श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary
गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मविभूषण-विभूषित जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य भारतके प्रख्यात
विद्वान्, वैयाकरण, शिक्षाविद्, बहुभाषाविद्, महाकवि, भाष्यकार, दार्शनिक,
रचनाकार, संगीतकार, प्रवचनकार, कथाकार, व धर्मगुरु हैं। वे चित्रकूट-स्थित
श्रीतुलसीपीठके संस्थापक एवं अध्यक्ष और जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग
विश्वविद्यालय चित्रकूटके संस्थापक एवं आजीवन कुलाधिपति हैं। स्वामी
रामभद्राचार्य दो मासकी आयुसे प्रज्ञाचक्षु होते हुए भी २२ भाषाओंके ज्ञाता, अनेक
भाषाओंमें आशुकवि, और शताधिक ग्रन्थोंके रचयिता हैं। उनकी रचनाओंमें चार
महाकाव्य (दो संस्कृत और दो हिन्दीमें), रामचरितमानसपर हिन्दी टीका, अष्टाध्यायीपर
गद्य और पद्यमें संस्कृत वृत्तियाँ, और प्रस्थानत्रयीपर (ब्रह्मसूत्र, भगवद्गीता, और प्रधान
उपनिषदोंपर) संस्कृत और हिन्दी भाष्य प्रमुख हैं। वे तुलसीदासपर भारतके मूर्धन्य
विशेषज्ञोंमें गिने जाते हैं और रामचरितमानसके एक प्रामाणिक संस्करणके संपादक हैं।
प्रस्तुत पुस्तक सनातन धर्मके सर्वाधिक लोकप्रिय स्तोत्र श्रीहनुमान्-चालीसापर
स्वामी रामभद्राचार्यकी महावीरी व्याख्याका तृतीय संस्करण है। ईस्वी सन् १९८३में
मात्र एक दिनमें प्रणीत इस व्याख्याको रामचरितमानसके अंग्रेज़ी व हिन्दी अनुवादक
डॉ. रामचन्द्र प्रसादने श्रीहनुमान्-चालीसाकी 'सर्वश्रेष्ठ व्याख्या' कहा है। अनेक
टिप्पणियों और परिशिष्टों सहित महावीरी व्याख्याका परिवर्धित अंग्रेज़ी अनुवाद भी
Mahāvīrī: Hanumān-Cālīsā Demystified नामसे प्रकाशित हो चुका है।
₹50 विशिष्ट मूल्य
ISBN 978-93-82253-07-5
ज.रा.दि.वि.
www.jrhu.com
9 789382 253075