सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसूर्य ग्रहण वर्णनम् १५१
इत्थं प्रसाध्य ग्रहमध्यकालं चन्द्र ग्रहेया स्थित खण्ड सिद्धयै
अन्त्या स्फुटा चन्द्र गतिः पुरोक्ताः तयाहतं लम्बन नाड़िका द्यम् । २३ ।
इस प्रकार ग्रह मध्यकाल का साधन करने पर चन्द्र ग्रहण स्थित्यर्द्ध जानने
के लिए ग्रहण के लिए उपयोगी चन्द्र की अन्तिम स्फुट गति (पहले दिया गया
है-षष्ठ अध्याय में ) निकाल कर उसमें लम्बन स्फुट घटिका को गुणा करेंगे।
षष्ट्याप्तमेतत् फलहीन युक् चेत् प्रोक्त पर्व जार्कः स्फुट शीतगुः स्यात्
पातो दिगंशाक्ष फलेन सिद्धः कार्यस्तदूनात् शशिनः शरश्च । २४ ।
गुणनफल को ६० से भाग देकर लब्धि को समपर्व काल के सूर्य में जोड़ेगे
या घटायेंगे जिस प्रकार लम्बन का करते हैं। चन्द्र पात का दिगंशफल से संस्कार
उसे स्फुट चन्द्र से घटाकर शर निकालेंगे।
आनीय भानो स्फुट पर्व लग्नं त्रिभोन लग्नं तदपक्रमौ च
उदक् शरो ना यमदिक् शराढ्यः स्वदेश जाक्ष स्तुभवेत्