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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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१६ सिद्धान्त दर्पण
इनमें साधारण सावन दिन का ही लोक व्यवहार होता है । जिसके १/६०
भाग को घटिका या दण्ड कहते हैं ।
स्वस्व पर्ययकलाः कुवासरै भाजिताः स्वगतयः कलादयः
एवमात्म भगणाप्त घस्रतः स्वस्व पर्यय दिनादयः फलम् । १६ ।
ग्रह के कल्प भगण कला को सावनदिन से भाग देने पर ग्रह की दैनिक
कला आदि गति आती है । कल्प सावन दिन संख्या में ग्रह की भगण संख्या
से भाग देने पर ग्रह के एक भगण की पूर्ति का समय निकलता है ।
स्व स्व षष्टि लवकैः समन्विताः सुरिभिर्दिन घटी पलादयः
कल्पिताः समय सूक्ष्मताप्तये राशिभाग कलिकादि वद् बहु । १७ ।
वृत्त के राशि, अंश के जिस प्रकार (१/६०) द्वारा भाग कला आदि विभाग
हैं, विद्वान् उसी प्रकार एक दिन के भीतर ६०, ६० भाग कर दण्ड, पल, विपल
आदि सूक्ष्म समय विभाग करते हैं ।
सूर्य पर्यय दिनादयः क्रमात् मार्गणांग दहनाः (३६५) शरेन्दवः (१५)
भूगुणाः(३१) क्षितिगुणा (३१) श्रुतुर्भुजाः (२४) संक्रमार्थमनुवर्ष मीरिताः ।१८।
सूर्य के एक पूर्ण भगण के दिन आदि हैं-३६५।३१।३१।२४ ।
राशि भुक्ति दिवसादयो गुरो र्मध्यमस्य कुरसाग्नयः (३६१) शराः (५)
भानि (२७) गुणभूमि (१३) सम्मिता जैव वत्सर कृते मयोदिताः । १९ ।
मध्यम गुरु को एक राशि भोग करने में दिन ३६१।५।२७।२७।१३ लगते हैं ।
जिसे गुरु वर्ष कहा जाता है ।
लिख्यन्ते क्षिति सावनैक दिवसे तद् भुक्तयो मध्यमा
लिप्ताद्या दशधा यदा हत दिनै रायान्ति मध्य ग्रहाः ।
भानो रंक शरा (५९) गजा (८) दश (१०) दिशः
(१०) सिद्धाः (२४) सहस्रांशव (१२)
त्रिंशत् (३०) वारिधयो (४) वियद् विधुमिता (१०)
रत्नाकराः (४) कीर्तिताः । २० ।
सूर्य की दैनिक मध्यम गति- ५९।८।१०।१०।२४।१२।३०।४।१०।४ (कलादि)
चन्द्रस्याभ्रनवाद्रयः (७९०) कृतगुणा (३४) द्वयर्था (५२)
स्त्रयो (३) ऽङ्कोब्धयो (४९)
नागा (८) द्वै (२) रसभूमयश्च (१६) हरित (१०)
चन्द्रेन्दु संख्या (११ ) क्रमात् ।
भौमस्येन्दु गुणा (३१) रसेक्षणमिता (२६) त्रिंशत् (३०)