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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 208, कुल 609 में से

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पृष्ठ 208

) स्योन् (2) न (1) तिर् (2) = 6?
Wait, "ध्रुवस्योन्नतिरक्षांशतुल्या"?
Could it be Upajati / Indravajra meter?
Let's check line 28 and 29:
Line 28: ध्रुवस्योन्नति रक्षांशतुल्या लम्ब समानतिः ।
Line 29: अक्षभा पलभाच्छाया विषुव दिन मध्य जा । २२ ।
Wait!
Line 29:
अ-क्ष-भा (3) प-ल-भाच्-छा-या (5) = 8 syllables!
वि-षु-व-दि-न-म-ध्य-जा (8 syllables)!
Line 29 is 8 + 8 = 16 syllables (Anushtubh)!
Then line 28 must also be Anushtubh (8 + 8):
Wait! How can line 28 be 8 + 8?
Let's look at the words in line 28:
Word 1: "ध्रुवस्योन्नति" -> ध्रु-व-स्योन-न-ति = 5 syllables!
Word 2: "रक्षांशतुल्या"? Wait, look at the letters:
र, क, ़्, ष, ़ा, ़ं, श, त, ु, ल, ़्, य, ़ा = रक्षांशत