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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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पृष्ठ 59

महावीरी व्याख्या चौ. १६: तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज-पद दीन्हा॥ १६ ॥
शब्दार्थ—उपकार ▸ भलाई।
अर्थ—आपने सुग्रीवका महान् उपकार किया तथा उन्हें श्रीरामजीका
दर्शन कराकर किष्किन्धाका साम्राज्य दे दिया।
व्याख्या—भाव यह है कि आपके बिना सुग्रीव कुछ भी नहीं कर पाते।
पहले उन्हें श्रीरामजीको देखकर भय हुआ, पर उन्होंने जब आपकी पीठपर
बैठे हुए श्रीरामजीको देखा तभी सम्यक् दर्शन हुआ। क्योंकि परमात्माका
सम्यक् दर्शन सन्त-दृष्टिके बिना संभव नहीं है। यथा—
तहँ रह सचिव सहित सुग्रीवा।
आवत देखि अतुल-बल-सींवा॥
अति सभीत कह सुनु हनुमाना।
पुरुष जुगल बल-रूप-निधाना॥
—रा.च.मा. ४-१-२,३
पश्चात् सम्यक् दर्शन—
जब सुग्रीव राम कहँ देखा।
अतिशय जन्म धन्य करि लेखा॥
—रा.च.मा. ४-४-६
राम मिलाय—श्रीरामजीसे मिलनेकी सुग्रीवमें कोई योग्यता नहीं थी,
पर आपने अपनी विशेष कृपाके आधारपर श्रीरामजीको सुग्रीवके पास ले
जाकर उन्हें कृतकृत्य किया। अतः आञ्जनेयको सुग्रीवदुःखैकबन्धु (वि.प.
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