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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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पृष्ठ 403

३०६ सिद्धान्त दर्पण
है । इसके विपरीत पृथ्वी के दक्षिणार्द्ध में ६ द्वीप तथा लवण क्षीर आदि समुद्र
हैं ।
लवण जलधीरादौ दुग्धसिन्धुश्च तस्मा
दमृतमृतरश्मिश्रीश्च यस्माद् वभूव ।
महतचरणपद्मः पद्म जन्मादि देवै र्वसति
सकल वासो वासुदेवश्च यत्र । ११८ ।
पहले लवण तथा उसके बाद क्षीर समुद्र हैं । क्षीर समुद्र से चन्द्र और लक्ष्मी
का जन्म हुआ । इसमें स्वयं वासुदेव निवास करते हैं । जिनके शरीर में सम्पूर्ण
ब्रह्माण्ड है । ब्रह्मा आदि सभी देवता उनकी चरण वन्दना करते हैं ।
दध्नोघृतस्येक्षुरसस्य तस्मान्मद् यस्य च स्वादु जलस्य चान्त्यः
स्वादु द्यकान्तर्वड़वानलौऽसौ पाताल लोकाः पृथिवी पुटानि । ११९ ।
क्षीर के बाद दधि (दही) घृत (घी) गुड़ (ईख का रस), मद्य और अन्त में
पानी का समुद्र क्रमशः अधिक दूरी पर है । इस स्वादु जल समुद्र के भीतर
बड़वानल है । पृथ्वी के गड्ढों को ही पाताल कहा जाता है ।
चञ्चत् फणामणि गणांशुकृत प्रकाशा
एतेषुसासुर गणाः फणिनोवसन्ति ।
दीव्यन्ति दिव्य रमणी रमणीय देहैः
सिद्धाश्च तत्र चलसत् कनका विभासैः । १२० ।
पाताल लोक में असुर और सर्प निवास करते हैं । सर्पों के सिर की मणि
से वह प्रकाशित है । सिद्ध अपने रूप गुण रूपी मणि को धारण कर वहां विचरण
करते हैं । उनके विचरण (या क्रीड़ा) के समय उनके देह के स्वर्ण गहने सदा
चमकते हैं । सिद्ध और दिव्य स्त्रियों के सुन्दर देह गहनों की क्रान्ति से प्रकाशित
हैं ।
शाकं ततः शाल्मलीमत्र क्रौशं क्रौञ्चञ्च गोमेदक (प्लक्ष) पुष्करे च
द्वयोर्द्वयोरन्तरमेक मेकं समुद्रयोर्द्वीप मुदाहरन्ति । १२१ ।
ये सभी सात समुद्र वलयाकार हैं । इनके भीतर ६ द्वीप हैं । द्वीपों के नाम
क्रमशः शाक, शाल्मली, कौश, क्रौञ्च, गोमेदक और पुष्कर, गोमेदक का एक
अन्य नाम प्लक्ष है ।
लंकादेशाद्धिमगिरि रुदग् हेमकूटोऽथ तस्मात्
तस्माञ्चान्यो निषध इति ते सिन्धु पर्यन्त दैर्घ्याः
एवं सिद्धादुद गपि पुरा च्छृंग वच्छृङ्ग नीला
वर्षाण्येषां जगुरिह बुधा अन्तरे द्रोणि देशान् । १२२ ।
लंका से हिमालय उत्तर की तरफ है । उससे उत्तर हेमकूट पर्वत तथा और