शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतृतीयपटलः । (६५)
टीका-खट्टा रूखा तीक्षण लोन सरसों कडुभा
बहुत भ्रमण करना प्रातःकाल स्नान शरीरमें तेल म-
र्दन करना ॥ ३६ ॥ स्वर्णआदिककी चोरी हिंसा म-
नुष्यसे द्वेष व अहंकार अनार्यव अर्थात् मनुष्यसे प्रेम
न रखना, उपवास, झूठ, ममता, प्राणीको पीडा देना॥३७॥
स्त्रीका सङ्ग, अग्निसेवन, प्रिय, अप्रिय, बहुत बोलना,
बहुत भोजन करना योगीको उचित है कि, यह सब
अवश्य त्यागदे ॥ ३८॥
मूलम्-उपायं च प्रवक्ष्यामि क्षिप्रं योगस्य
सिद्धये ॥ गोपनीयं साधकानां येन सि-
द्धिर्भवेत्खलु ॥ ३९ ॥
टीका-अब हम बहुत शीघ्र योग सिद्ध होनेका उपा-
य कहते हैं इसको गोप्य रखनेसे साधकको योग निश्च-
य सिद्ध होजायगा ॥ ३९ ॥
मूलम्-घृतं क्षीरं च मिष्टान्नं ताम्बूलं चूर्णव-
र्जितम्॥कर्पूरं निष्ठुरं मिष्टं सुमठं सूक्ष्मव-
स्त्रकम् ॥४०॥ सिद्धान्तश्रवणं नित्यं वैरा-
ग्यगृहसेवनम् ॥ नामसङ्कीर्तनं विष्णोः सु-
नादश्रवणं परम् ॥४१॥ धृतिः क्षमा तपः
शौचं ह्रीर्मतिर्गुरुसेवनम् ॥ सदैवतानि परं
योगी नियमेन समाचरेत् ॥ ४२ ॥