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सर्वकोश
सिद्धसिद्धान्तपद्धति (गुरु गोरखनाथ - पिण्ड-उत्पत्ति, पिण्ड-विचार एवं ब्रह्माण्ड-एकात्म दर्शन)

सिद्धसिद्धान्तपद्धति (गुरु गोरखनाथ - पिण्ड-उत्पत्ति, पिण्ड-विचार एवं ब्रह्माण्ड-एकात्म दर्शन)

Siddha Siddhanta Paddhati of Guru Gorakhnath with Commentary

गुरु गोरखनाथ (सम्पादक: गोरक्षनाथ मन्दिर शोध संस्थान, गोरखपुर) द्वारा

DevanagariHindipublished222 पृष्ठ

पृष्ठ 138, कुल 222 में से

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पृष्ठ 138

विष्णुलोकः कुक्षौ तिष्ठति तत्र विष्णुर्देवता पिण्डमध्ये-
ऽनेकव्यापारको भवति । हृदये रुद्रलोकस्तत्र रुद्रो देवता
पिण्डमध्य उग्रस्वरूपो तिष्ठति । वक्षःस्थल ईश्वरलोकस्तत्रे-
श्वरो देवता पिण्डमध्ये तृप्तिस्वरूपी तिष्ठति । कण्ठमध्ये
नीलकण्ठलोकस्तत्र नोलकण्ठो देवता पिण्डमध्ये नित्यं तिष्ठति ।
तालुद्वारे शिवलोकस्तत्र शिवो देवता पिण्डमध्येऽनुपमस्वरूपी
तिष्ठति । लम्बिकामूले भैरवलोकस्तत्र भैरवो देवता पिण्डमध्ये
सर्वोत्तमस्वरूपी तिष्ठति । ललाटमध्येऽनादिलोकस्तत्रानादि
देवता पिण्डमध्य आनन्द पराहंतास्वरूपी तिष्ठति । शृङ्गाटे
कुललोकस्तत्रकुलेश्वरो देवता पिण्डमध्ये आनन्दस्वरूपी
तिष्ठति । शङ्खमध्ये नलिनोस्थानेऽकुलेश्वरो देवता पिण्डमध्ये
निरभिमानावस्था तिष्ठति । ब्रह्मरन्ध्रे परब्रह्मलोकस्तत्र
परब्रह्म देवता पिण्डमध्ये परिपूर्णदशा तिष्ठति । ऊर्ध्वकमले
लोकस्तत्र परमेश्वरो देवता पिण्डमध्ये परापरभावस्तिष्ठति ।
त्रिकूटस्थाने शक्तिलोकस्तत्र पराशक्तिर्देवता पिण्डमध्येऽस्ति-
त्वावस्था सर्वासां सर्वकर्तृत्वावस्था तिष्ठति । एवं पिण्डमध्ये
सप्तपातालसहितैकविंशति ब्रह्माण्डस्थानविचारः ॥ ५ ॥
( जिस तरह ब्रह्माण्ड में विष्णुलोकादि उच्चलोक स्थित हैं, उसी तरह
व्यष्टि-पिण्ड में वर्तमान इन शिवशक्तिरूप में अभिव्यक्त उच्च सूक्ष्म लोकों का
साधक दर्शन कर परमात्मा का साक्षात्कार करता है ।) हमारे व्यष्टि-पिण्ड में
कुक्षि ( नाभि-देश -उदर ) में विष्णुलोक है, वहाँ रक्षण-पोषण आदि अनेक
व्यापार ( कार्य ) में तत्पर भगवान् विष्णु विराजमान हैं । हृदय में रुद्रलोक है,
उसमें अपने उग्र रूप में संहार आदि कार्यों में तत्पर भगवान् रुद्रदेव विद्यमान हैं ।
हृदय से थोड़ा ऊपर वक्षःस्थल है, उसमें ईश्वरलोक है, उसमें पिण्ड के मध्य में
तृप्तिस्वरूप ईश्वर देवता विराजमान हैं । कण्ठ के मध्य में नीलकण्ठ लोक है,
वहाँ नीलकण्ठ ( शिव ) शरीर के भीतर नित्य स्थित हैं । तालुद्वार में शिवलोक
६६ ] [ सिद्धसिद्धान्तपद्धति