सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 537, कुल 609 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 537

४४० सिद्धान्त दर्पण
षष्ठेऽर्क चन्द्रर्क्षज सूक्ष्मपंजी तिथ्यादिसन्धिः प्रतिमण्डलाद्या
चलांशकाः क्रान्तिमही द्युजीवाश्चराणि लग्ना विविधाश्चदेशैः । ७३ ।
षष्ठ प्रकाश में रवि, चन्द्र और नक्षत्र की सूक्ष्म पञ्जिका, तिथि, नक्षत्र और
राशि की सन्धि, वृत्त और प्रतिवृत्त, अयनांश, शीघ्र फल, क्रान्ति ज्या, द्युज्या और
भूज्या, चर और स्थान विशेष का लग्न कहा गया है ।
दिग्भूमि शुद्धिर्भुजकोटिकर्ण लम्बाक्ष काग्राः सममण्डलाद्याः
दिग् देश काल स्फुट सूर्य बोधो ना सप्तमे कोण भवः करण्याः । ७४ ।
७ म प्रकाश में दिग् और भूमि शुद्धि, भुज कोटि और कर्ण, लम्बज्या, अक्षज्या
और अग्रा, सममण्डल आदि वृत्त, दिग् और देश समय और स्फुट रवि निकालना,
करणी, कोण शंकु आदि कहा गया है ।
अथाष्टमे सूर्य विधूक्ष माभा मानश्रुतीषूस्थिति मर्दकाले
चन्द्रग्रहोक्ति र्वलने सयुक्तो चान्द्रंदिनं ग्रास ज्ञ वर्णभेदाः । ७५ ।
अष्टम प्रकाश में, सूर्य, चन्द्र, भूछाया बिम्ब परिमाण, रविचन्द्र मन्दकर्ण, शर
स्थिति, मर्दकाल और इन सबके द्वारा चन्द्रग्रहण, युक्ति सहित आयन औरर आक्ष
वलन चान्द्र दिन तथा विभिन ग्रास के बारे में कहा गया है ।
युक्ति र्नते वित्रिभ लग्न शंकोर्द्विधोदितं लम्बन मिन्दु भान्वोः
नतिस्तमो मानभिदा नरोत्थाग्रहः स्वराशोर्नवमेकिलेति । ७६ ।
नवम प्रकाश में नति, वित्रिभ लग्न का शंकु, रवि और चन्द्र का दो प्रकार
का लम्बन, शंकु के अनुसार छाया मान में भेद तथा सूर्य ग्रहण के बारे में कहा
गया है ।
कालोन्नतेर्मानि भिदाथ वृत्त त्रयं सरण्या सवशात् समक्षः
लेखस्थलेच्छेदक नामधेया ग्रहस्य सिद्धो दशम प्रकाशे । ७७ ।
दशम प्रकाश में उदय आदि, उन्नत काल भेद से दृश्य बिम्ब मान में भेद,
शर के अनुसार तीन वृत्तों के विषय में तथा ग्रहण का परिलेख दिया गया है ।
एकादशेखेचर तुल्यतादौ दृक् कर्मयुग्म स्फुट दिक् कलम्बैः
द्युष द्युति र्बिम्बमितेर्भिदोक्ता युद्धप्रभेदानलकादि सिद्धिः । ७८ ।
एकादश प्रकाश में स्फुट ग्रहों की समानता, ग्रह स्फुट करना और उससे
आयन और आक्ष दृक् कर्म निकालना, ग्रह युति (योग), ग्रह बिम्ब के भेद, ग्रह
युद्ध के भेद, ग्रहयुद्ध देखने के लिये नलिका के व्यवहार के बारे में कहा गया
है ।
भानां युति द्वादश के खगेन्द्रे र्ध्रुवाः शराश्चाकृतयो भ संख्याः
तद् बिम्बमानानि च योग ताराः सप्तर्ष्यगस्त्य प्रमुखाः प्रदिष्टाः । ७९ ।