सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंएक विंशः प्रकाशः
वासना शेष रहस्य वर्णन
कृत्वा ग्रहाणां गोलानां गणितक्रम वर्णनम्
प्रत्युक्ति शेषमिषतो वासनादिक् प्रदर्श्यते । १ ।
ग्रह और गोल का वर्णन पूरा करने के बाद प्रश्नोत्तर रूप में वासना (गणितं
विधियों का रहस्य या तर्क) दिखाया जा रहा है ।
व्यक्षे क्षितिज वृत्तम् यत्तदुन्मण्डलान्यतः
स्वदेशे क्षितिजे सूर्योदयोऽस्मात् स्वनिरक्षयोः । २ ।
निरक्ष देश (विषुव वृत्त स्थान) के क्षितिज वृत्त को अन्य स्थानों पर उन्मण्डल
कहा जाता है । अपने अपने स्थान के क्षितिज वृत्त में ही सूर्योदय होता है । अपने
स्थान के क्षितिज और निरक्ष के क्षितिज (जो अपने स्थान का उन्मण्डल है) के
बीच
द्युरात्र वृत्तानुसृतेश्वरं सूर्योदयान्तरम्
द्युरात्र मण्डले यस्मात् क्षितिजादुपरि स्थिते । ३ ।
अहोरात्र वृत्त का खण्ड ही चर है । यह दोनों स्थान के सूर्योदयों में समय
का अन्तर है । सूर्य अहोरात्र वृत्त में अपने क्षितिज के ऊपर रहने पर
दिनं भवेदधः संस्थे ततो भवति यामिनी
तस्मात् समत्वं सततं द्युनिशो व्यक्ष देशके । ४ ।
दिन होता है । तथा नीचे रहने पर रात होती है । निरक्षवृत्त ही सबसे बड़ा
अहोरात्र वृत्त है । इसको सभी देशों का क्षितिज दो समान भागों में बांदता है ।
अतः सूर्य निरक्ष वृत्त में घूमने पर दिन और रात हर स्थान पर समान होते हैं ।
निरक्ष देश में दिन रात...सदा समान होते हैं ।
निरक्षोदयतः पूर्वं सौम्य गोले स्वदेशजः
उदयोऽस्तमयः पश्चाद् याम्य गोले विपर्ययः । ५ ।
विषुव रेखा से उत्तर-सूर्य रहने पर उत्तर के स्थानों में विषुव क्षेत्र से पहले
सूर्योदय तथा पीछे सूर्यास्त होता है । दक्षिणीगोल में इसका विपरीत होता है ।
क्षितिजोर्ध्वाधरः स्थित्वा दृक्वृत्तस्य च गोलयोः
सौम्ये महद्दिनं रात्रिस्तनुर्याम्ये तु वाम्यतः । ६ ।
इसका कारण है कि उत्तर गोल में उन्मण्डल अपने क्षितिज से ऊपर रहता
है, उन्मण्डल तक पहंचने (निरक्ष सूर्योदय) से पहले ही सूर्य अपने क्षितिज पर
आ जाता है । और अपने स्थान का सूर्योदय होता है। दक्षिण गोल में उन्मण्डल
अपने क्षितिज से नीचे होता है।