सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचन्द्र ग्रहण वर्णनम् १३३
छाया) का चन्द्रपात के निकट रहने के समय ही ग्रहण होने के कारण राहु (चन्द्रपात
का नाम) असुर द्वारा ग्रास होने की कथा प्रसिद्ध है ।
सिद्धान्तशिरोमणै-दिग्देश काला वरणादि भेदान्नच्छादकोराहुरिति ब्रवन्ति ।
यन्मानितः केवल गोल विज्ञा तत्संहिता वेद पुराण बाह्यम् । २९ ।
सिद्धान्तशिरोमणि में भी भास्कर ने लिखा है कि यदि एक ही राहु द्वारा ग्रास
होता तो ग्रहण में दिग् भेद (कभी पूर्व, कभी पश्चिम में), काल भेद (कम या
अधिक समय के लिए) तथा ग्रास भेद (पूर्ण या खण्ड ग्रहण) कैसे होता है ?
अत रांहु ग्रास द्वारा ग्रहण मानने वाले केवल अपने गोल ज्ञान का अभिमान करते
हैं । वस्तुतः वे मूढ और वेद, संहिता तथा पुराण के विरोधी हैं ।
राहुः कुभामण्डलगः शशांकं शशांक गच्छादयतीन बिम्बम्
तमोमयः शम्भुवर प्रदानात् सर्वागमा नाम विरुद्ध मेतत् । इति । ३० ।
राहु अन्धकार (छाया) मय है वह पृथ्वी छाया मण्डल में प्रवेश कर चन्द्रमा
को ग्रास करता है । फिर चन्द्र में प्रवेश कर सूर्य को ढंकता है । इस प्रकार ग्रास
करने के लिए ही सूर्य ने उसे ऐसा वर दिया है । इस प्रकार का समाधान शास्त्र
विरोधी नहीं है। (उद्धरण समाप्त)
प्रभाभुवो भ्राम्यति भानु भार्द्धे तद्
गर्भमप्रे यदि शुभ्र भानुः
जम्बद् विषद् भिङ् मुख एति वेगात्
तत् तद् ग्रहः सा तप बिम्ब लोपात् । ३१ ।
सूर्य के कारण पृथ्वी की छाया सूर्य से विपरीत दिशा में होती है । यह भी
क्रान्तिवृत्त में पूर्व दिशा में घूमती हैं । पूर्णिमान्त में जब चन्द्र भी सूर्य से विपरीत
दिशा में (६ राशि अन्तर पर) होता है, तब उसकी गति छाया की गति से अधिक
होने के कारण वह छाया में प्रवेश कर उसे पार कर जाता है । छाया में प्रवेश
करने पर चन्द्रमा की किरण (प्रकाश) का लोप होता है । इस कारण चन्द्र ग्रहण
होता है ।
भू भानु मध्ये यदि शीतभानु र्गच्छन् रविं छादयति प्रतीज्या -
भास्वद् ग्रहस्तद्वितीयस्य पूर्व यानेऽपि शुभ्रांशु गते र्महत्वात् । ३२ ।
अमान्त के समय जब पृथ्वी से चन्द्र और सूर्य एक ही दिशा में (एक राशि
में) होते हैं । तब चन्द्रमा पूर्व दिशा में बढ़ते हुए सूर्य को ढंग लेता है । तथा
गति अधिक होने के कारण फिर सूर्य बिम्ब से आगे (पूर्व दिशा में ) निकल
जाता है । सूर्य अत्यन्त प्रकाश मान होने के कारण लोग उसे नहीं देख पाते हैं
सूर्य को ढंकते समय प्रकाश हीन चन्द्रमा को ही देखते हैं ।