सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 173, कुल 609 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 173

७६ सिद्धान्त दर्पण
चान्द्रमास मलमास कहा जाता है । आगामी अमान्त चान्द्रमास के अन्तर्गत माना
जाता है । एक चान्द्र मास में दो रवि संक्रान्ति होने से उसे क्षयमास कहते हैं ।
क्षय मास के पहले और बाद में चार मास के भीतर एक एक मलमास यानी उस
वर्ष दो मलमास होता है । पूर्व मलमास संसर्प, क्षयमास को अंहस्पति तथा द्वितीय
मलमास को मल कहा गया है । दोनों मल और क्षय मास विवाह आदि शुभ
कार्यों के लिए वर्जित हैं ।
श्रौत स्मार्तक मासि काब्दिक विधौ संसर्पका हस्पती
शुद्धौनात्र मलिम्लुचः सचमला तीता ब्दिके गृह्यते ।
कर्मारम्भ समाप्ति मध्य उपरागादौ तथा दुर्लभे
योगे चा गति के व्रते जनु रमा श्राद्धेषु पूजादिषु । २०८ ।
वेद और स्मृति विहित यज्ञ आदि कर्म, मासिक और वार्षिक श्राद्ध आदि
संसर्प और अंहस्पति इन दो मासों में हो सकता है । लेकिन दूसरे मलमास में
नहीं होगा । मृतक के वार्षिक श्राद्ध तथा कर्म