष्टांघ्रि पीठोपलम्
श्री नीलाचल मौलि मण्डल महा नीलाय मानं महः
श्री भूमाधरितस्मरं भवतु नः प्रत्यूह हत्युद्यतम् । १ ।
श्री नीलाचल के शिखर भूषण अति नील तेज के युक्त श्री जगन्नाथ हमारे
सभी विघ्न नष्ट करने के लिए सदा उद्यत रहें । श्री जगन्नाथ के साथ श्री (लक्ष्मी),
भू (पृथ्वी), माधव (दुर्गामाधव) चक्र (सुदर्शन चक्र), चक्री (नारायण), बलभद्र
(अवनिभृत्) सुभद्रा-इन सात देवताओं का तेज सम्मिलित है । इन्हें महादेव
(श्रीकण्ठ) के साथ आकर देवता गण पत्थर के रत्न पीठ पर सिर लगाते हैं । १ ।
गांगेय द्युति भंगदांग लतया श्री राधयालिं गितम्
विद्युत्सांगिघना घना घनप घन रुक् प्रेमामृतै का श्रयम् ।
सत्संवित्सुखम क्षर क्षरपरं पूर्णाति पूर्णोत्तमम्
श्रीकृष्णारूय मुपास्महे सुरुचिरं वेदान्तं वेद्यं महः । २ ।
स्वर्ण तेज को भी लज्जित करती हुई श्री राधा की अंगलता के आलिंगन से
(कृष्ण का) श्याम रूप काले मेघ की बिजली के समान शोभित होता है, उस
प्रेम रूपी अमृत का ही एक आश्रय है । यह तेज सत् चित् आनन्द रूप, पंचभूतों
से परे (क्षरपर) अविनाशी, स्वयं पूर्ण होने के कारण अतुलनीय है । २ ।
जयति जगती भर्तुर्धामाद्भुतं परमाणुतां
ययुरपि जगत्कोषा यल्लोम जाल विलावली
यदनिलजल ज्योतिः क्षौणीपराणु गृहोदर-
स्फुर दपि सुरागणैः क्रीडन्निजैरवतारकैः । ३ ।
जगत् के पालक अद्भुत, तेज के परमेश्वर की जय हो, जो परम सूक्ष्म होने
हुए भी रोम-रोम में ब्रह्माण्ड धारण किये हुए हैं । जिन के विराट स्वरूप में पृथ्वी
(मिट्टी) आग, जल, आकाश, पवन पञ्चभूत, सूक्ष्म रूप से फैले हुए हैं, वही
परमात्मा उन्हीं पञ्चभूतों के भीतर देह धारण कर प्रकट होते हैं (अवतार लेते हैं)
उन अवतारों की (क्रीड़ाओं) की देवगण भी गणना नहीं कर पाते ।