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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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ग्रह स्फुटी करणम् ५७
एवं सूक्ष्म विधौ कार्यः स्थूलेतु स्वांक (९) भाग युक् ।
प्राग्भिरिष्टे पर्व सन्धि मात्रदृक्साम्य लाभतः । ९९ ।
सूक्ष्मगणना के लिए इस प्रकार मन्द परिधि निकाली जाती है । स्थूल गणना
के लिए इतनी अधिक गणना नकर पूर्व नियम के अनुसार मन्द परिधि निकाल
कर उसमें उसका १/९ भाग जोड़ देते हैं । इसमें सिर्फ पर्व सन्धि (पूर्णिमा या
अमावस्या का ) दृक् समता होती है ।
विधोरुक्तः स (३१।३०) कोटिज्‌या गुणिते स्त्रिगुणे (३४३८) हृतेः
खगुणैः (३०) कर्कि नक्रादौ कलाभि र्युगवियुक् स्फुटः । १०० ।
चन्द्र मन्दोच्च की कोटिज्‌या को ३० से गुणा कर त्रिज्या ( ३४३८) से भाग
दें । कलादि फल को चन्द्रमन्द केन्द्र कर्क आदि ६ राशि में रहने पर विषम
पदान्तीयमन्द परिधि (३१।३०) में जोड़े चन्द्र मन्द केन्द्र मकर आदि ६ राशि में रहने
पर इस कलादि फल को उसी (३१।३०) से घटाये । इस प्रकार चन्द्रमा की मन्द
परिधि स्फुट होगी ।
कुजादङ्गांपक्षांशा गोऽङ्गानि (६९) गिरि वाहवः । (२७) .
सार्द्धा ब्धिरामा (३४।३०) स्तपना (१२) ऽ गोऽग्नयः
(३९) परिधेर्मृदो । १०१ ।
मंगल की मन्द परिधि अंशादि ६९
बुध ,, ,, २७
गुरु ,, ,, ३४।३०
शुक्र ,, ,, १२
शनि ,, ,, ३९
शैघ्रा परिधयो भौमाद् युग्मान्तेऽष्टाग्नि बाहवः (२३८) नव विश्वे
(१३९) ख गिरयो (७०) भूषट् पक्षा (२६१) नवाग्नय । १०२ ।
मंगल युग्मपदान्त की शीघ्र परिधि- २३८ अंश
बुध ,, ,, १३९ ,,
वृहस्पति ,, ,, ७० ,,
शुक्र ,, ,, २६१ ,,
शनि ,, ,, ३९ ,,
ओजान्तेऽद्व्यग्नि ने त्राणि (२३७) नभःशक्रा (१४०) नवर्तवः (६९)
द्व्यंग पक्षा (२६२) गजगुण (३८) स्तेषान्तु स्फुटतोच्यते । १०३ ।
ओज पदान्तो में शीघ्र परिधि
मंगल-२३७ अंश, बुध-१४० अंश, वृहस्पति, ६९ अंश शुक्र-२६२ अंश तथा
शनि ३८ अंश ।