सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंउपसंहार वर्णन् ४४९
तथा अक्षांश क्रमशः १३३८ (द्वारका) तथा २०६७ (काबुल) कला उत्तर है ।
(७०) अफगानिस्तान का १९ कला पश्चिम तथा १८७५ कला उत्तर है । (७१)
सिन्धु और सागर संगम का २४ कलापश्चिम तथा १४१७ कलाउत्तर है ।
स देह यज्ञस्य (७२) नगाग्न्य (३७) श्व
भुजंगमातंग नभो भुजाश्च (२०८८)
प्राग् भारतस्याप्यथ ब्रह्म देश
मध्ये (७३)ऽद्रितत्त्वानि (२५७) गुणाभ्ररुद्राः (११०३) । १२१ ।
(७२) देह यज्ञ का ३७ कला पश्चिम तथा २०८८ कला उत्तर है । ( ७३)
भारत के पूर्व में ब्रह्मदेश (बर्मा या म्याम्मार) के मध्य का २५७ कला पूर्व तथा
११०३ कला उत्तर है ।
(७४) इरावती सागर संगमेऽस्या याम्येऽष्टवेदांक
(९४८) मिताक्षलिप्ते पारस्यके (७५) भारत पश्चिमस्थे
नगार्थ चन्द्रा (१५७) नखनन्द चन्द्राः (१९२०) । १२२ ।
(७४) इरावती और सागर का संगम ब्रह्मदेश के दक्षिण अर्थात् उतना ही
२५७ कला पूर्व और ९४८ कला उत्तर है । (७५) भारत के पश्चिम में स्थित पारस्य
(ईरान) का १५७ कला पश्चिम तथा १९२० कला उत्तर है ।
आरव्यमध्ये (७५)ऽद्रिगुणे क्षणानि (२३७)
दिग् वासवा (१४१०) श्चाथ तुरुष्क भूमौ (७७)
नगाग्नि रामाः (३३७) खनगेन्दु पक्षा (२१९०)
याम्यस्थ लंकापुरी (७८) खाभ्रचन्द्राः (१००) । १२३ ।
(७६) अरब मध्य का २३७ कला पश्चिम तथा १४१० कला उत्तर है । (७७)
तुरुष्क भूमि (तुर्की) का ३३७ कला पश्चिम तथा २१९० कला उत्तर है । (७८)
दक्षिण में स्थित लंकापुरी (श्रीलंका) का (१००) कला पूर्व
प्राच्या विध्वष्योऽष्ट गजाब्धि (४८८) लिप्ता
वर्षोत्तरे हिन्दुकुशाद्रि मध्यो (७९)
नृपाः (१६) शरार्काक्षिमता (२१२५) हिमाद्रेः (८०)
परेऽष्टरामाः (३८) कृतदिग् दृशौ (२१०४)ऽशे । १२४ ।
तथा ४८८ कला उत्तर हैं । (७९) हिन्दुकुश पर्वत का मध्य १६ कला पूर्व
तथा २१२५ कला उत्तर है । (८०) हिमालय का पश्चिमी भाग ३८ कला पूर्व तथा
२१०४ कला उत्तर है ।
पूर्वे (८१)ऽग्निसिद्धा (२४३) नगनाग भूपा (१६८७)
मध्ये (८२) शशीन्द्रा (१४१) स्त्रिगुणाद्रि चन्द्राः (१७३३)