शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ४८ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता ।
वासनारूपी बेडीमें फँसके मालाके तरह घूमा
करता है ॥ ३९ ॥
मूलम्--नानाविधगुणोपेतः सर्वव्यापारका-
रकः ॥ पूर्वार्जितानि कर्माणि भुनक्ति
विविधानि च ॥ ४० ॥
टीका-सोई जीव नानाप्रकारके गुण ग्रहण करताहै
और संसारमें बहुत प्रकारके व्यापार करताहै यह सब
पूर्वार्जित शुभाशुभ कर्मके फल भोगताहै ॥ ४० ॥
मूलम्--यद्यत्संदृश्यते लोके सर्वं तत्कर्मस-
म्भवम् ॥ सर्वः कर्मानुसारेण जन्तुर्भोगा-
न्भुनक्ति वै ॥ ४१ ॥
टीका-जो जो शुभाशुभ कर्म संसारमें देखपड-
ताहै वह सबका आदिकारण कर्मही है प्राणीमात्र
अपने कर्मके अनुसार भोग भोगता है ॥ ४१ ॥
मूलम्--ये ये कामादयो दोषाः सुखदुःख-
प्रदायकाः॥ ते ते सर्वे प्रवर्तन्ते जीवकर्मा-
नुसारतः ॥ ४२ ॥
टीका-जो जो काम क्रोध आदिसे सुख दुःख होताहै
सो सब जीवके कर्महीके अनुसार वर्तताहै ॥ ४२ ॥