सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 136, कुल 609 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 136

नानाविध संस्कार वर्णन ३९
अन्यथा स्फुट मार्तण्डा दयनांश परिष्कृतात्
अभुजान्तर संस्काराद् यत्तत् फल युगं पृथक् । ४१ ।
यदि रवि मन्दफल की कला के बराबर लिया जाय तो भुजान्तर संस्कार रहित
रवि (मन्दस्फुट) से उदयान्तर संस्कार तथा भुजान्तर दोनों अलग अलग होंगे ।
भूगोल मध्य परिधिः स्वदे शाक्षकला हतः
भचक्रलिप्ति काप्तः स्याद् व्यक्षात् याम्योत्तरान्तरम् । ४२ ।
मध्य भूपरिधि को अपने स्थान के अक्षांश कला से गुणन कर २१, ६०० कला
(वृत्त ३६० की कला) से भाग देने से निरक्ष (विषुव) से उत्तर या दक्षिण अपने
स्थान की दूरी आती है । यह दूरी अपने स्थान के याम्योत्तर वृत्त पर होगी ।
प्राज्य श्रमेण यत्कार्या पर्यय ज्यादि मार्जना
कूचना चार्य वत्कुर्यां सूर्याद्य पदका द्यतः । ४३ ।
ग्रह निकालने में बहुत परिश्रम आवश्यक होने के कारण मैं कूचनाचार्य की
तरह यहाँ पदक तालिका दे रहा हूँ ।
तत्रादौ मध्यमार्कस्य मेषसंक्रमणादनू ।
एकादि वर्ष संख्योत्थ सावनाहर्गण क्रमात् । ४४ ।
मध्यमसूर्य के मेष संक्रमण से आरम्भ कर एक, दो.... आदि वर्ष पूरे होने तक
अहर्गण दिये गये हैं ।
पंक्तिभिः लेखनीयोऽस्य सञ्चयो वारशोधनात्
विषमश्चेन्निरे को वा सै को वा क्रियतामसौ । ४५ ।
जितने वर्षों में अहर्गण की आवश्यक है उतने आवश्यक स्थानों की संख्यायें
जोड़कर ७ से भाग दें । शेष द्वारा निर्धारित वार नहीं मिलने पर उसमें एक जोड़ने
या घटाने से वार शुद्धि होगी ।
एवमानीय दिवसं पञ्जिका मुख सम्मतम् ।
तत्प्राग् दिने स्वपदकैः कार्या राश्यादि सञ्चयः । ४६ ।
पञ्जिका प्रारम्भ दिवस का अहर्गण लाकर उसके पूर्व दिवस का ग्रह अपनी
अपनी सारणी के आवश्यक दिनों के संख्याओं को जोड़कर निकाला जायेगा ।
अत्राधोऽधः स्थराश्यादि पञ्चकाढ्याः कुवासराः
एकाद्यर्बुद पर्यन्ता, स्थाप्यस्तत् पदकान्ततः । ४७ ।
गतियों का योग राशि से आरम्भ ५ विभागों (परा) तक किया जाता है इस
प्रकार १ से १० करोड़ (अर्बुद) अहर्गण तक की गति निकलेगी)
कल्यादि करणाब्दादि ध्रुवाः खेटोङ्ग पालकाः ।
द्वेधा लेखा गतिच्छेद हार देशक लिप्तिकाः । ४८ ।