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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 436, कुल 609 में से

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पृष्ठ 436

विंशः प्रकाशः
गोलाधिकारे गोलादि यन्त्र वर्णनम्
यन्त्रं विनाग्रह ग्रहणादिकानां
स्याद् वासना न सुगमा समय क्रमश्च
तद् यन्त्र निर्मित मुपक्रमतेऽभिधातुं
श्रीचन्द्रशेखर कृतोप्रतिभानुसारत् । १ ।
बिना यन्त्रों के ग्रहों की गति तथा ग्रहण आदि आसानी से नहीं जाने जा
सकते हैं। कालगति भी बिना यन्त्र के नहीं जानी जा सकती। अतः श्रीचन्द्रशेखर
अपनी प्रतिभा के अनुसार यन्त्र निर्माण का वर्णन आरम्भ करते हैं।
यन्त्रं द्विधा भवति गोलक काल भेदात्
सन्त्येतयोः पुनरवान्तर भूरि भेदाः
तेभ्यः कियन्ति सुकराणि समाकलस्य
प्राधान्यतः शिशुमुदे विशदी करोमि । २ ।
गोल और काल भेद से यन्त्र कई प्रकार के हैं, उनके भीतर भी कई उपभेद ।
उनमें जो आसानी से बनाये जा सकते। उनमें कुछ के विषय में मैं यन्त्र के विषय
में नहीं जानने वालों के लिये वर्णन कर रहा हूँ।
गोलारूयमेककक्षं बहुकक्ष मितिद्विधेच्यते यन्त्रम्
तत्राद्यमुक्तमादिभिरपरं मत्कल्पनासिद्धम् । ३ ।
यहां दो प्रकार के गोल यन्त्रों के बारे में कहा जायेगा। एक एक कक्ष वाला
तथा दूसरा बहु कक्ष वाला। पहले के बारे में प्राचीन आचार्यों में कहा है। दूसरे
के बारे में स्वयं अपनी बुद्धि से कह रहा हूँ।
गुप्तस्थले सुविमले सुस्नातोऽलंकृती गणकः
सम्पूज्य भास्कर मुखान् ग्रहान् भचक्रं चतुर्व्यूहम् । ४ ।
गुप्त और स्वच्छ स्थान में स्नान कर और अलंकृत होकर गणक जाये और
वहां विभिन्न देवताओं की पूजा करे-सूर्यादि ग्रह, नक्षत्र मण्डल, चारों तरफ के
इन्द्रादि लोक पालान् गुह्यकवर्गं गुरुन विघ्नाय
बोधार्थं शिष्याणां गोलक यन्त्र निविधीयात् । ५ ।
इन्द्र आदि लोक पाल, (गुह्यक) तथा अपने गुरु-जिससे विघ्न दूर हों। इसके
बाद शिष्यों के यन्त्र ज्ञान के लिये गोलयन्त्र बान्धना आरम्भ करें।
निर्माय क्षितिगोलं षडं गुलाभितस्ववेष्टनं समिधा
द्वीपाद्रि सागराद्यैरंकितमन्तर्गत स्वप्रम् । ६ ।
काठ का एक पृथ्वी गोल बनायें जिसकी परिधि ६ अंगुल हो। उसमें द्वीप,