सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
पृष्ठ 521, कुल 609 में से
संदर्भ में पढ़ेंात्मा"? स, न्धि, त्ता, त्मा.
L34:
"संवित्सवातधामा निगम गण शिर स्तुत्यसत्य प्रभावः"
Wait, look at "संवित्सवातधामा":
सं-वि-त्स-वा-त-धा-मा
Wait, is it "संवित्सवातधामा" or "संवित्सारधामा"? Look at 'वा': it is definitely 'वा'!
"निगम गण शिर स्तुत्यसत्य प्रभावः"
Wait, between "निगम" and "गण" is there a space? Yes.
Between "गण" and "शिर"? Yes.
"स्तुत्यसत्य प्रभावः" - wait, is it "स्तुत्यसत्य" or "स्तुत्य सत्य"? Connected: "स्तुत्यसत्य".
Then space, "प्रभावः".
Let's double-check all lines carefully to ensure precision:
L1: ४२४ सिद्धान्त दर्पण
L2: तीनों लोकों को समाप्त कर देते हैं । कवियों ने जिनकी अनेक कीर्तियों का वर्णन
Wait, is L2 "समाप्त" or "समास"?
Let's zoom into L2:
"तीनों लोकों को समास कर देते हैं ।"
Look at the word: स (sa), म (ma), ा (aa), स (sa)!
There is NO 'प्त'! It is clearly "समास"!
Wait, "समास कर देते हैं" in Hindi means "cond