सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभगण आदि का वर्णन १५
एक कल्प में अधिमास संख्या (१,५९, ३३,३६,०००)
एक कल्प में सौर दिन संख्या (१५,५५,२०,००,००,०००)
दन्त्यनन्त ख ख खाग्निं खाष्ट्यो वासरा, शशभृतो युताहताः
(१६,०३,००,००,८०,०००)
शून्य शून्य गगनाष्ट दृक् द्विपाद्रीन्दु गोनग
नगाशुगेन्दवः (१५,७७,९१,७८,२८,०००) (१०)
भानु पश्चिम परिभ्रमोन्मिताः सावनाः कुदिवसा अमीमताः ।
अम्बराम्बर खदृक् शराकृति व्याल खेन्द्रिय यमा
(२५,०८, २२, ५२,०००) स्तिथिक्षयाः । ११ ।
एक कल्प में चान्द्रदिन संख्या (१६,०३,००,००,८०,०००)
,, (रवि) सावन दिन संख्या (१५,७७,९१,७८,२८,०००)
,, क्षयतिथि संख्या (२५,०८,२२,५२,०००)
तुंगखेट भगणान्तरैर्मता मन्द केन्द्र चलकेन्द्र पर्ययाः ।
पूर्ति मेति न युगे यतो ऽखिलः पर्ययस्तदिह कल्प ईरितः । १२ ।
ग्रह और उसके उच्च के बीच चापीय (कोण) अन्तर को केन्द्र कहते हैं शीघ्र
उच्च से दूरी को शीघ्र केन्द्र तथा मन्द उच्च से मन्द केन्द्र कहा जाता है । उच्च
भगण और ग्रह भगण का अन्तर केन्द्र भगण हुआ । ग्रहों के उच्च और पात आदि
के भगण युग में पूर्ण नहीं हो पाते हैं, अतः उनके कल्प भगण कहे जाते हैं (कल्प
या १००० युग में ये भगण पूर्ण होते हैं ।)
द्राक् चलाशु चपलादि नामभिः शीघ्र तुंग उदितो महात्मभिः ।
उच्च मन्द मृदुनामभिस्तथा वर्ततेऽत्र मृदुतुंग पर्ययाः । १३ ।
द्राक् चल, आशु तथा चपल आदि शीघ्रोच्च के पर्याय हैं । मृदु, उच्च, मन्द
आदि मन्दोच्च के पर्याय हैं ।
खपूर्ण पूर्ण रस चन्द्र बाहवे (२१६,०००)
स्तर्क वाजि नवचन्द्र बाहवो (२१,९७६)
शून्य बाहु गुण चन्द्र बाहवो (२१,३२०)
रन्ध्र पञ्चरस चन्द्र बाहवोः (२१,६५९) । १४ ।
भार्क चन्द्र कु दिना सवः क्रमादेत एव हि भवन्ति मध्यमाः ।
किन्तुषष्टि घटिकात्म सावनै वासरै व्यवहरन्ति जन्तवः । १५ ।
२१,६०० असु = १ मध्यम नाक्षत्र दिन
२१,९७६ असु = १ ,, सौर दिन
२१,३२० असु = १ ,, चान्द्र दिन
२१, ६५९ असु = १ ,, सावन दिन