शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
पृष्ठ 187, कुल 544 में से
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सार—वर्षामें दुखिया और सुखिया सभी
के मनमें कामवासना उदय हो आता है ।
42. The sky overcast with clouds, the earth full of new sprouts,
the air fragrant with the smell of newly-blossomed Kutaja and
Kadamba flowers and the forest pleasant on account of the charm-
ing voice of peacocks,—all these give rise to amorous feelings in the
hearts of happy and the unhappy men alike.
—*—
उपरि धनं धनपटलं तिर्यगिरयोरपि नर्तितमयूराः ।
वसुधा कंदलधवला तुरिष्ठे पथिकः कयातु संलप्तः ॥४३॥
सिरके ऊपर धनवोर घटयें छा रही हैं, दाहिने-बायें दोनों
तरफके पहाड़ोंपर मोर नाच रहे हैं ; पैरोंके नीचेकी जमीन नवीन
अंकुरोंसे हरी हो रही है—ऐसे समयमें जबकि चारों ओर कामोद्दीपन
करनेवाले सामान नज़र आते हैं, विरह-व्याकुल पथिकको कैसे सन्तोष
हो सकता है ? ॥४३॥
खुलासा—सिर पर मेघोंका शामियाना, पैरोंके नीचे हरी-हरी
दूबका कालीन और अगल-बगलमें मद्भस्त मोरोंका नाचना
देखकर, बटोहीके मनमें प्यारीसे मिलनेकी उत्कट अभिलाष
दुष्ट बिन नहीं रहती । वह बहुत-कुछ धीरज धरता है, पर जब
चारों ओर कामोद्दीपक पदार्थोंको देखता है, तब फिर अधीर
हो जाता है । बहुत लिखनेसे क्या—वर्षामें विरही