सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 218, कुल 609 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 218

त्रिप्रश्नाधिकारः १२१
हृति) या छेद होता है ।
सा त्रिज्या घ्नो द्यु जीवाप्त उन्नतज्या तयोनिता
स्वान्त्या नतोत्क्रमज्या स्यात् तस्या पश्चात् नतासवः । ७४ ।
इस हृति को त्रिज्या से गुणा कर द्युज्या से भाग देने पर उन्नतज्या (अन्त्या)
होती है । अन्त्या से उत्क्रमज्या घटाने पर नत उत्क्रमज्या होती है । इसको असु
बनाते हैं ।
स्व वासर दले प्राणास्तदूनाश्चोन्नतासवः
रसो (६) द् धृता विनाड्य स्युः प्राक् पश्चिम कपालयोः । ७५ ।
इन असुओं में ६ से भाग देने पर विनाड़ी होती है । अपने के पूर्वार्द्ध में होने
पर यह गत विनाड़ी तथा अपराह्न में गम्य विनाड़ी होती है ।
प्रदर्श्यते विशेषोऽत्रे यद्यल्पा सप्तविंशते
भवेत् नतोत्क्रम ज्या तदन्त्या वर्गात्परित्यजेत् । ७६ ।
नत उत्क्रमज्या २७ से कम होने पर अलग विधि है ।
अन्त्या (त्रिज्या + चरज्या) के वर्ग से
उन्नत ज्याकृतिं शेषान्मूलं त्रिज्यान्त्य जीवयो
योगाद्धैन हतं भज्यादन्त्यया स्युर्नतासवः । ७७ ।
इष्ट अन्त्या (उन्नतज्या) का वर्ग घटाकर शेष का मूल निकालते हैं । मूल
को त्रिज्या और अन्त्या के योग से आधे से गुणा कर अन्त्या से भाग देते हैं ।
फल नतासु हुआ ।
नतोत्क्रमगुण स्त्रि ज्याधिक श्चेत् त्रिज्ययोज्झित
शेषात् क्रमगुणात् चापा त्रिज्या चापा (५४००) न्वितोऽ सवः । ७८ ।
नतउत्क्रम ज्या त्रिज्या से अधिक होने पर उससे त्रिज्या घटाकर शेष (क्रमज्या)
का चाप निकालेंगे । इसको त्रिज्या चाप (५४०० कला) में जोड़ने पर नत असु
होगा ।
एवं न तासव स्त्रि ज्या धनुषो (५४००) यदि चाधिकाः ।
तदा तदूनिताः शेषात् क्रमज्या त्रिज्ययान्विता । ७९ ।
नत असु ५४०० असु से अधिक होने पर उससे ५४०० असु घटाकर शेष की
क्रमज्या निकालेंगे । उसमें त्रिज्या जोड़ने से नत उत्क्रमज्या होगी ।
स्यान्नतोत्क्रम जीवाथ प्राक् सिद्धा ये नतासवः
स्वाहोरात्रासु गुणिताः सूक्ष्माश्चक्रासुभि (२१६००) र्हताः । ८० ।
नत असु को अपने अहोरात्र (सावन दिन) के असु से गुणा कर चक्र असु
(२१६००) से भाग देने पर सूक्ष्म नतासु आता है ।