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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 225, कुल 609 में से

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पृष्ठ 225

· १२८ सिद्धान्त दर्पण
वेद्भूः शशी समकला विवितौ भवेतां
किञ्चोच्यते क्वचन पर्वणि तद्विशेषः । ८ ।
इस चल आदि समय को चन्द्र सूर्य से कम होने पर पर्वान्त समय में जोड़ेंगे
तथा ६ राशि युक्त रवि से अधिक होने पर घटायेंगे । तब पर्वान्त (दर्शान्त या
पूर्णान्त) समय स्फुट होगा । इस समय में पुनः चन्द्र और रवि को स्फुट किया
जायेगा तथा फिर उसके अनुसार पर्वान्त रवि चन्द्र स्फुट होगा । बार बार स्फुट
करने पर जब चन्द्र और सूर्य की कला (पूर्णिमा में सूर्य में ६ राशि जोड़कर)
समान हो जाय तब शुद्ध पर्वान्त निकलेगा । इसके बाद ही ग्रहण के लिए अन्य
साधन होगा ।
सूर्यस्य दोर्गति फलो उदयान्तरञ्च
यद्येकदा त्रितयमे तदृणं धनं स्यात् ।
तत्रोदयान्तर भुजान्तर के सुधांशो-
र्भास्वत् गतेः फलयुते र्विकला स्ततस्ताः । ९ ।
एक ही समय सूर्य का मन्दफल, गतिफल तथा उदयान्तर फल तीनों धन
या ऋण होने पर चन्द्र के उदयान्तर और भुजान्तर फल के योग से सूर्य गति फल
की विकला को जोड़ेंगे ।
शीतांशुदोः फल कला गुणिता विभक्ता
स्तद् व्यास योजन चयेन (४४४) च पूर्णिमायांन्
दर्शेंहतास्तु रवि योजनकै (७२,०००) र्विलिप्ता
लब्धाश्च ताः पुनरिनेन्दु गतान्तराप्ताः । १० ।
इस योगफल को चन्द्रमा के मन्द फल कला से गुणा करेंगे । पूर्णिमा के
समय इस गुणन फल में चन्द्रमा के बिम्ब व्यास योजन (४४४) से भाग देंगे ।
अमावास्था में गुणन फल में रवि बिम्ब व्यास योजन से भाग देकर विकला आदि
लब्धि निकालेंगे । इस विकला फल को सूक्ष्म रवि और चन्द्रमा के गति अन्तर
से भाग देगें ।
दण्डादि कै रिह फलैः समपर्व युक्ति-
मूनं पुरोदित फल त्रितयर्णतायाम् ।
स्व त्वेमाद् भवति दृक् सममत्रकार्या
सूर्याब्धयोः समकलोकृति रुक्त पूर्वा । ११ ।
लब्धि दण्ड आदि फल को सम पर्व काल होने पर पूर्व काल से घटायेंगे
और ऋण होने पर (मन्दफल, उदयान्तर और गतिफल तीनों ऋण होने पर) पर्व
काल में जोड़ेंगे) इससे दृक् सम पर्व काल होगा। समपर्वकाल और दृक् सम
पर्वकाल के अन्तर में सूर्य और चन्द्रमा की गति निकाल कर दृक् सम पर्व काल
का रवि और चन्द्र स्फुट होगा ।